झीलों में नहीं चलेगी डीजल की नावें, पेट्रोल में यूरो 6 इंजन तो ही अनुमति

- राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति की बैठक - गुमानिया नाले की होगी सफाई- पांच लाख रुपए स्वीकृत- समिति में निर्णय, नगर निगम व यूआईटी चलाएगी एक-एक सोलर नाव

By: bhuvanesh pandya

Published: 04 Oct 2021, 09:53 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. अब जिले की किसी भी झील में डीजल की नावें नहीं चलाई जा सकेंगी, तो पेट्रोल की नाव भी तब ही चल सकेगी जब इसमें इंजन यूरो सिक्स होगा। पेट्रोल नाव संचालकों को आगामी छह माह में नया इंजन लगवाकर नवीनीकरण लेना होगा, तब ही वह नाव चला सकेंगे। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति की शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट में जिला कलक्टर चेतन देवड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। कलक्टर देवड़ा ने निर्देश दिए है कि हर पखवाड़े नगर निगम की पेट्रोलिंग टीम उन्हें इसे लेकर पूरी मुस्तैदी रखकर रिपोर्ट करेगी। यदि इस निर्णय की अनुपालना नहीं होती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। साथ ही झीलों के समीपस्थ क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा।

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नगर निगम व यूआईटी चलाएगी 1-1 सोलर बोट

फतहसागर व पिछोला में नगर निगम व यूआईटी एक-एक सोलर ऊर्जा की बोट चलाएगी। बैठक में सीएनजी बोट चलाने को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन इसके लिए पम्प लगाने पर बात आकर रुक गई, हालांकि पिछोला के समीप सीएनजी स्टेशन चिह्निकरण की बात सदस्यों ने रखी, लेकिन इस पर निर्णय नहीं हो सका। झीलों के जल को प्रदूषण से बचाने को लेकर लिए गए निर्णय के तहत सभी नाव संचालकों को भी जल्द से जल्द सोलर की नावें चलाने के लिए तैयार करने की बात कही गई।

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औचक निरीक्षण टीम का गठन

- डीजल की बोट नहीं चले इसके लिए एक औचक निरीक्षण टीम का जिला परिवहन अधिकारी के नेतृत्व में गठन किया गया है। टीम ये देखेगी कि नाव में ऐसा इंजन नहीं लगा हो जो झील के पानी को प्रदूषित करें।

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ये भी हुए निर्णय

- गुमानिया नाले से मलबा हटाया जाएगा। जिला कलक्टर ने इसके लिए यूआईटी से पांच लाख रुपए खर्च की स्वीकृति दी है।

- उदयसागर की जल कुंभी को हटाने के लिए डिविडिंग मशीन खरीद पर चर्चा की गई। इसे लेक र देवड़ा ने कहा कि नगर निगम के पास जो मशीन है उसे दस-दस दिन उदयसागर, फतहसागर व पिछोला में चलाकर सफाई करवाई जाए, साथ ही मेन पावर भी जरूरत पर लगाए जाए।

- झीलों के सीमांकन के लिए मोटाम लगाने का निर्णय लिया गया।

- कमल तलाई को लेकर नगर निगम आयुक्त एचएस बारहट ने बताया कि 1.74 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इस पर सामने आया कि इस खर्च के बावजूद प्राकृतिक स्त्रोतों से पानी आना बंद हो गया है। इस पर फिलहाल केवल चर्चा हुई कोई निर्णय नहीं हो पाया।

बैठक में स्मार्ट सिटी सीइओ निलाभ सक्सेना, यूआईटी सचिव अरुण हसीजा, उपाधीक्षक यातायात रतन चावला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विनय कट्टा और उच्च न्यायालय द्वारा मनोनीत सदस्य डॉ प्रवीण खडेलवाल व जीपी सोनी भी बैठक में मौजूद थे।

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इतनी चल रही है झीलों में नावे (परिवहन कार्यालय के अनुसार डीजल की नावें )

पिछोला - 38

फतहसागर- 22

जयसमन्द- 8

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डीजल की नावें तो पहले ही नहीं चल रही है, लेकिन सख्ती के लिए यह निर्णय लिया है। साथ ही पेट्रोल की नांवें भी तब ही चल सकेंगी, जब उसमें यूरो सिक्स इंजन होगा। इस इंजन को छह माह में लगाकर संबंधित संचालक को नवीनीकरण लेना होगा। झीलों में सोलर ऊर्जा से संचालित होने वाली नावों की शुरुआत कर रहे हैं। झील किनारे सीएनजी के रिफिलिंग पम्प लगाने समस्या होने के कारण सोलर ऊर्जा बेहतर विकल्प है।

चेतन देवड़ा, जिला कलक्टर उदयपुर

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झीलों में एक भी नाव डीजल से चल रही है तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, सीएनजी व सोलर ऊर्जा युक्त नाव चलाने के प्रेरित करेंगे।

डॉ कल्पना शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी उदयपुर

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