बार हेडेड गूज की मौत से सकते में वन विभाग

MIGRATORY BIRD: वेटरनेरी मोबाइल लेबोरेट्री का दल पहुंचा मेनार, लिए बीट के नमूने, जालंधर लैब में होगी नमूनों की जांच

By: Manish Kumar Joshi

Published: 27 Nov 2019, 12:52 AM IST

मेनार .उदयपुर जिले के बर्ड विलेज मेनार के जलाशय पर प्रवासी पक्षी बार हेडेड गूज एवं स्थानीय पक्षी पर्पल स्वेम्फेन की मौत के बाद वन विभाग व पशुपालन विभाग सतर्क है। पत्रिका में मंगलवार को श्वसन तंत्र में संक्रमण से हुई पर्पल स्वेम्फेन पक्षी की मौत शीर्षक से खबर प्रकाशन के बाद क्षेत्रीय पशु रोग निदान केंद्र, उदयपुर से वेटरनेरी मोबाइल लेबोरेट्री, पशुपालन विभाग की चिकित्सा टीम मंगलवार सुबह सुबह मेनार पहुंची।

पशु रोग निदान केंद्र के उपनिदेशक डॉ.चंद्रशेखर भटनागर के नेतृत्व मेडिकल टीम धण्ड तालाब के किनारे पक्षी के मृत मिलने के स्थल का मुआयना किया। इस दौरान लेबोरेट्री के अजय कुमार एवं दल ने बीट के नमूने लिए। उप निदेशक भटनागर ने तालाब के किनारे अलग-अलग स्थानों पर पक्षियों की गतिविधियों को करीब से देखा। उन्होंने पाया कि किसी बीमारी या संक्रमण जैसा कोई मामला नहीं है। उन्होंने जागरूकता लाने के उद्देश्य से ग्रामीणों से विस्तार में चर्चा की।

इस दौरान वन विभाग क्षेत्रीय वनाधिकारी सोमेश्वर त्रिवेदी, डॉ. अनिल काले, वनपाल शंकरलाल मेनारिया, डालचंद गुर्जर, नागेंद्रसिंह, पूर्व सरपंच ओंकार लाल भलावत, पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया, कालू लाल दोलावत, ललित कलावत, हुक्मीचंद मन्द्रावत, पुष्कर पालीवाल, आदि उपस्थित थे।

पत्रिका ने उठाया मामला
गौरतलब है कि मेनार में बार हेडेड गूज की हैड इंजरी एवं पर्पल स्वेम्फेन की सेप्टिसेमिया से मौत का मामला पत्रिका ने उठाया। इसके बाद बन विभाग की टीम सतर्क हुई। उसने मेनार का दौरा कर जलाशयों की स्थिति देखी। इसके बाद पशुपालन के उपनिदेशक मय लेबोरेट्री मोबाइल वैन के साथ मेनार पहुंचे।

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तालाब के किनारे से बीट के नमूने एकत्र किए गए। सभी पक्षी स्वस्थ दिखे, किसी तरह के संक्रमण या बीमार के लक्षण नहीं दिखे। नमूनों को जांच के लिए जालंधर भेजा जाएगा। स्थानीय पक्षी मित्रों को भी जानकारी दी है। हमारी टीम सक्रिय रहेगी। ग्रामीणों का पक्षियों से जुड़ाव अधिक है जिससे सांभर जैसी स्थिति असंभव है।
डॉ. चन्द्रशेखर भटनागर, उप निदेशक, क्षेत्रीय पशु रोग निदान केंद्र उदयपुर

एक्सपर्ट व्यू....
सांभर त्रासदी के बाद भी सरकार नहीं ढूंढ पाई ठोस उपाय

मेनार में भी पक्षी की मौत का मामला सामने आया है। कहीं ऐसा न हो कि लापरवाही के चलते एक छोटी सी लगने वाली घटना विभीषिका का रूप न ले ले। मेनार पक्षी विहार में काल की ग्रास बनी पर्पल स्वेम्फेन के पोस्टमार्टम के बाद यद्यपि पशुपालन विभाग ने इसे सामान्य मौत करार दिया है। सांभर पक्षी त्रासदी का कारण क्लोस्ट्रीडियम बोटोलिनम जैसा खतरनाक बैक्टीरिया है जो अनोर्बिक (ऑक्सीजन विहीन) परिस्थितियों में पैदा होता है, वैसी परिस्थिति पैदा होना मेनार में असम्भव नहीं है। पक्षी वैज्ञानिक डॉ. आशा शर्मा ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि स्थानीय स्तर पर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर आंख मूंद कर संतोष कर लेने का मतलब राज्य में नई आपदा को निमंत्रण देना होगा। ऐसे में क्लोस्ट्रीडियम बोटोलिनम बैक्टीरिया की विस्तृत जांच के लिए पोस्टमार्टम से प्राप्त विसरा को बरेली एवं भोपाल की प्रयोगशाला में भेजा जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि विभाग को मेनार पक्षी विहार के पानी का नमूना लेकर इसमें ऑक्सीजन एवं अम्लीयता की जांच करनी चाहिए क्योंकि ये बैक्टीरिया कम ऑक्सीजन और ज्यादा क्षारीयता वाले पानी में ही पनपता है। अगर आवश्यकता हो तो पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के उपाय भी करने चाहिए।

Manish Kumar Joshi Desk
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