हड़ताल के सातवें दिन भी रोगी रहे बेहाल : न्यायाधीश ने पोस्टमार्टम कक्ष में पहुंचकर की कार्रवाई, बंदी की मौत, पीएमओ सहित दो डॉक्टर गिरफ्तार

उदयपुर . अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की हड़ताल के सातवें दिन गत 4 दिन से भर्ती बंदी ने रविवार दोपहर में अंतिम सांस ली।

By: jyoti Jain

Published: 13 Nov 2017, 12:29 PM IST

उदयपुर . अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की हड़ताल के सातवें दिन आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में गत 4 दिन से भर्ती बंदी ने रविवार दोपहर में अंतिम सांस ली। इस पर परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर न्यायाधीश ने स्वयं अस्पताल पहुंच कर कार्रवाई की।

 

इधर, सेवारत चिकित्सक, रेजिडेंट, अर्जेन्ट टेम्पेरेरी बेसिस (यूटीबी) मेडिकल टीचर्स, सीनियर रेजिडेंट की हड़ताल के बीच संभाग मुख्यालय के सबसे बड़े राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय में सन्नाटा पसरा रहा। सुबह 9 से 11 बजे तक ओपीडी में नियमित मेडिकल टीचर्स की उपस्थिति के बावजूद मरीजों में उत्साह कम रहा और इन दो घंटे के दौरान केवल 80 रोगी ही जांच करवाने पहुंचे। दूसरी ओर, भर्ती मरीजों की संख्या 48 रही। इधर, सूरजपोल थाना पुलिस ने रेस्मा कानून की पालना में चांदपोल सेटेलाइट हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. संपत कोठारी एवं अम्बामाता थाना पुलिस ने एक महिला डॉक्टर को गिरफ्तार किया।

 


डंडे ने कराई ज्वाइनिंग
सूरजपोल थाना प्रभारी हेरम्भ जोशी ने सुबह मुखबिर की सूचना पर चांदपोल सेटेलाइट हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. संपत कोठारी के घर दबिश दी। कार्रवाई से पहले जवान चिकित्सक के मकान की छत पर चढ़ गए। बाद में गिरफ्तार चिकित्सक कोठारी से दबाव में ज्वाइनिंग लेटर लिखाया। इतना ही नहीं, पुलिस ने साथ जाकर उन्हें अस्पताल में ज्वाइनिंग दिलाई और रजिस्टर में हस्ताक्षर करवाए। इधर, अम्बामाता पुलिस थाना प्रभारी नेत्रपाल सिंह मय जाप्ते राताखेत निवासी महिला चिकित्सक डॉ. सबिहा अहद को गिरफ्तार कर चांदपोल अस्पताल में ज्वाइनिंग दिलाई।

 

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बंदी ने दम तोड़ा
इधर, चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की हड़ताल से प्रभावित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के वार्ड 4 सीडी में भर्ती चोरी के आरोपित बंदी ब्रह्मपोल थाना अंबामाता निवासी गिर्राज (50) पुत्र रोशनलाल सोनी ने दम तोड़ दिया। उसे 8 नवम्बर को चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। कारागृह प्रशासन कैदी के पहले से उपचार चलने की बात कह रहा है। दूसरी ओर, परिजनों की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही से मौत होने की बात सामने आई है। सूचना पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (नार्थ-2) शुभ्रा शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर विधि प्रक्रिया पूरी करवाई। जानकारी के अनुसार कैंसरग्रस्त आरोपित कैदी 14 मार्च 2017 से केंद्रीय कारागृह उदयपुर में बंद था।

 


...तो भगवान के पास पहुंच जाएंगे पिताजी
बूंदी निवासी कैंसर रोगी लादूलाल के खेतिहर बेटे ने नम आंखों से डॉक्टर्स की बेरूखी पर चिंता जताई। उसका कहना था कि 6 नवम्बर से पिता को कैंसर के उपचार के लिए लेकर डौल रहा है, लेकिन कोई गरीब की सुनने वाला नहीं है। रुपयों के लिए जीने वाले यह धरती के भगवान तो अब मेरे पिताजी को भगवान के पास भेजकर ही हड़ताल से लौटेंगे। उसकी वेदना उसकी कुंठा को बयां कर रही थी। ऐसा ही कुछ हाल रावतभाटा से उपचार करवाने आई महिला का भी था।

 

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वार्ड-5 में भर्ती महिला गत 20 दिनों से यहां भर्ती है। परिजनों ने बताया कि पहले तो डॉक्टर उन्हें देखने भी आ रहे थे। अब तो गत चार दिन से कोई पूछने नहीं आ रहा। परिजनों ने महिला को पुन: रावतभाटा ले जाने की बात कही। चिकित्सकों की ड्यूटी के प्रति उदासीनता का असर अब नर्सिंग स्टाफ में भी देखने को मिल रहा है।

 

पहले से था बीमार
मार्च से विचाराधीन कैदी को पहले 7-8 बार पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। इस दौरान उसके कैंसर सामने आया। चिकित्सालय से उसे उपचार की अनवरत सेवाएं मिल रही थीं।
प्रीता भार्गव, अधीक्षक (डीआईजी) केंद्रीय कारागृह उदयपुर

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