लेकसिटी में 27 महीने बाद गूंजेगी डायनासोर की आवाज, प्लान अनुमोदित, अब केंद्र सरकार की मुहर लगेगी, 5 करोड़ यूआईटी लगाएगी

लेकसिटी में 27 महीने बाद गूंजेगी डायनासोर की आवाज, प्लान अनुमोदित, अब केंद्र सरकार की मुहर लगेगी, 5 करोड़ यूआईटी लगाएगी

Mukesh Hingar | Publish: Dec, 09 2017 09:59:18 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

अब उदयपुर में उप क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र बनाने के प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने की कवायद तेज कर दी है।

उदयपुर/जयपुर. विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने जयपुर , जोधपुर , झालावाड़, नवलगढ़, कोटा के बाद अब उदयपुर में उप क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र बनाने के प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने की कवायद तेज कर दी है। बिल्डिंग निर्माण से केन्द्र बनाने तक के इस प्रोजेक्ट को यूआईटी से अनुमोदित कर दिया गया है और अब फाइल केंद्र सरकार के पास है। जिस पर मुहर लगते ही काम शुरू हो जाएगा। संभावना है कि इसी महीने या फिर जनवरी 2018 में काम शरू हो जाएगा और उसके 27 महीने बाद हमारे यहां डायनासोर की आवाज गूंजने लगेगी। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) से मिली जानकारी के अनुसार पांच करोड़ रुपए की लागत से उदयपुर के शिल्पग्राम के पास 10 से 12 एकड़ में उप क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र बनेगा। मुंबई के नेहरू साइंस सेंटर के निर्देशन में कार्य करवाया जाएगा।

 

इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) ने लोकेशन का दौरा कर लिया है और अपनी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है। एनसीएसएम ने एनआईटी जारी करने के साथ ही उसकी प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। साथ ही विज्ञान केंद्रों में लोकल लेवल पर जनभागीदारी हो इसलिए यूआईटी भी वित्तीय सहायता दे रहा है। प्रथम चरण का काम एक साल में पूरा होगा। शर्तों के अनुसार संबंधित फर्म को काम शुरू करने की तारीख से 27 महीने में इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करना है।

 

 

एनसीएसएम देगा सहायता

इसमें थ्रीडी थिएटर होगा, जिसमें साइंस से जुड़ी फिल्में दिखाई जाएंगी। साथ ही स्पेस एंड एस्ट्रॉनोमी एजुकेशन सेंटर भी होगा, जिसमें दर्शकों को अंतरिक्ष के उद्भव, नई गेलेक्सी कैसे उत्पन्न होती है आदि की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा डिजिटल तारामंडल बनेगा और इनोवेशन हब तैयार किया जाएगा, जिसमें स्टूडेंट्स अपने आइडियाज पर वर्क कर सकेंगे। हब में एक्सपट्र्स और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टूडेंट्स को उपलब्ध होगा। एनसीएसएम इसके लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता देगा।

 

 

ये होंगे मॉडल्स

विज्ञान की जटिल प्रक्रियाओं को आसानी से समझने के लिए प्रकाश पर आधारित मॉडल्स, एनर्जी से सबंधित, ऊष्मा गति के नियमों पर और गैर परम्परागत ऊर्जा के स्त्रोत पर आधारित मॉडल्स को लगाया जाएगा। साथ ही डायनासोर का मॉडल भी लगेगा।

 

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