मरीजों के नहीं आने से दवा एक्सपायरी होने से बचाने को भेजनी पड़ी अन्य जिलों में

- कोरोना का मेडिसीन इफेक्ट:
- कोरोना की छोड़ अन्य दवाओं की खपत घटी
- कई बीमार नहीं पहुंचे तो बच गई दवाइयां

By: bhuvanesh pandya

Published: 03 Jul 2021, 07:33 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना ने दूसरी बीमारियों की दवाओं पर भी घात किया है। कोरोना को छोड़ अन्य बीमारियों की दवाओं की खपत बेहद कम होने से इन दवाओं को एक्सपायरी से बचाने के लिए अन्य जिलों में भेजा गया। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या हॉस्पिटल में कम हो गई थी। ऐसे में इन बीमारियों की दवाइयां बचने लगी थी।
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- कोरोना की दो लहरों के चलते दूसरी बीमारियों की दवाओं की उपलब्धता और उपयोग में बड़ा अन्तर आया है। किसी भी वित्तीय वर्ष के शुरू होने से चार महीने पहले आरएमएससी जयपुर की ओर से सभी चिकित्सालयों से अगले वित्तीय वर्ष में काम आने वाली दवाइया व उनकी मात्रा की अनुमानित मांग ली जाती है, उस अनुसार आरएमएससीएल की ओर से औषधियां खरीद कर प्रत्येक जिले में स्थापित जिला औषधि भंडार के माध्यम से जिले के सभी चिकित्सालयों को उपलब्ध करवाई जाती है। मेडिकल कॉलेज के अधीन सभी चिकि त्सालयों को मेडिकल कॉलेज औषधि भंडार के माध्यम से औषधियां उपलब्ध करवाई जाती हैं। कोविड- 19 महामारी के दौरान कोविड से संबंधित औषधियां एमसीडी डब्ल्यू के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई।
- कोविड की दोनो लहरों के दौरान मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध सभी हॉस्पिटलों में आने वाले अधिकांश मरीज कोविड के ही थे एवं इसके अतिरिक्त केवल आपातकालीन मरीज ही चिकित्सालयों में इलाज करवाने आते थे। कोविड के चलते सामान्य बीमारियों व लम्बे समय से चलने वाली बीमारियों के मरीज चिकित्सालय में उपचार के लिए नहीं आए। करीब चार माह तक सामान्य मरीज बहुत की कम संख्या में आने के कारण कोविड के अलावा अन्य औषधियों की खपत कम मात्रा में हुई। आरएमएससी जयपुर की ओर से यह व्यवस्था की गई है कि औषधियों की अधिकता होने पर एक जिले से दूसरे जिले में जहां पर औषधियों की जरूरत है, वहां स्थानान्तरित कर दी जाती है। इसी प्रकार औषधियों की कमी हो व फार्मा कंपनी द्वारा आपूर्ति में देरी हो तो औषधियां दूसरे जिलों से मंगवाकर मरीजों को दी जाती हैं। ऐसे में दवाइयों को अवधिपार होने से बचाया जा सकता है।

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इन दवाओं की खपत घटी

कई सामान्य उपयोग में आने वाली औषधियों की खपत बहुत कम हो गई है, जैसे एसिडिटी में काम आने वाली दवा रेनिटिडीन की खपत 19 में करीब 20 लाख गोलियों की हुई थी, जबकि 2020 में खपत केवल 2.5 लाख ही हुई थी। ऐसे में इसकी तीन लाख गोलियां अन्य जिलों में भेज दी गई।
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दवाइयां- दवाई का उपयोग- 2019 में खपत- 2020 में खपत- 2021 में खपत- अन्य जिलों को भेजी- उपलब्ध स्टॉक
एन्टी हीमोफिलिया फैक्टर 8 इंजेक्शन- हीमोफिलिया- 1470- 78-295-1600-36

डिप्थिरिया एंटीटोक्सिन इंजेक्शन- डिप्थिरिया- 702- 15-200- 160- 100
ट्राई हैक्सीफेनिडिल टेबलेट- मानसिक रोग- 220100- 100400-107700-83000-20000

रेनिटिडीन टैबलेट- एसिडिटी- 1998000- 253000- 1122300-2980000-129950
ओआरएस पावडर- दस्त- 149361- 49700- 77410-64000-29980

आइरन सूक्रोस इंजेक्शन- खून की कमी- 42690-9550-9996-4000-8664
थायरोक्सिन टेबलेट- थायराइड- 357200- 210000-163600-3000-235400

इंसुलिन इंजेक्शन- डायबिटिज-13539-10835-6650-6500-10700
लोसार्टन, हाइड्रोक्लोरथाईजाइड टेब- ब्लड प्रेशर- 1055750-517900-427200-100000-652000

लोसार्टन, एम्लोडिपीन टैबलेट- ब्लड प्रेशर- 524800- 380000- 106900- 140000-323950
सेफ्ट्राएक्जोन इंजेक्शन- एंटीबायोटिक- 450280-245290-183630-3000-6000

एमाक्सिलीन, क्लैवुलैनिक एसिड टैब- एंटीबायोटिक- 2336800-936500-187250-160000-750000
इनका कहना है

कई औषधियां जो कोविड की वहज से उदयपुर में काम नहीं आई, उन्हें दूसरे जिलों में भेजा गया ताकि वह एक्स्पायर नहीं हों और इसका उपयोग हो सके। कोरोना के कारण मरीजों की संख्या कम हो गई थी।
डॉ. दीपक सेठी, एमसीडीडब्ल्यू के नोडल ऑफिस

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