करोड़ो खर्च के बावजूद नहीं निकल पाया गांव से नया ‘लिम्बाराम’

करोड़ो खर्च के बावजूद नहीं निकल पाया गांव से नया ‘लिम्बाराम’
ना खेल मैदान मिले ना उपजे गांव से खेल के हीरे

bhuvanesh pandya | Updated: 10 Jul 2019, 11:51:03 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- ना खेल मैदान मिले ना उपजे गांव से खेल के हीरे

- योजनाएं आती गई, नाम बदलते गए सब बेकार

- ‘एट लिस्ट वन आउटडोर खेल मैदान’ केवल कागजी

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. गांवो से खेल प्रतिभाएं तराशकर राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर की ओलम्पिक व एशियाड सरीखी खेल प्रतियोगिताओं में अपना झंडा फहराने की योजना पर राजस्थान में पलीता लग गया। प्रदेश में गांवों में खेल मैदान विकसित करने के लिए एक के बाद एक योजनाएं आई, योजनाओं के नाम हर बार बदलती सरकार के हिसाब से बदलते चले गए, लेकिन ना किसी गांव की माटी से कोई नया लिम्बाराम नहीं निकल पाया। योजनाएं कागजों में उतरती गई, करोड़ों रुपए खर्च होते गए, लेकिन खेल मैदान जमीन पर नहीं उतर पाया।

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सरकार की ओर से प्रदेश में खेल मैदानों के निर्माण के लिए जारी राशि वर्ष जारी राशि

२०१२-१३ ६८९.५७ लाख

२०१४-१५ ५२६ लाख

२०१६-१७ ४९९.९४ लाख

२०१७-१८ ४०० लाख

२०१८-१९ ९०० लाख

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एेसे योजनाएं आई और चली गई...

- भारत सरकार द्वारा 1.4.14 से राज्‍य में पंचायत युवा क्रीडा और खेल अभियान पायका बंद कर दी गईं । इसके स्‍थान पर राजीव गॅाधी खेल अभियान आरजीकेए (राजीव गांधी खेल अभियान) योजना पुर्ननामांकित कर शुरू की गई है। दिनांक १.4.16 से राजीव गॅाधी खेल अभियान योजना के स्‍थान पर नवीन योजना खेलों इण्डिया लागू की गई है। - ग्रामीण खिलाडियों को सुविधा उपलब्‍ध करवाये जाने के लिए प्रत्‍येक ग्राम पंचायत पर चरणबद्ध रूप से खेल मैदान विकसित करने के लिए समन्वित स्‍टेडियम, खेल आधारभूत संरचनाएं विकास कार्यक्रम 2015 के अन्‍तर्गत ग्राम पंचायत स्‍तर पर प्रचलित ‘एट लिस्ट वन आउटडोर खेल मैदान’ बनाये जाने का तय किया गया। जिसे स्‍थानीय स्‍तर पर मनरेगा योजना के तहत जिला परिषद के माध्‍यम से बनाये जाने थे। इसे लेकर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा परिपत्र 29 अप्रेल 2015 को जारी किया गया।

- समन्वित स्‍टेडियम, खेल आधारभूत संरचनाएं विकास कार्यक्रम 2015 के अन्‍तर्गत तहसील स्‍तर पर स्‍टेडियम निर्माण एवं विकास कार्य करवाये जाने का प्रावधान हैं।

- स्‍टेडियम निर्माण के निर्धारित प्रपत्र में प्रस्‍ताव मांगे गए थे, यह तय किया गया कि बजट उपलब्धता के आधार पर काम होगा। स्‍टेडियम बनने के बाद ही खेल सामग्री व कोच की नियुक्ति करने का प्रावधान है।

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इसलिए नहीं मिल पाया कोई खास लाभ : उदयपुर के लिए ये था विशेष:

- सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के उत्‍कृष्‍ट खिलाडियों के लिए अधिसूचना 15 मार्च 13 के द्वारा अधीनस्‍थ मंत्रालयिक सेवाओं में 2 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। इसी प्रकार राजस्‍थान, जनजाति उपयोजना क्षेत्र भी शामिल है, उनके खिलाडी जिन्‍होंने ओलम्पिक खेलों, विश्‍व कप, एशियन खेलों एवं कॅामन वेल्‍थ्‍ा खेलों में कोई पदक प्राप्‍त किया है, उन्‍हें अधिसूचना ३ जुलाई 17 की ओर से विभिन्‍न सेवाओं के लिए नियुक्ति का प्रावधान बनाया गया, लेकिन इसका लाभ काफी कम खिलाडि़यों को मिला है, यदि मैदान विकसित हो जाए और वहां से नए खिलाड़ी सामने आए तो पदक के साथ-साथ प्रशिक्षक उपलब्ध होंगे और गांवों की इन प्रतिभाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

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योजनाएं तो आई लेकिन जमीनी स्तर पर ये खेल मैदान कहीं नहीं बन पाए। जो भी स्थिति रही हो, लेकिन इसी कारण प्रदेश के खेल को नुकसान जरूर हुआ। यदि मैदान विकसित होते तो फायदा नई पीढ़ी को तो मिलता ही देश को नए प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिल जाते। आम तौर पर किसी भी गांव में विभाग वर्षभर में एक प्रतियोगिता करवाता है। जो गांव से निकल कर बाहर आ गए एेसे खिलाडि़यों को मौका मिल जाता है, लेकिन आज भी गांवों में एक से एक बेहतर खिलाड़ी हैं, यदि उन्हें मैदान और प्रशिक्षण के साथ अवसर मिल जाए तो वह बड़ा नाम कर सकते हैं।

ललितसिंह झाला, जिला खेल अधिकारी उदयपुर

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