दिवाली ने पकाए' लेकसिटी के कान, आवासीय जोन में ध्वनि प्रदूषण ने फोड़ा नियमों का 'पटाखा

उदयपुर पहले से ही नोन एटेनमेंट सिटी में शुमारदिवाली ने पकाए 'लेकसिटी के कानÓ,आवासीय जोन में ध्वनि प्रदूषण ने फोड़ा नियमों का 'पटाखाÓ- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नापा ध्वनि प्रदूषण

भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर. राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल बोर्ड ने 21 से 27 अक्टूबर तक दिवाली के दिनों में शहर का ध्वनि प्रदूषण नापा तो अधिकारियों से लेकर बोर्ड के कार्मिकों के भी कान खड़े हो गए। खास बात ये कि उदयपुर पहले से ही नोन एटेनमेंट सिटी में शामिल है, ऐसे में लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण लोगों के कान बिगाड़ रहा है। तय मापदण्डों से अधिक डेसिबल पर लेकसिटी में ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया। खास बात यह है कि ध्वनि प्रदूषण का इस बार रिकॉर्ड रहा, जिसने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तक तोड़ दिया। उदयपुर शहर में दिवाली के दिन और रात को मिलाकर आवासीय जोन में सर्वाधिक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया।-

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राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के उदयपुर सहित 14 अन्य शहरों जैसे अलवर, बालोतरा, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाडी, बीकानेर, चित्तौडगढ़़, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, पाली, सीकर के 30 स्थानों पर अलग-अलग समय पर ध्वनि प्रदूषण नापकर देखा। इसमें सुबह 6 से 10 बजे तक, रात्रि को 10 से 12 बजे तक का समय शामिल है। इसमें फ्रिक्वेंसी नमूनों की सेम्पलिंग की, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और साइलेंस जोन को नापा गया। इसे नोइस पोल्यूशन नियम और नियंत्रण-2000 के तहत जांचा गया।

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उदयपुर में यहां जांच- सूरजपोल (कॉमर्शियल यानी व्यावसायिक जोन)- एमबी हॉस्पिटल (साइलेंस जोन)- अम्बा माता स्कीम (रेजिडेंशियल यानी आवासीय जोन)

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ये है स्टेंडर्ड मापदंड:साइलेंस जोन में दिन में 50 रात्रि में 40 डेसिबलरेजिडेंशियल जोन में दिन में 55 से रात्रि में 45 डेसिबलकॉमर्शियल जोन में दिन में 65 और रात्रि को 55 डेसिबल

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इससे बढ़ता है ध्वनि प्रदूषणलगातार बढ़ता ट्रेफिक, पटाखों के फूटने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सेटेबल नहीं होने से।

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पांच शहरों के साथ हम नोन एटेनमेंट सिटी में शुमार उदयपुर, जयपुर, कोटा, जोधपुर और अलवर इसमें शामिल है, जहंा प्रदेश का सर्वाधिक ध्वनि प्रदूषण है।

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यहां ये सामने आया ध्वनि प्रदूषण- : इस बार यानी वर्ष 2019 ने तोड़ा पिछले वर्षों का रिकॉर्ड - सर्वाधिक अम्बा माता स्कीम में सामने आया, जो आवासीय क्षेत्र है, इसमें तय मापदण्डों से 23.9 डेसिबल ज्यादा मिला।दिवाली के दिन की स्थितिस्थान- प्रदूषण - स्टेंडर्ड से इतना ज्यादासूरजपोल क्षेत्र- 83.2- 18.2 डेसिबल ज्यादाएमबी हॉस्पिटल- 69.7- 19.7 डेसिबल ज्यादाअम्बा माता स्कीम- 78.9- 23.9 डेसिबल ज्यादा

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दिवाली की रात की स्थितिस्थान- प्रदूषण - स्टेंडर्ड से इतना ज्यादासूरजपोल क्षेत्र- 83.5- 28.5एमबी हॉस्पिटल- 67.6- 27.6अम्बा माता स्कीम- 77.9-32.9

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पिछले वर्षो से तुलनात्मक स्थितिस्थान/ 2017 दिवाली पूर्व/2017 दिवाली दिन/ 2018 दिवाली पूर्व/2018 दिवाली दिन/2019 दिवाली पूर्व/दिवाली-दिनसूरज पोल(कॉमर्शियल)- 77.8/87.9/80.7/72.2/77.7/83.2एमबी हॉस्पिटल (साइलेंस)-69.7/78.5/70.2/69.2/69.2/69.7अम्बामाता स्कीम(रेजिडेंसियल)-66.6/72.1/77.3/76.6/67.6/78.9

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ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन से लेकर आम व्यक्ति को जागरूक होना होगा। प्रशासन इसके लिए दिल्ली की तर्ज पर वाहन संचालन व्यवस्था लागू कर सकता है। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुचारू होने से काफी असर होगा। कन्ट्रोल कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी को लेकर भी तय हो कि नियम बने तभी ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित हो सकता है।बीआर पंवार, रीजनल ऑफिसरप्रदूषण नियंत्रण मंडल, उदयपुर

bhuvanesh pandya
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