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यहां कागजों में गठित कमेटियां, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं, जानें पूरा मामला

निजी स्कूलों की मनमानी का मामला गड़बड़ी की जड़ें इतनी गहरी, शिक्षा विभाग शुरू नहीं कर पाया जांच खौफ देखिए कि अभिभावक शिकायत पर नाम लिखने से डर रहे

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Instruction given by the education department

चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर. स्कूल फीस में बढ़ोतरी और मनमर्जी से किताबें और स्टेशनरी थोपने के अलावा कुछ निजी स्कूल संचालक इतने आगे निकल गए हैं कि आरबीएसई (RBSE) और सीबीएसई (CBSE schools) के नियम कायदों तक की उन्हें परवाह नहीं है। कुछ निजी स्कूल मनमर्जी से अभिभावकों की जेब पर डाका डालकर कमीशन का गठजोड़ बढ़ा रहे हैं। राजस्थान पत्रिका की मुहिम के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग की ओर से गठित जांच कमेटियों के सामने शिकायतें पहुंचाई लेकिन मिलीभगत के खेल में विभाग भी मौन है। स्कूल संचालक खामियां छिपा सकें, इसके लिए जांच दल ने किसी स्कूल का निरीक्षण तक नहीं किया। इससे भी आगे बढक़र कई अभिभावकों की शिकायतों को फर्जी बता दिया। गड़बड़ी की जड़ें मजबूत देखकर घबराए कई अभिभावक तो गुमनाम शिकायतें देने को मजबूर हैं।

मान्यता कहीं की, पढ़ाई कहीं ओर

उपनगरीय ओर गोवर्धन विलास क्षेत्र में दो से तीन निजी स्कूल, मान्यता के स्थान की बजाय दूसरी जगह स्कूल का संचालन कर रहे हैं। सैकड़ों बच्चे जहां पढ़ रहे हैं, उसकी मान्यता तक नहीं है। अधिकतर स्कूल सीबीएसई से जुड़े हैं। बिना सक्षम अनुमति के कई संचालकों ने स्कूल भवन में बढ़ोतरी कर दी। अंकतालिका तक में स्कूल प्रबंधन अपनी मान्यता से जुड़ी जानकारी साफ नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह सुखेर और चित्रकूट नगर क्षेत्र में संचालित स्कूलों के स्थान को लेकर गड़बड़ी है। आरबीएसई के साथ सीबीएसई के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ये स्कूल अब जांच के डर से बच्चों को दूसरी जगह भेजने लगे हैं, सेटअप में परिवर्तन कर दिया है ताकि जांच से बच जाए।

कलक्टर की नहीं सुनी
जिला कलक्टर आनंदी ने अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा अधिकारियों को मनमानी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश दिए, लेकिन उनके निर्देशों को शिक्षा विभाग ने महज कागजी बना दिया। संयुक्त निदेशक भरत मेहता ने उदयपुर शहर और ग्रामीण में दो जांच दल समेत संभाग के सभी जिलों में टीमें गठित कर जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के अधिकारी को लगाया लेकिन जांच व कार्रवाई के नाम पर कागज कोरा है।


अभिभावक का भावुक मैसेज
कुछ निजी स्कूलों की ओर से बच्चों की किताबों, फीस और स्टेशनरी की आड़ में फीस ली जा रही है उस पर खाड़ी देश में काम करने वाले एक अभिभावक ने पत्रिका और जिला शिक्षा अधिकारी को भावुक मैसेज भेजते हुए कहा कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई हो। वह जिस गर्मी में पैसा कमाता है उसे यूं लूट लेना अन्याय है।


शिकायतें मिली है, कुछ गुमनाम भी है। चुनावी प्रशिक्षण की व्यस्तता है फिर भी कुछ स्कूलों में जांच की है। सीबीएसई मान्यता लेने वालों को एनओसी निदेशक कार्यालय से जारी होती है ओर अगर उसके मुताबिक काम नहीं हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई करने को तैयार है। - भरत जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय)


अब तक यूं मिली शिकायतें
- आरटीई प्रवेश पाने वालों को भी किताबें मंगवाना
- 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि, कुछ स्कूल 12 माह की फीस ले रहे
- कागजों में तीन दुकानें बता एक ही दुकान से किताबें खरीदने का दबाव
- स्कूल डे्रस चुनिंदा दुकान से खरीदने का दबाव जो काफी मंहगी बेची जा रही।
- चेक से किताबों का भुगतान करवाना वह भी स्कूल परिसर की दुकान पर
- रोक के बावजूद ले रहे हैं प्रवेश शुल्क
- वार के अनुसार यूनिफॉर्म की बाध्यता
- एमआरपी से अधिक दरों पर बेच रहे हैं स्टेशनरी व अन्य सामग्री


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