सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का तीसरा दिन : रेजिडेंट चिकित्सकों ने भी किया कार्य बहिष्कार, गांवों में आहत हो रहे मरीजों को शहर में भी नहीं मिली राहत

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का तीसरा दिन : रेजिडेंट चिकित्सकों ने भी किया कार्य बहिष्कार, गांवों में आहत हो रहे मरीजों को शहर में भी नहीं मिली राहत

Sushil Kumar Singh Chauhan | Updated: 09 Nov 2017, 01:33:53 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर. अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर लगातार तीसरे दिन बुधवार को चिकित्सकों की जारी हड़ताल से मरीज बेहाल हो रहे हैं।

उदयपुर . अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर लगातार तीसरे दिन बुधवार को चिकित्सकों की जारी हड़ताल से मरीज बेहाल हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर उदयपुर स्थित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय पहुंचे रोगियों को उस समय झटका लगा, जब रेजिडेंट चिकित्सकों ने संगठन के समर्थन में सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार कर ओपीडी के बाहर प्रदर्शन किया। यहां मरीजों को करीब 3 घंटे तक बारी का इंतजार करना पड़ा। इस बीच विशेषज्ञ प्रोफेसर्स की उपस्थिति से गंभीर रोगियों को कुछ प्राथमिकता तो मिल गई, लेकिन रोगियों की भीड़ के आगे यह राहत ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई।

 

दो घंटे के बहिष्कार के बाद रेजिडेंट ने मरीजों को देखने की शुरुआत करीब 3 घंटे बाद की। इधर, हड़ताल के बीच वार्डों में भर्ती मरीजों को स्वस्थ बताकर घर भेजने का ढर्रा भी बनता जा रहा है। कुछ रेजीडेंट आपातकालीन चिकित्सक कक्ष में बैठ गप्पे मारते नजर आए। सुबह करीब 11 बजे आए मरीजों को कुछ रेजिडेंट ओपीडी में भेजने की टालमटोल करते रहे। हड़ताल से ग्रामीण इलाकों में मरीजों के हालात खराब हो रहे हैं। निजी अस्पतालों में जाने से असक्षम लोग मजबूरीवश झोलाछाप डॉक्टर्स की शरण में जा रहे हैं।

 

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आउटडोर में कतारें, वार्ड खाली
जिले के ग्रामीण इलाकों के साथ संभाग के अन्य जिलों से उपचार के लिए मरीज उदयपुर स्थित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय और पन्नाधाय महिला राजकीय चिकित्सालय आ रहे हैं। मरीजों की बड़ी तादाद के बीच 24 घंटे का आउटडोर 6 हजार तक पहुंच रहा है, लेकिन यह जानकर ताज्जूब होगा कि इन अस्पतालों में वार्ड के बेड खाली पड़े हुए हैं। यहां मरीजों को उपचार के बीच ही घर भेजने वाली परंपरा चल उठी है। ताकि भर्ती मरीजों की संख्या उनके लिए परेशानी नहीं बने।

यही वजह है कि आम दिनों में भरे रहने वाले वार्ड यहां खाली एवं सुसज्जित दिख रहे हैं। लगभग सभी वार्डों में कुछ ऐसा ही हाल दिखाई दे रहा है।

 


भर आई आंखें
चिकित्सकों का विरोध दर्द से कराहते मरीजों की छलकती आंखों का कारण बन गई है। बेबस और गरीब मरीज तकलीफ के समय रेजिडेंट और प्रोफेसर्स की राह तकते रहे। कोई ऑक्सीजन लेते समय उठकर बैठता रहा तो कोई उम्र के बुरे पड़ाव पर चिकित्सक से पहले देखने की उम्मीद में छलकते आंसुओं से उसका ध्यान आकर्षित करता दिखा।

 

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7 पोस्टमार्टम, 2 शव देरी से आए
संभाग के चित्तौडगढ़़, कपासन, उदयपुर सहित अन्य जगहों से आए हुए कुल 7 पोस्टमार्टम बुधवार को हुए। इससे पहले मंगलवार को इन पोस्टमार्टम की संख्या 10 रही थी। सभी जिलों में चिकित्सकों की हड़ताल के बीच थाना पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए शवों को उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल लाना पड़ रहा है। परिजनों को वाहनों का भुगतान भी जेब से चुकाना पड़ रहा है। इधर, सूर्यास्त के बाद न्यूरो सर्जरी विभाग से आए दो शवों का तकनीकी कारणों से पोस्टमार्टम नहीं हो सका।


निजी अस्पताल ने की पहल
सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के बीच निजी सेक्टर के जीबीएच जनरल हॉस्पिटल, बेड़वास ने चिकित्सकीय परामर्श, सर्जरी सहित अन्य सुविधाएं आम मरीजों के लिए नि:शुल्क कर दी है। समूह निदेशक डॉ. आनंद झा ने बताया कि परेशान मरीजों को देखते हुए चिकित्सालय की ओर से नि:शुूल्क चिकित्सा शिविर शुरू किए गए हैं। इसमें सर्जरी, अस्थि रोग विभाग एवं महिला विशेषज्ञों की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा सामान्य प्रसव , सिजेरियन डिलीवरी, बच्चेदानी का ऑपरेशन एवं बच्चों के टीकाकरण की सुविधाएं भी नि:शुल्क रहेंगी। प्रबंधन की ओर से 30 तरह की जांचें व दवाइयां भी नि:शुल्क रहेंगी।


...और इनकी अपनी दुविधा
जिला और संभाग मुख्यालय पर सेवारत चिकित्सकों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ही पदों पर रहते हुए सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन, उनकी दुविधा यह है कि जिम्मेदारी वाले पद को छोड़ वे मरीजों को देखने जैसी गतिविधियों से बाहर हैं। वहीं चिकित्सा मंत्रालय और जयपुर मुख्यालय से उनके नाम से सभी पत्र व्यवहार रोक दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर सभी पत्र व्यवहार जिला कलक्टर से किए जा रहे हैं।

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