जंगल से इकट्ठे किए बीज और उगा दी 'तरक्की'

चित्तौडग़ढ़ जिले के आठवीं पास जगदीश स्ट्रॉबेरी, सफेद मूसली और पशुपालन से पांच-पांच लाख रुपए सालाना कमा रहा, देश के 11 चुनिंदा प्रगतिशील किसानों में हुआ शामिल

By: jitendra paliwal

Published: 02 Aug 2020, 10:28 PM IST

उदयपुर. जगदीश प्रजापत आठवीं पास किसान हैं। सात साल पहले तक पहले वह गेहूं, मक्का और दलहन जैसी परम्परागत फसलें बोते थे। कुछ बेहतर करने का सोचा। खुद को उसके मुताबिक गढ़ा और जी-जान से जुटकर मेहनत की। उसके नतीजे देख दूसरों में भी उत्साह जग जाता है।
निम्बाहेड़ा तहसील के छोटे से गांव बांगरेड़ा मामादेव के किसान जगदीश ने बताया कि वर्ष 2013 से पहले तक परम्परागत खेती करते थे। परम्परागत फसल उत्पादन से परिवार की आर्थिक स्थिति में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया। वर्ष 2013 के बाद पुश्तैनी जमीन से ज्यादा आमदनी हासिल करने का सोचा। कुछ कृषि वैज्ञानिकों की मदद ली। कुछ अपना पैसा निवेश किया, तो कुछ सरकारी अनुदान से नई खेती की तैयारी की। जगदीश बताते हैं कि वैज्ञानिकों की सलाह पर सबसे पहले सफेद मूसली की खेती शुरू की। बीज का बाजार मूल्य अधिक होने के कारण वह मध्यप्रदेश के वन क्षेत्र से सफेद मूसली का बीज इकट्ठा कर लाए। उसका गुणन करते हुए 1.5 हैक्टेयर इलाकें में बोया और फसल उगाई। मेहनत पकने के बाद जब बाजार में बेची तो मुनाफा अच्छा हुआ। यह सिलसिला चल पड़ा। जगदीश को हर साल तरक्की की ओर कदम बढ़ाते देख आसपास के गांवों में 50 और किसानों ने सफेद मूसली की खेती शुरू कर दी।

फिर आजमाया स्ट्रॉबेरी पर हाथ
सफेद मूसली में सफलता हाथ लगते देख जगदीश ने पहली बार 2016 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। आज उनकी नई दिल्ली की मण्डी तक स्ट्रॉबेरी बिकती है। सफेद मूसली से औसतन पांच और स्ट्रॉबेरी से भी सालाना पांच लाख रुपए की आय हुई। इस साल कोरोना के चलते आय जरूरी प्रभावित हुई है। यही नहीं, जगदीश ने दस भैंसें भी पाल रखी हैं, जिनके दूध से भी लाखों की आय हो रही है।

और भी किसानों को चढ़ा रंग
जगदीश की कामयाबी देख 15 कृषको ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। आज वे भी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 8वीं पास प्रजापत ने वैज्ञानिकों की मदद और सलाह से सफेद मूसली, स्ट्राबेरी ही नहीं, प्याज के बीज उत्पादन, लहुसन उत्पादन, पॉलीहाउस स्थापना, पैक हाउस स्थापना, संतरा के बगीचे में लहुसन का अंतराशस्यन, वैज्ञानिक डेयरी फार्म एवं और खास सफेद मूसली छीलने की मशीन बनाने जैसी मिसाल पेश कर दूसरों को भी रास्ता दिखा दिया है।

देशभर के 11 किसानों में चयन
जगदीश को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली ने देश के 11 जोन में से अपने जोन के 61 कृषि विज्ञान केन्द्रों में से चुनकर जगजीवनराम अभिनव पुरस्कार से नवाजा। कृषि और उद्यानिकी में पांच साल की सफलता पर यह कृषि के सर्वोच्च संस्थान की मुहर भी थी।
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जगदीश जैसे किसान दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। उनकी सफलता कमाल की है। कृषि वैज्ञानिकों का योगदान और मार्गदर्शन भी बेहतर रहा।
डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़ एवं डॉ. एस.एल. मून्दड़ा,
कुलपति एमपीयूएटी एवं शिक्षा प्रसार निदेशक

jitendra paliwal Desk
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