देवास प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाओ, जिंक की लाइन से अब मावली में पानी पहुंचाओ

- विधानसभा में विधायक मीणा व धर्मनारायण बोले
- उदयपुर की कई कॉलोनियों के पानी की समस्या भी उठाई

By: Mukesh Kumar Hinger

Published: 07 Mar 2021, 11:41 AM IST

उदयपुर. विधानसभा में शुक्रवार को पानी पर हुई चर्चा के दौरान उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा कि सरकार ने देवास तृतीय च चतुर्थ को लेकर फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने की घोषणा कर रही है जबकि जरूरत यह है कि देवास प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने की।
विधायक मीणा ने सदन में कहा कि यह प्रोजेक्ट तो पहले ही बन गया थ्साा अभी तो इसे क्रियान्वित करने की जरूरत है, ऐसा होगा तो उदयपुर संभाग पानी से तर हो जाएगा, वहां से पानी बहकर जा रहा है। विधायक मीणा ने कहा कि रकमपुरा में मेगा आवास योजना में रहने वाले लोग आज भी पानी को तरस रहे है, वहां पानी की सप्लाई नहीं है, उन्होंने कहा कि और भी मेगा आवास योजना में जहां मकान बना रहे है वहां पानी का प्रबंध किया जाए, लोग 500-500 रुपए में टैंकर खरीद रहे है। मीणा ने कानपुर, कलड़वास, एकलिंगपुरा, नाई, बड़ी, नाकोड़ा नगर प्रथम, द्वितीय, थर्ड, नाकोड़ापुरम, रतनपुरा, आदर्श नगर, सौभाग्य नगर, गायत्री नगर, जनकपुरी, प्रेमनगर, तीतरड़ी आदि कॉलोनियों में जनता तक पानी पहुंचाएं। मीणा ने कहा कि पिछले बजट में जयसमंद के लिए पाइप लाइन बिछाने के लिए 251 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा लेकिन उसका अभी तक क्या हुआ? उन्होंने कहा कि यूआइटी की कॉलोनियां भी बहुत बन गई है, उनमें जयसमंद द्वारा पानी की सप्लाई अगर की जाती है तो समस्या का समाधान हो जाएगा। मीणा ने चित्रकूटनगर, भुवाणा, नवरत्न कॉम्पलेक्स, डीपीएस स्कूल के पास, मीरा नगर बी ब्लॉक आदि क्षेत्र की पेयजल समस्या भी उठाई।

बागोलियो के 56 करोड़ की योजना मंजूर करों

पेयजल व्यवस्था पर बोलते हुए मावली विधायक धर्मनारायण जोशी ने कहा कि उदयपुर के उदयसागर से बहता-बहता पानी बीसलपुर जाता है, उस पानी को नहर के माध्यम से डायवर्ट करें, 56-57 करोड़ की योजना है, इस योजना को स्वीकृत कर बागोलिया तालाब को भरने की व्यवस्था करें। मावली क्षेत्र के आमली पंचायत में साढ़े तीन करोड़ का फिल्टर प्लांट बना हुआ है, वहां से आसपास के पांच गांवों में पानी सप्लाई होना था, एक गांव में पानी सप्लाई हो रहा है। अधिकारियों ने जब योजना बनी तब सीमेंट के पाइप डाल दिए और अब वे धंस गए है, उनका कुछ नहीं हुआ है। साबरदिया की टंकी 20 साल से बनी है, उसमें एक भी बाल्टी पानी भी नहीं आया है। सवानिया, सरेगांव की टंकियों की स्थिति भी विधायक ने रखी तो फतहनगर की टंकी की जर्जर हालत बताई। विधायक ने कहा कि हिन्दुस्तान जिंक जिसने मानसी वासल योजना के लिए पैसा दिया था, 31 दिसम्बर 2020 को उसका अनुबंध खत्म हो गया था, वह लाइन भी पड़ी हुई है, उस लाइन से मावली तहसील में स्कीम बनाकर पानी की सप्लाई की जाए। जोशी ने कहा कि देवास थर्ड व फोर्थ फेज का 2013 में कार्यालय खुल गया, स्टाफ भी है और वे फालतू बैठे है। हमारी एक स्कीम बिरोटी नाका की है अगर वह बनता है तो उदयपुर की बहुत बड़ी समस्या दूूर होगी। उदयपुर शहर में वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर यूआइटी पैसा लेती है, करोड़ों रुपए लोगों से लिए है, यूआइटी में न तो मॉनिटरिंग है और न कहीं पैसा लगाया है।


हाईकोर्ट बैंच के लिए उच्च न्यायालय से प्रस्ताव आता तो राज्यपाल को प्रस्तुत करेंगे

मावली विधायक धर्मनारायण जोशी के उदयपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय खंडपीठ की स्थापना के सवाल पर सरकार ने कहा कि
उच्च न्यायालय की खंडपीठ (बैंच) की स्थापना करना अकेले राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार का विषय नहीं है, द स्टेट रिओर्गेनाइजेशन एक्ट, 1956 की धारा 51 के अनुसार उच्च न्यायालय की स्थाई बैंच की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के परामर्श से की जाती है।
सरकार ने कहा कि उदयपुर में उच्च न्यायालय की बैंच की स्थापना के लिए उच्च न्यायालय से परामर्श/ प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रकरण राज्य सरकार द्वारा राज्यपाल के अनुमोदन प्रस्तुत किया जाएगा।


उदयपुर में अभी तारबंदी को लेकर कोई आवेदन लंबित नहीं

वन राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि जंगली जानवारों से फसलों को बचाने के लिए किसानों को तारबंदी के लिए अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसानों को कृषि विभाग में आवेदन करना होता है। उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए तारबंदी हेतु 50 प्रतिशत तक अनुदान देय है। विश्नोई ने उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के सवाल पर जवाब दे रहे थे। इस दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा 33 जिलों में 6 करोड़ 48 लाख रुपये के आवंटन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि 6 लाख 48 हजार मीटर तारबंदी करने के विरूद्ध 3 लाख 72 हजार की तारबंदी की गयी थी। उदयपुर जिले में वर्ष 2020-21 में लक्ष्यों के विरुद्ध 3 हजार 454 मीटर में तारबंदी की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। उन्होंने बताया कि उदयपुर में अभी तारबंदी को लेकर कोई आवेदन लंबित नहीं है। विधायक फूलसिंह मीणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र उदयपुर ग्रामीण में किसानों की खेती को जंगली जानवरों द्वारा नष्ट करने के संबंध में कोई प्रकरण विभाग को प्राप्त नहीं हुई है, मीणा ने कहा कि गोलमोल जवाब मत दीजिए। विस में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने पूछा कि इस योजना के तहत जो भी आवेदन करेगा उसको यह पैसा मिलेगा या नहीं, तो मंत्री ने कहा कि बाकायदा मिलेगा, जो लक्ष्य दे रखा है उसके अनुरुप पालना होगी तो फिर नहीं मिलेगा, बाकी फंड कहां है? इस बीच स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि मंत्रीजी टारगेट के हिसाब से रोजड़े आएंगे, किसान के लिए रोजड़े किसी भी खेत में आएंगे, आपका तो टारगेट है कि हम तो यहीं फैसिंग करें तो उस फैंसिंग के अलावा किसान क्या करेगा? बाद में स्पीकर ने मंत्री से कहा कि इस समस्या के संबंध में एक मीटिंग करें।

गौ संरक्षण के लिए जैसे मांग आती वैसे फंड आंवटित करते

मावली विधायक धर्मनारायण जोशी के सवाल पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गौ संरक्षण पर 1511 करोड़, 31 लाख 4 हजार 86 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुद्रांक विक्रय और मदिरा विक्रय पर देय वैट पर गौ संरक्षण अधिभार से प्राप्त राशि में से ये खर्च किया गया है। जोशी के पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि गौ संरक्षण के लिए तय प्रक्रियानुसार जैसे-जैसे मांग आती है, वैसे ही फंड आंवटित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय वर्ष 2015-2018 के दौरान गौ संरक्षण अधिभार से प्राप्त राशि में से वास्तविक खर्च काफी कम किया गया था। विस में नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने पूछा कि जून 2029-20 के बाद से जो समय निकला है 2021 के तीन महीने तक गोशाला को पैसा गया है क्या? धारीवाल ने कहा कि जून का रिकार्ड मेरे पास नहीं है, आपके पास भिजवा दूंगा।

Mukesh Kumar Hinger Desk
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