scriptEyes are staring, the land will change - their sky will change | आंखे ताक रही है बदलेगी जमीन-उनका बदलेगा आसमां | Patrika News

आंखे ताक रही है बदलेगी जमीन-उनका बदलेगा आसमां

धरतीपुत्र समृद्ध होंगे तो परिदृश्य अलग होगा

उदयपुर

Published: February 21, 2022 10:18:29 am

भुवनेश पंड्या
राजस्थान के पहली बार इसी सप्ताह कृषि बजट अलग से पेश किया जायेगा। सीएम अशोक गहलोत ने किसानों के लिए आने वाले समय की जरूरत मानते हुए आम बजट से अलग इसे पेश करने की तैयारी की है। पहली बार आ रहे अलग कृषि बजट से किसान वर्ग की काफी उम्मीदें और अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। कृषि बजट में कृषिगत सुधार व विकास का दायरा और बड़ा होगा। इसमें किसानों से जुड़ी बड़ी घोषणाओं के भी शामिल होेने की आशा जताई जा रही है। प्रदेश में यदि धरतीपुत्र समृद्ध होंगे तो परिदृश्य अलग होगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए जहां खेतों की सेहत सुधारनी होगी वहीं बीज, उपकरण व नवीनतम तकनीकों के साथ खेती के अपडेट तरीकों की राह चलना होगा। कृषि विशेषज्ञों की रायशुमारी में सामने आया है कि अभी राजस्थान में कृषि विकास में आमूलचूल बदलाव व विकास की जरूरत है।
आंखे ताक रही है बदलेगी जमीन-उनका बदलेगा आसमां
आंखे ताक रही है बदलेगी जमीन-उनका बदलेगा आसमां
-----

ये बोले विशेषज्ञ :

खेती व किसानों के विकास को लिमिट फार्मुला दे सकता है ऊंची उड़ानखेती व किसानों के विकास के लिए हमने लिमिट फार्मुला तैयार किया है। इसमें 1 एल- यानी लोन - किसानों को लोन दे, पहले के ऋण माफ करें, इससे उनका आत्मविश्वास बढे़गा। वह लोन चुकाने की चिंता समाप्त होगी। 2. आई- एग्रिकल्चर इनपुट- बीज, खाद, केमिकल, व उपकरण ,उपलब्ध करवाए जाए। खास तौर पर नि:शुल्क लघु व सीमान्त किसानों को इसका लाभ मिले। 3. एम- मार्केट डवलप हो। मंडिया विकसित हो, हर जगह नए बाजार तैयार हो। 4.आई- एनिमल इन्श्योरेंस का दायरा बढे़। पशुओं के मरने के बाद समय पर पैसा मिल जाए। फसल खराब हो जाए तो उसकी राशि भी उसी अनुपात में मिले, अभी जो बीमा है वह कंपनियों के लिए फ्रेंडली है, जो किसानों का फ्रेंडली बने। 5. टी- तकनीकी आधार पर किसान मजबूत बने जैसे , रोबोट और ड्रोन व ऑटोमेटिक सेंसर इस्तेमाल हो।
प्रो एनएस राठौड़, कुलपति महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

------------------------

मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र की फसलों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर फलदार पौधों जैसे आम, जामून, उन्नत किस्म के सीताफल व अन्य फलों की लघु नर्सरी स्थापित की जानी चाहिए, ताकि किसान फलदार पौधों की खेती के लिए आगे आएंगे और उनकी आय बढे़गी। कृषि वानिकी भी क्षेत्र की महती आवश्यकता है। बांस, सहजन की फली को बढ़ावा देना चाहिए। महुआ के कलमी पौधे तैयार करने चाहिए। जनजाति परिवारों की आजीविका सुरक्षा के लिए प्रदेश में पहली बार आने वाले कृषि बजट में प्रावधान करना चाहिए। इसके साथ ही देसी मूर्गी पालन पर सब्सिडी (बेड यार्ड पोल्ट्री) बकरी पालन पर भी सब्सिडी शुरू होनी चाहिए। आदिवासी क्षेत्र में स्वच्छ जल से फल व सब्जियां उगाई जा रही है, लेकिन मार्केटिंग के अभाव में किसानों को इसका सही दाम नहीं मिल पाता। वन उत्पाद मंडी जैसा कांसेप्ट विकसित करना चाहिए। प्रदेश के इस आदिवासी क्षेत्र में चल रही परम्परागत खेती में नवाचारों से लेकर तकनीकी विस्तार की खासी जरूरत है। यदि यहां के किसानों को सही तरीके से नवीनतम कृषिगत शिक्षा व सहयोग देकर तैयार किया जाए तो आने वाला समय यहां के किसानों के साथ-साथ आमजन के लिए भी नया उजियारा लेकर आएगा।
डॉ एकलिंग सिंह झाला, कृषि वैज्ञानिक

-----

लघु एवं सीमांत किसानों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कृषि विद्युत कनेक्शन दिए जाए। साथ ही बूंद-बूंद सिंचाई हेतु किसानों को सब्सिडी पर संसाधन उपलब्ध कराया जाए। इसी के साथ फलदार पौधे जैसे नींबू ,संतरे, अंजीर, आम इत्यादि उपलब्ध करवाया जाए जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी एवं साथ ही मनरेगा में कैटेगरी 4 पर आरक्षण खत्म किया जाए। जल संरक्षण हेतु मनरेगा एवं अन्य योजनाओं को जोड़कर ज्यादा से ज्यादा जल संरक्षण के ढांचे बनाया जाए जिससे बरसात का पानी जमीन में उतरे एवं जमीन पानीदार बने और किसानों के कुओं में पानी भरा रहे।किसानों के खेतों तक ट्रैक्टर, जेसीबी पहुंच सके इस हेतु रास्तों का निर्माण करवाया जाए। हर ग्राम पंचायत की अपनी खुद की सरकारी पौधशाला हो जिसमें किसानों को सस्ते दर पर फलदार एवं इमारती पौधे उपलब्ध हो सके।
श्याम सुंदर पालीवाल, पद्मश्री, पिपलांत्री

----------------

किसानों की स्थिति बदलने के लिए सबसे जरूरी है हंगर इंडेक्स में हम बेहतर हो। वर्तमान में हमारी हालत बांग्लादेश व नेपाल से भी नीचे है। हमारा देश एवलेबिलिटी, एसेसमेंट, एब्जोरशन सही नहीं है। मिनरल्स व विटामिन की कमी बाद में जाकर अनुवांशिक कमजोरी बनी रही है। पहले एक व्यक्ति 1950-60 में प्रतिदिन 50 ग्राम दाल खाता था, लेकिन लेकिन अब ये आधा हो गया है। प्रदेश में सरसो, ग्वार, अजवाइन, धनिया, मैथी उत्पादन में पहले स्थान पर है, लेकिन गुणवत्ता बेहतर नहीं है। आम किसान की आमदनी बढ़ाने के लिए उत्पादन बढ़ाना पडेगा। जलवायु बदलाव को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए नई बीजों से लेकर फसलों की नई वैरायटी तैयार करनी होगी। सीड रिप्लेसमेंट की जरूरत है, इन्हेंसिंग क्राफ्ट प्रोडक्विटी के लिए ये जरूरी है कि नवीनतम मशीनरी आम किसानों तक पहुंचे। फ्लॉवर सीड प्रोडक्शन को डवलप किया जाए, तो हम पीछे नहीं रहेंगे।
प्रो एनबी सिंह, अध्यक्ष बीएन विवि उदयपुर

-----------

. प्रदेश सरकार अपना पहला कृषि बजट प्रस्तुत करने जा रही है, इसके लिए सरकार से अपेक्षा है कि आदिवासी किसानों द्वारा सदियों से किया जा रहा प्रकृति संरक्षण का कार्य जो बढ़ते विकास के कारण कलुषित हो रहा है, उसे रोकने की समुचित घोषणा की जाएगी | इसमें स्थानीय बीजों की प्रजातियों को जिनका विगत कई वर्षों से प्रोत्साहन बंद कर दिया गया था, उसे सरकार द्वारा अनिवार्यता से लागू किया जाये एवं बीज निगम द्वारा उन स्थानीय प्रजातियों को पुनः स्थापित किया जाना सुनिश्चित किया जाये | जो प्रजातियों पुरानी हो गयी हो, उन प्रजातियों का नए स्वरूप में विकास किया जाये |
2. आदिवासी समुदाय की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु पारम्परिक सब्जियां एवं छोटे धान्य फसल जैसे रागी, कांगनी, चीना आदि को पोषण सम्बन्धी कार्यक्रमों में जोड़ने का प्रावधान किया जाए | इस महत्वपूर्ण कदम से पारम्परिक पौष्टिक फसलों को बढ़ावा मिलेगा ।
3. इसके साथ ही आदिवासी क्षेत्र में मृदा स्वास्थ्य दिनों दिन खराब होती जा रही है, जिससे फसलों की उत्पादकता कम होती जा रही है | अतः मृदा स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए आवश्यक फसलें जैसे ग्रीष्मकालीन मूंग,सण तथा हरित खाद बनाने वाली फसलों के उत्पादन में वृद्धि को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करते हुए, उस पर अनुदान लागू किया जाए | सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से मृदा के स्वास्थ्य में एवं फसलों की उत्पादकता में वृद्धि हो सकेगी|
4. साथ ही मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में कृषि सम्बंधित कार्यों को जोड़ा जाए एवं प्रत्येक आदिवासी परिवार में अनिवार्य रूप से 50 प्रतिशत से अधिक कृषि कार्यों में कच्ची मिटटी एवं जल संरक्षण से सम्बंधित कार्यों को लागू किया जाना सुनिश्चित किया जाए |
जयेश जोशी, सचिव वागधारा संस्थान

---------

एक नजर राजस्थान की कृषि पर

- राज्य का बाजरे के उत्पादन व क्षेत्रफल दोनों दृष्टि से देश में प्रथम स्थान है।- राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र सेवर भरतपुर में स्थित है।
- राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी गांव अजमेर में है।

- राज्य का पहला कृषि रेडियो स्टेशन भीलवाड़ा में खोला गया।

- कांगड़ी दक्षिणी राजस्थान के गरीब आदिवासी शुष्क क्षेत्रों की एक विशेष फसल है।
- भारत में एमएस स्वामीनाथन के प्रयासों से 1966-67 में हरित क्रांति शुरू हुई।

- राज्य में निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी कैथून कोटा में खोली गई है।- राजस्थान में सबसे भयंकर त्रिकाल छप्पणिये का काल विक्रम संवत 1956 में पड़ा।
- राजस्थान धनिया जीरा मेथी उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है।

- राज्य में सर्वाधिक फल गंगानगर और सर्वाधिक मसाले बारां में उत्पादित होते हैं।- जालौर जिले में विश्व का 40% इसबगोल उत्पादित होता है।
- केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान केंद्र काजरी जोधपुर में स्थित है शुष्क वन अनुसंधान संस्थान जोधपुर में स्थित है ।- राज्य में बायो डीजल के लिए जेट्रोफा रतनजोत पौधे की कृषि की जाती है।
- रेगिस्तान में इजराइल की सहायता से होहोबा(जोजोबा) की कृषि की जाती है।

- राजस्थान में अमेरिकन कपास का उत्पादन श्री गंगानगर जिले में होता है।- राज्य कृषिअनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा जयपुर में है।
- जैतसर एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म है। सोवियत संघ के सहयोग से स्थापित किया।

- केंद्रीय कृषि फार्म सूरतगढ़ गंगानगर एशिया का सबसे बड़ा कृषि फार्म है।

-------

राजस्थान में कृषि विश्वविद्यालय
स्वामी केशवानंद कृषि विवि, बीकानेर

महाराणा प्रताप कृषि तकनीकी विवि, उदयपुर

कृषि विवि, जोधपुर

कृषि विवि, जोबनेर जयपुर

कृषि विवि, कोटा

केंद्रीय शुष्क क्षेत्र उद्यानिकी अनुसंधान केंद्र, बीकानेर

---------
राजस्थान में कृषि मंडियाँलहसून मंडी छीपा बाडौद (बांरा)

प्याज मंडी अलवर

जीरा मंडी मेडता सिटी (नागौर)

सतरा मंडी भवानी मंडी (झालावाड)कीन्नू व माल्टा मंडी गंगानगर

अमरूद मंडी सवाई माधोपुर

ईसबगोल (घोडाजीरा) मंडी भीनमाल (जालौर)
मूंगफली मंडी बीकानेर

धनिया मंडी रामगंज (कोटा)

फूल मंडी अजमेर

मेहंदी मंडी सोजत (पाली)

अखगंधा मंडी झालरापाटन (झालावाड)

टमाटर मंडी बस्सी (जयपुर)

मिर्च मंडी टोंक

मटर (बसेडी) बसेड़ी (जयपुर)
टिण्डा मंडी शाहपुरा (जयपुर)

सोनामुखी मंडी सोजत (पाली)

आंवला मंडी चोमू (जयपुर)

---------

राजस्थान में कृषि विकास योजनाएं

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना :

प्राकृतिक आपदाओं, कृमियों, रोगों या अन्य कारणों से फसल के नस्ट होने पर फसल बीमा एवं वित्तीय सहायता
इसके अंतर्गत रबी की 9 एवं खरीफ की 11 फसलों को शामिल किया गया है।

निर्मल ग्राम योजना :

इस योजना को वर्ष 1999 – 2000 में प्रारम्भ किया गया जिसके अंतर्गत गाँव के कचरे का इस्तेमाल कम्पोस्ट खाद बनाने के रूप करना है।
सहकारी किसान योजना :

यह योजना 29 जनवरी 1999 में प्रारम्भ की गयी।

किसान स्वस्थ्य सुरक्षा योजना :

यह योजना 1 अप्रेल 2006 को लागू की गयी। इसके अंतर्गत किसान १ लाख रुपये तक शल्य चिकित्सा करवा सकते है। इस योजना के तहत धारक को एक राजकार्ड उपलब्ध कराया गया है।
राष्ट्रीय बम्बू मिशन :

बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए 12 जिलों बांसवाड़ा, बारां, चित्तौडग़ढ़, राजसमंद, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, डूंगरपुर,झालावाड़,करौली,सवाईमाधोपुर, सिरोही, उदयपुर में इस योजना को लागू किया गया।

------------

मसाला उत्पादन
देश के मसाला उत्पादन का राजस्थान प्रथम स्थान है। इसमें राज्य के दक्षिण पूर्व का बारां जिला राज्य में मसाला उत्पादन में पहले स्थान पर है। पहला मसाला पार्क झालावाड़ में है।

-----
मसाले- सर्वाधिक उत्पादक जिलामिर्च- जोधपुर

धनिया- बारांसौंफ- कोटा

जिरा, इसबगोल- जालौरहल्दी, अदरक- उदयपुर

मैथी- नागौरलहसून- चित्तौड़गढ़

फल उत्पादन - गंगानगर

----------------

फल - सर्वाधिक उत्पादक जिलाअंगूर- श्री गंगानगर
किन्नू- श्री गंगानगरमाल्टा- श्री गंगानगर

मौसमी- श्री गंगानगरसंतरा- झालावाड़

चीकू- सिरोहीसेव- माउन्ट आबू, सिरोही

नींबू- धौलपुरआम- भरतपुर

केला- बांसवाड़ानाशपति- जयपुर

मतीरा- टोंक, बीकानेरपपीता, खरबूजा - टोंक

---------

दक्षिणाचंल के 12.5 लाख आदिवासी किसानों को कायापलट की उम्मीद
इस सप्ताह आने वाले बजट से प्रदेश के दक्षिणाचंल के साढे़ 12 लाख आदिवासी किसानों को खासी उम्मीद है। खेती की आजीविका के बूते जीवन निर्वाह करने वाले इन किसानों को पूरी मेहनत का लाभ नहीं मिल रहा। गत वर्ष कृषि क्षेत्र में नई सुविधाओं को लागू करने के लिए 3756 करोड़ रुपए व पशुपालन के लिए 1829 करोड़ रुपए की बजटीय मांगों को पारित किया गया था। राजस्थान में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ का आदिवासी समुदाय ज्यादातर खरीफ के सीजन में वर्षा आधारित खेती करता है। बड़ी संख्या में आदिवासियों ने काम के लिए पलायन किया, कोरोना महामारी के दौर में प्रवासी मजदूरों ने लॉकडाउन होने पर जेब में पैसे नहीं होने से नंगे पाव गांवों का रुख किया। सरकार उचित बजट आवंटन के साथ ऐसी प्रभावी नीतियां बनाए कि ऐस हालात फिर नहीं बने।
------

बिन्दु :

- राजस्थान में देश का 11 प्रतिशत क्षेत्र कृषि योग्य भूमि है और राज्य में 50 प्रतिशत सकल सिंचित क्षेत्र है जबकि 30 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र है। राजस्थान का 60 प्रतिशत क्षेत्र मरूस्थल और 10 प्रतिशत क्षेत्र पर्वतीय है। अतः कृषि कार्य संपन्न नहीं हो पाता है और मरूस्थलीय भूमि सिंचाई के साधनों का अभाव पाया जाता है। राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 2 सौ 39 वर्ग कि.मी. है। जो की देश का 10.41 प्रतिशत है।- नकदी/व्यापारिक फसले (43 प्रतिशत)- गेहूं, जो, ज्वार, मक्का, गन्ना, कपास, तम्बाकू, बाजरा, चावंल, दहलने, तिलहन, सरसों, राई, मोड, अरहर, उड्द, तारामिरा, अरण्डी, मूंग, मसूर, चांवल, तिल, सोयाबीन।
- रबी की फसल - इसी राजस्थान में स्यालू एम उनालू का मौसम कहा जाता है इस का प्रारंभ नवंबर में होता है तथा मार्च सन तक चलता है|रवि की मुख्य फसलें- गेहूं, जो, चना, मसूर, मटर, सरसों, अलसी, तारामीरा, सूरजमुखी, धनिया, जीरा, मेथी
- खरीफ की फसल - चावल ज्वार बाजरा मक्का अरहर उड़द मूंग चावला मोठ मूंगफली अरंडी तेल सोयाबीन कपास गन्ना ग्वार आदि

- जायद की फसल - खरबूजे, तरबूज ककडी

-----------

एक नजर1. गेहूं - हम चौथे स्थान पर
2. जौ - दूसरा स्थान

3. ज्वार - चौथा स्थान - राजस्थान में ज्वार अनुसंधान केन्द्र वल्लभनगर उदयपुर में स्थापित किया गया है।

4. मक्का - आठवां स्थान है।

5. चांवल - नाम मात्र
6. चना - दूसरा स्थान

7. दलहन

8. बाजरा - देश में सर्वाधिक

-----

नगदी/व्यापारिक फसले

9. गन्ना- देश का 40 प्रतिशत

10. कपास - चौथा स्थान11. तम्बाकू
12. तिलहन - तीसरा स्थान

----------

कृषि से संबंधित योजनाऐं1. भागीरथ योजना

2. निर्मल ग्राम योजना

-------

ये भी हो तो बदलेगी दिशा- दवाइयां, यूरिया व डीएपी से फसले पैदा हो रही है, पूरी तरह से ऑर्गेनिक फसले तैयार हो।
- लिक्विड बायो फर्टीलाइजर व नैनो फर्टीलाइजर, नैनो पेस्टिसाइट, का उपयोग बढे।- सेंसर कृषि व संरक्षिक खेती पर फोकस हो।

- फार्मर पार्टिसिपेटरी सीड प्रोडक्शन के आधार पर किसानों के खेतों पर मॉडल बीज तैयार हो।
-------

एमपीयूएटी में ये हो रहे है प्रयोग

महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वर्तमान में 31 ऑल इंडिया लेवल की अनुसंधान परियोजना पर कार्य कर रहा है, इसमें नई किस्मों का विकास, नए प्रकार के फल, फसल, ज्वार व मक्का, अफीम के लिए काम हो रहा है। उत्पादकता बढ़ाने को लेकर कार्य किया जा रहा है। ऐसी फसलों की किस्मों को तैयार किया जा रहा है, जो हाई टेम्प्रेचर टॉलरेंट हो, जो ज्यादा गर्मी में भी बनी रहे। जिनमें आयरन, जिंक कंटेंट की मात्रा अधिक हो। हमारी किस्में जैविक खेती के लिए उपयुक्त हो ऐसा होना चाहिए।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

17 जनवरी 2023 तक 4 राशियों पर रहेगी 'शनि' की कृपा दृष्टि, जानें क्या मिलेगा लाभज्योतिष अनुसार घर में इस यंत्र को लगाने से व्यापार-नौकरी में जबरदस्त तरक्की मिलने की है मान्यतासूर्य-मंगल बैक-टू-बैक बदलेंगे राशि, जानें किन राशि वालों की होगी चांदी ही चांदीससुराल को स्वर्ग बनाकर रखती हैं इन 3 नाम वाली लड़कियां, मां लक्ष्मी का मानी जाती हैं रूपबंद हो गए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के, लोग परेशान, अब क्या करें'दिलजले' के लिए अजय देवगन नहीं ये थे पहली पसंद, एक्टर ने दाढ़ी कटवाने की शर्त पर छोड़ी थी फिल्ममेष से मीन तक ये 4 राशियां होती हैं सबसे भाग्यशाली, जानें इनके बारे में खास बातेंरत्न ज्योतिष: इस लग्न या राशि के लोगों के लिए वरदान साबित होता है मोती रत्न, चमक उठती है किस्मत

बड़ी खबरें

IPL 2022 MI vs SRH Live Updates : रोमांचक मुकाबले में हैदराबाद ने मुंबई को 3 रनों से हरायामुस्लिम पक्षकार क्यों चाहते हैं 1991 एक्ट को लागू कराना, क्या कनेक्शन है काशी की ज्ञानवापी मस्जिद और शिवलिंग...जम्मू कश्मीर के बारामूला में आतंकवादियों ने शराब की दुकान पर फेंका ग्रेनेड,3 घायल, 1 की मौतमॉब लिंचिंग : भीड़ ने युवक को पुलिस के सामने पीट पीटकर मार डाला, दूसरी पत्नी से मिलने पहुंचा थादिल्ली के अशोक विहार के बैंक्वेट हॉल में लगी आग, 10 दमकल मौके पर मौजूदभारत में पेट्रोल अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और श्रीलंका से भी महंगाकर्नाटक के राज्यपाल ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक को दी मंजूरी, इस कानून को लागू करने वाला 9वां राज्य बनाSwayamvar Mika Di Vohti : सिंगर मीका का जोधपुर में हो रहा स्वयंवर, भाई दिलर मेहंदी व कॉमेडियन कपिल शर्मा सहित कई सितारे आए
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.