मौत के बाद भी कोरोना ले रहा देह की 'परीक्षा

- मेडिकल कॉलेजों में बेहद कम हुए देहदान

- मृत व्यक्ति की देह की कोरोना जांच करवाने के आदेश के बाद बदलीं स्थितियां

By: bhuvanesh pandya

Published: 21 Nov 2020, 05:56 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. प्रदेश में कोरोना से पहले प्रत्येक जिले में बड़ी संख्या में देहदान किया जाता था, लेकिन कोरोना ने देहदानियों के परिजनों के लिए 'जांचÓ के नाम का बड़ा संकट पैदा कर दिया है, इससे देहदान के नाम से म़ृतक के परिजन भी अब कतरा कर किनारा करने लगे हैं। एेसे में अब मेडिकल कॉलेजों में होने वाला देहदान भी काफी कम हो गया है।
प्रस्तुत है एक विशेष रिपोर्ट

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ये है स्थिति

जयपुर- एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में इस वर्ष मार्च से अब तक 17 से अधिक देहदान हो चुके हैं। मार्च से जुलाई तक लॉकडॉउन के समय भी देहदान जारी रहा। इसके मुकाबले वर्ष २०१९ यानी गत वर्ष कोरोना न होने पर लोगों ने पूरे वर्ष में 31 देहदान किए।
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उदयपुर- उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष मार्च से अब तक केवल १ देहदान हुआ। इससे पहले जनवरी से मार्च तक यानी कोरोना से पहले ४ लोगों ने देहदान किया। इसी प्रकार वर्ष २०१९ में १४ लोगों ने देहदान किया।
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जोधपुर- जोधपुर स्थित एम्स मेडिकल कॉलेज में कोरोनाकाल में एक भी देहदान नहीं हुआ। इस वर्ष जनवरी से फ रवरी तक 6 और 2019 में 19 लोगों के देहदान हुए।
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अजमेर- अजमेर मेडिकल कॉलेज में मार्च से नवम्बर तक एक भी देहदान नहीं हुआ। वर्ष २०१९ मेंं ४ जनों ने देहदान किया। कोरोना काल में देह लेने से कॉलेज प्रशासन ने इनकार कर दिया। एेसे में देहदानियों की इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
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कोटा- कोटा मेडिकल कॉलेज में मार्च, 20 से नवंबर, 20 तक केवल 1 देहदान हुआ, जबकि इस वर्ष कुल 4 देहदान हुए। पिछले वर्ष 5 देहदान हुए।
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बीकानेर- बीकानेर मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष जनवरी से अब तक ४ देहदान हुए। पिछले साल 2019 में ७ देहदान हुए। वर्ष 2019 में देहदान के लिए 268 परिपत्र भरे गए, इस साल अब तक 29 परिपत्र भरे गए है।
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अन्य मेडिकल कॉलेजों की स्थिति
- पाली- मार्च से नवम्बर तक देहदान नहीं किया गया। पिछले वर्ष २०१९ में यानी कोरोना काल से पहले एक देहदान हुआ। कोरोना काल में किसी भी व्यक्ति की देह नहीं ली गई।

- भीलवाड़ा- मार्च से नवम्बर तक एक भी देहदान नहीं हुआ। वर्ष 2018 से अब तक 4 देहदान हुए, इसमें दो महिला और दो पुरुष शामिल है।
- बाड़मेर- मेडिकल कॉलेज पिछले साल शुरू हुआ था। कॉलेज के लिए एक भी देहदान नहीं हुआ है। स्टूडेंट्स के लिए अभी मानव देह जोधपुर एसएन मेडिकल कॉलेज से मिल रही है।

- सीकर- मेडिकल कॉलेज में मार्च से नवम्बर तक एक व्यक्ति ने देहदान के लिए संकल्प पत्र भरा। देहदान नहीं हुआ है। इस वर्ष ही केडेवर का लाइसेंस मिला है। इससे पहले सीकर में देहदान नहीं होता था।
- चूरू- मार्च से नवंबर के बीच देहदान के लिए एक आवेदन किया गया। करोना काल से पहले कोई भी देहदान नहीं किया गया।

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एेसे बदला सिस्टम

- अब सभी मेडिकल कॉलेजों में किसी भी मृतक देह की कोरोना जांच की जाती है। जांच के बाद यदि देह की रिपोर्ट कोविड- नेगेटिव आती है तो ही देह ली जा रही है। पहले मृतक की देह बिना सामान्य जानकारी लेने के बाद ली जाती थी।
- मृत व्यक्ति की देह को प्लास्टिक में कवर करके लाना आवश्यक कर दिया है।

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भुवनेश पंड्या
- उदयपुर में देहदान के आंकड़े
वष...र्देहदान की संख्या

1995- 2008 तक- 11
2009- 06

2010- 03
2011- 08

2012- 03
2013- 13

2014- 12
2015- 08

2016- 11
2017- 14

2018- 17
2019- 14

2020 अब तक- 5

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इसलिए आई संख्या में कमी

मृतक की देह पहले सीधे ही ली जाती रही है, लेकिन कोरोना काल में सभी की सुरक्षा को देखते हुए इसकी कोरोना जांच अनिवार्य कर दी गई है। एेसे में अब कोई भी देहदानी के परिजन आते हैं तो पहले कोविड रिपोर्ट लेने के बाद नेगेटिव आने पर ही देह ली जाती है। एेसे में अब संख्या कम हो गई है।
डॉ. घनश्याम गुप्ता, वरिष्ठ प्रोफेसर व पूर्व विभागाध्यक्ष (एनॉटोमी) आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर

bhuvanesh pandya
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