लेकसिटी में बच्चों संग युवाओं ने बिखेरे जलवे, फैशन की अजब रंग-रीत ने लुभाया

Rakesh kumar Sharma

Publish: Sep, 17 2017 02:48:42 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
लेकसिटी में बच्चों संग युवाओं ने बिखेरे जलवे, फैशन की अजब रंग-रीत ने लुभाया

- पूरब-पश्चिम के रंग-बिरंगे परिधानों में सजे मेल-फीमेल मॉडल्स, हास्य रस से सराबोर प्रस्तुति ने लुभाया

 

उदयपुर. लेकसिटी में शनिवार की शाम नए फैशन के जलवे बिखेरते बच्चों संग युवा प्रतिभागियों ने हर किसी को खासा लुभाया। पूरब-पश्चिम के रंग-बिरंगे परिधानों को धारण किए 87 मेल-फीमेल मॉडल्स ने विभिन्न राउण्ड में मंच पर अपनी मोहक अदाएं बिखेरीं।

 

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इस मौके पर एक ओर जहां देश के ख्यातनाम फैशन डिजाइनरों द्वारा तैयार वेस्टर्न-टे्रडीशनल थीम की ड्रेसेज पहने प्रतिभागी लकदक रोशनी और संगीत की धुनों पर कदमताल करते मंच पर आए। वहीं दूसरी ओर मिस्टर फैशन शो के सभी प्रतिभागी हाथों में तलवार थामे और सिर पर रजवाड़ी साफा धारण किए तथा मिस फैशन शो की प्रतिभागी युवतियां लहंगा-चोली में आईं तो माहौल में अलग शोखी घुल गई।

 

दुनिया के खूबसूरत शहरों में एक शहर

छोटे पर्दे पर ‘ससुराल सिमर का’ में मुख्य किरदार निभाने वाली दीपिका कक्कड़ बतौर निर्णायक पहली बार उदयपुर आई है। इस मौके पर वे कहती हैं कि इस शहर के प्राकृतिक सौंदर्य और मेहमाननवाजी ने दिल जीत लिया। भविष्य की योजना पर उन्होंने कहा कि इस मेगा टीवी सीरियल से ब्रेक के बाद इन दिनों आराम कर रही हूं। छोटे पर्दे पर अपनी भूमिका से बेहद संतुष्ट हंू और फिल्मों में जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। कुकिंग की शौकीन दीपिका ने कहा कि बचपन से वो राजस्थानी संस्कृति और खान-पान को बहुत पसन्द करती आई हैं। एक्टिंग में माधुरी दीक्षित को अपना आदर्श मानती हैं।

 

लोककला मंडल में नाटक किराएदार का दमदार मंचन

उदयपुर. एक कमरे को किराए पर उठाने को लेकर निकाले इश्तिहार और फिर दुगुना लाभ कमाने की कहानी से उपजी उलझन और हास्य की कई घटनाओं पर आधारित नारायण गंगोपाध्याय लिखित और दिलीप भट्ट निर्देशित नाटक ‘किराएदार’ के मंचन ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

 

भारतीय लोक कला मण्डल के रंगमंच पर शनिवार को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी एवं भारतीय लोक कला मंडल की ओर से दी परफोरमर्स के सहयोग से मंचित इस नाटक की कहानी मुख्य पात्र 65 वर्षीय भूपेन बाबू और उनके प्रिय कमरे को किराये पर देने की कहानी शुरू और अंत भी इसी कमरे पर होती है। कैसे वह कमरा किराये देने की जुगत में कभी झाडू खाते हैं, तो कभी किसी को खरी-खोटी सुनते हैं।

 

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एेसे में बात जब शाहजहां तक पहुंच जाती है तो राजदरबार में दिलावर खां के हाथों उनकी गर्दन धड़ से अलग होते बचती है। एेसी कई रोचक घटनाओं से सजे कथानक के विभिन्न किरदारों में चन्दन, कुलभूषण, सूरज, ऋषभ, अफसाना, विपुल, सचिन, आमिर, सुनील, नितिन, ईशान, लखनपाल, मणिभूषण, शुभम, सूरज, विजय और दिलीप की भूमिकाएं सराहनीय रहीं।

 

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