ठगी के बदले तरीके, मिलते-जुलते ई-मेल यूआरएल से हो रही धोखाधड़ी, ऐसे रहें सचेत

जैसे-जैसे आमजन ऑनलाइन ठगी online fraud से सचेत होते जा रहे हैं वैसे-वैसे ठगों ने भी धोखाधड़ी के तरीके बदल दिए हैं। जहां पहले कॉल कर पासवार्ड मांगने, शॉपिंग और ऑफर्स का लालच देकर कम पढ़े-लिखे और सामान्य लोगों को ठगा जाता था अब वहीं ठगों ने धोखाधड़ी के तरीके को भी प्रोफेशनल कर दिया है। अब उनकी जद में ऐसे प्रोफेशनल्स है जो आईटी, बैंकिंग सहित बड़े पेशे से जुड़े हुए हैं। ठग धोखाधड़ी करने का तरीका भी ऐसा अपना रहे हैं कि जरा से चुके तो बडी हानि उठानी पड़ जाए। ठगों के धोखाधड़ी करने का नया प्लेटफॉर्म बन रहा है ई-मेल । जी हां, ठग ई-मेल के जरिये E-mail fraud बिल्कुल ऑफिशियल बात करते हुए कम्पनी के बॉस के नाम से वेंडर्स, क्लाइंट्स को पैसे भिजवाने के लिए बोल रहे हैं और कर्मचारी भी बॉस का ऑर्डर मानते हुए धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट के अनुसार यह सब मेल स्कूपिंग सॉफ्टवेयर के जरिये हो रहा है। पढि़ए ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर यह खास रिपोर्ट....

By: Bhagwati Teli

Published: 29 Jun 2019, 01:50 PM IST

भगवती तेली / उदयपुर . जैसे-जैसे आमजन ऑनलाइन ठगी online fraud से सचेत होते जा रहे हैं वैसे-वैसे ठगों ने भी धोखाधड़ी के तरीके बदल दिए हैं। जहां पहले कॉल कर पासवार्ड मांगने, शॉपिंग और ऑफर्स का लालच देकर कम पढ़े-लिखे और सामान्य लोगों को ठगा जाता था अब वहीं ठगों ने धोखाधड़ी के तरीके को भी प्रोफेशनल कर दिया है। अब उनकी जद में ऐसे प्रोफेशनल्स है जो आईटी, बैंकिंग सहित बड़े पेशे से जुड़े हुए हैं। ठग धोखाधड़ी करने का तरीका भी ऐसा अपना रहे हैं कि जरा से चुके तो बडी हानि उठानी पड़ जाए।

ठगों के धोखाधड़ी करने का नया प्लेटफॉर्म बन रहा है ई-मेल। जी हां, ठग ई-मेल E-mail fraud के जरिये बिल्कुल ऑफिशियल बात करते हुए कम्पनी के बॉस के नाम से वेंडर्स, क्लाइंट्स को पैसे भिजवाने के लिए बोल रहे हैं और कर्मचारी भी बॉस का ऑर्डर मानते हुए धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट के अनुसार यह सब मेल स्कूपिंग सॉफ्टवेयर के जरिये हो रहा है। पढि़ए ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर यह खास रिपोर्ट....

ऑनलाइन हो रही बातचीत की रैकी

जानकारी के अनुसार ई-मेल से ऑनलाइन ठगी के लिए ठग ऑनलाइन रैकी भी कर रहे हैं। जिसमें बॉस की ओर कर्मचारी को क्या ग्रिट करके पुकारा जाता है। किस टाइप के मेल होते हैं। कौनसा कर्मचारी बॉस के ऑर्डर तुरंत फॉलो करता है आदि चीजों को ध्यान में रखकर उसे ही मेल से पैसे भेजने को कहा जा रहा है। ठगों ने उस कम्पनी के बॉस का नाम भी पता कर रखा है और कम्पनी के इंटरनल वेब पर बने ई-मेल एड्रेस पर मेल आ रहा है, जहां पर कम्पनी इंटरनल के अलावा बाहरी मेल नहीं आते हैं।

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केस 1 ....आईटी प्रोफेशनल से कर दी धोखाधड़ी

सेक्टर 6 पुलिस थाना में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार एक आईटी कम्पनी के कर्मचारी विनोद कुमार (बदला हुआ नाम) को अपनी कम्पनी के सीईओ के मिलते जुलते ई-मेल से मेल आया। मेल में नाम कम्पनी सीईओ (अंजना जैन) का था। मेल में वेंडर को तीस हजार पांच सौ रुपए भेजने के लिए कहा गया। मेल में वेंडर के नाम से बैंक डिटेल दी गई थी। कर्मचारी ने उस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए और सीईओ को कॉल पर बताया तो सीईओ ने ऐसा कोई भी मेल भेजने से इनकार कर दिया। कर्मचारी ने ई-मेल खंगाला तो वह फर्जी निकला। तुरंत बैक जाकर आपबीती बताई तब तक उस व्यक्ति ने अधिकतर पैसे निकाल दिए थे।

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केस 2....ऑफर देख फर्जी लिंक पर कर दिया प्री-पेमेंट

एक बैंक के कर्मचारी अरविंद कुमार (बदला हुआ नाम) ने ई-कॉमर्स वेबसाइट से शॉपिंग की। ठग का कॉल आया कि सर अगर आप दस हजार रुपए का और ऑर्डर करते हैं तो आपको दोनों चीजें सस्ती पड़ जाएगी। कर्मचारी ने ऑफर को देखते हुए सहमति दे दी। ठग ने ई-कॉमर्स के ऑफिशियल ई-मेल के हूबहू यूआरएल से कर्मचारी के ई-मेल कर लिंक भेजी। अरविंद कुमार ने लिंक पर क्लिक कर आइटम ऑर्डर करते हुए प्रीपेंमेंट कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि लिंक ऑफिशियल नहीं थी और धोखाधड़ी हुई है।

 

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केस 3... ओएलएक्स से खरीदारी के नाम पर धोखाधड़ी

भूपालपुरा थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अजय कुमार (परिवर्तित नाम) ने सोफा बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला। उन पर अमित नाम के एक युवक का फोन आया और 28 हजार रुपए में सोफा खरीदने की बात कही। यह रकम भेजने की बात करते हुए उसने एक लिंक भेजी। खरीदार ने लिंक खोलकर पे नाउ पर क्लिक किया तो ओटीपी आई, जिसे ठग ने उनसे पूछ ली और 48 हजार रुपए निकाल लिए।

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केस 4 ...कार अटकने के बहाने ठग लिए 11 हजार

सूरजपोल पुलिस थाना में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार किशन लोहार (बदला हुआ नाम) ने रिपोर्ट देकर बताया कि ओएलएक्स पर 1.50 लाख रुपए में कार बेचने का विज्ञापन देखा। ऑनर से सम्पर्क किया, जिसने अपना नाम सीआरपीएफ जवान नारायण लाल खटीक बताया। कार 1.20 लाख रुपए में खरीदने पर सहमति बनी। नारायण ने मावली में कार अटकने के बहाने उससे 11 हजार पांच सौ रुपए उसके खाते में ट्रांसफर करवाए। दूसरी बार भी ऐसे ही बहाना बनाते हुए और रुपए मांगे तो किशन को शक हुआ और उसने कार खरीदने से इनकार कर दिया।

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इन प्लेटफॉर्म से ऐसे भी हो रही ठगी

साइबर एक्सपर्ट श्याम चन्देल बताते हैं कि ई-मेल के अलावा नेट बैंकिंग, एटीएम, डेबिट व क्रेडिट कार्ड, केबीसी, ओएलएक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है और इससे निम्न तरीके से ठगी की जा रही है। ध्यान रहे कि इन ठगों के पास आपके खाते, कार्यक्षेत्र में बारे में अधिकतर जानकारी होती है। जिसके आधार पर यह ठोस कारण बताते हुए आपसे गोपनीय जानकारी मांगते हैं। ऐसे में आपको किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी देने से बचना चाहिए क्योंकि बैंक, बैंक कर्मचारी कभी भी इस तरह की गोपनीय जानकारी नहीं मांगते हैं। - बैंक के कस्टमर केयर बनकर कॉल करना और गोपनीय जानकारी यथा नेट बैंकिंग पासवर्ड आदि पूछना।


- डेबिट, क्रेडिट कार्ड के नम्बर, वेलेडिटी, पीछे के तीन अंक व एसएमएस से आई ओटीपी पूछना।

- ऑफर व पैसे जीतने की लालच में केबीसी खेलवाना और पैसे लगवाना।

- अपने मित्र, कलिग, बॉस आदि के मेल से मिलते-जुलते मेल से किसी अन्य को पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहना। - ओएलएक्स जैसी वेबसाइट पर वस्तु बेचने के नाम पर पहले ही पैसे ले लेना।

- फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मित्र बनना और फिर मुसीबत में बताकर पैसों की मांग करना।

- नौकरी दिलवाने, विदेश भेजने के नाम पर पैसे मांगना।

- लुभावने ऑफर्स बताना और लालच देना।

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इन तरीकों को अपनाकर बच सकते हैं फ्रॉड से how to aware online fraud

न्यू टेक्नोलोजी का प्रयोग करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले पूरी तरह से खोजबीन करने के बाद ही उसका उपयोग करे।

- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का का प्रयोग करते समय ग्राहक और व्यापारी को वेबसाइट से पूर्व का एचटीटीपी देख लेना चाहिए। अगर एचटीटीपी नहीं है तो उस पर अपनी बैंक डिटेल नहीं डालनी चाहिए।

- नौकरी दिलवाने के नाम पर भी कंसलटेंसी बताते हुए ऑनलाइन रुपए भेजने के लिए कहा जाता है। सरकारी नौकरी के नाम पर भी पैसे मांगे जाते हैं। ऐसे मामलों में ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं करे।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन या प्रत्यक्ष किसी भी रूप में बैंक की जानकारी नहीं देनी चाहिए।

- सोशल साइट्स पर अनजान लोगों से बात करते समय बहकावे में नहीं आना चाहिए।
- कॉल, ई-मेल पर पैसे, ओटीपी या अन्य बैंक जानकारी नहीं देनी चाहिए।

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ऐसे आया नि:शुल्क साइबर हेल्प सर्विस का आइडिया

उदयपुर में निशुल्क साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन सर्विस देने वाले श्याम चन्देल बताते हैं कि एक दिन मैं मेरे मित्र से मिलने पुलिस थाने में गया, वहां एक महिला ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद रोते हुए पुलिस को आपबीती सुनाते देखा। उसके तीस हजार रुपए किसी ने बैंककर्मी बनकर उससे ऑनलाइन ठग लिए थे। मैं उसी रात उस केस को सॉल्व करने में लग गया। महिला का दुख देखकर मैंने उसी दिन से ऑनलाइन ठगी से लोगों को बचाने, जागरूक करने के लिए काम शुरू कर दिया और अपनी साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन टीम बनाने में जुट गया।

एक करोड़ रुपए से ज्यादा के केस सॉल्व

श्याम चन्देल बताते हैं कि शुरूआत से अब तक उनकी टीम करीब एक करोड़ से ज्यादा के साइबर फ्रॉड केस सॉल्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उनकी टीम ने करीब एक हजार से ज्यादा सोशल मीडिया पर बने ऐसे खातों को बंद करवाया है, जिसके माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा था।

दो साल में पचास प्रतिशत बढ़े मामले

कैशलेस ट्रांजेक्शन और डिजिटल के दौर में सबसे बड़ा खतरा साइबर क्राइम का है। लोग तेजी से डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग का प्रयोग कर रहे हैं। हाल के दिनों में नेट बैंकिंग के जरिए धोखाधड़ी की घटनाएं बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। पुलिस थानों में ऐसे मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। श्याम चन्देल बताते हैं कि उनकी टीम के पास आने वाले धोखाधड़ी के मामलों में दो साल में पचास प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।

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