उदयपुर के आदिवासियों की एक पेड़़ बदल रहा तकदीर, कैसे हो रहा है ये चमत्‍कार, जानें मामला..

उदयपुर के आदिवासियों की एक पेड़़ बदल रहा तकदीर, कैसे हो रहा है ये चमत्‍कार, जानें मामला..

Bhagwati Teli | Updated: 21 Nov 2017, 05:07:04 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर संभाग में जनजाति समुदाय की तकदीर बदल रही है। किसान व आमजन अब वनोपज को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

उदयपुर . संभाग में वनोपज से जनजाति समुदाय की तकदीर बदल रही है। किसान व आमजन अब वनोपज को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। संभाग में 48 फीसदी जनसंख्या जनजाति समुदाय की है, वन उपज उनकी जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन बनकर उभर रही है। उदयपुर में प्रदेश की एकमात्र लघु वनोपज मण्डी में जनजाति समुदाय ने तीन साल में 189 करोड़ रुपए की वनोपज बेचे जिससे मण्डी को भी 3 करोड़ 2 लाख रुपए की आय प्राप्त हुई है। संभाग में 8.17 लाख हैक्टेयर क्षेत्र वनों से गिरा हुआ है, यह प्रदेश के कुल वन क्षेत्र का 30 प्रतिशत से भी ज्यादा है।


5 लाख 60 हजार क्विंटल उपज बेची
मण्डी सचिव भगवान सहाय ने बताया कि तीन साल में अब तक संभाग भर से 5 लाख 60 हजार क्विंटल वन उपज मण्डी में आए। यह संभाग में उत्पादित होने वाले वन उपज का मात्र 10 प्रतिशत ही है। इसको लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा हैं ताकि वह वन उपज से आय प्राप्त कर सके। संभाग में बड़ी मात्रा में वन उपज उत्पादित होते हैं। इनमें कुछ उपज को तो किसान खेती के रूप उत्पादित करते है। कुछ अन्य प्रकार के उपज जगलों से बिनकर भी बेचने को लाए जाते हैं। इसको देखते हुए जिले के कोटड़ा व लसाडिय़ा में भी गौण मण्डी स्थापित की जा रही हैं।

 

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26 वनोपज को किया टीपी से मुक्त
सहाय ने बताया कि वनोपज की परम्परागत और अविकसित विपणन व्यवस्था से जनजाति समुदाय को वन उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। टीपी (ट्रांजिट परमिट) के जटिल व अव्यावहारिक कानून से आदिवासियों को ठेकेदार के हाथों शोषित होना पड़ता था। इसके बाद सरकार ने 2015 में 26 प्रकार की वनोपज को टीएसपी क्षेत्र में टीपी से मुक्त कर दिया। इससे समुदाय संग्रहित की गई उपज को स्वतंत्र परिवहन व अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए बाजार चयन करने में स्वतंत्र हुआ। इसे मण्डी कानून में शामिल किया।


5 गुणा तक बढ़ी कीमतें
सहाय ने बताया कि मण्डी में बिकने के लिए आने के बाद उपज की कीमतें करीब 2 से 5 गुणा तक बढ़ गई। पुवाड़ पहले 5 से 10 रुपए प्रति किलोग्राम बिकता था जो अब 50 से 60 रुपए प्रति किलो ग्राम के भाव से बिकने लगा। इसके अलावा अन्य उपजों का भी अधिक मूल्य किसानों को मिल रहा है।

संभाग से आया इतना उपज
लघु वन उपज आवक (क्विंटल)
महुआ : 4,13,264
रतनजोत : 24,108
कणजी : 9,956
पुवाड़ : 73,058
आंवला : 8,875
शहद : 2,628
गोंद : 730
डोलमा : 10,532
बहेड़ा : 225
निम्बोली : 16,407
कलौंजी : 521
कुल : 5,60,304

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