संभाग के 400 से ज्यादा विद्यार्थी ठगी का शिकार...क्षेत्रीय केन्द्र में बैठा ई-मित्र संचालक राशि जेब में डालकर हुआ रफूचक्कर

संभाग के 400 से ज्यादा विद्यार्थी ठगी का शिकार...क्षेत्रीय केन्द्र में बैठा ई-मित्र संचालक राशि जेब में डालकर हुआ रफूचक्कर

Krishna Kumar Tanwar | Publish: Sep, 08 2018 06:49:57 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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चन्दन सिंह देवड़ा/उदयपुर. संभाग के करीब 400 छात्र-छात्राओं ने घर बैठे उच्च शिक्षा की मंशा से वर्धमान खुला विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन किया। इसके लिए यहां विवि के क्षेत्रीय केन्द्र परिसर में स्थित ई-मित्र केन्द्र पर निर्धारित फीस भी जमा करवा दी, लेकिन तीन-चार माह के बाद भी पाठ्यक्रम में नामांकन की सूचना नहीं आने पर विवि में पड़ताल की तो ठगे से रह गए क्योंकि ई-मित्र संचालक ने उनकी फीस जमा ही नहीं की। ऐसे में विद्यार्थियों का नामांकन नहीं हो पाया। अब ठगे गए छात्र-छात्राएं रोजाना यहां विवि परिसर के चक्कर काट रहे हैं लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। इधर, ई-मित्र संचालक दुकान बंद कर रफूचक्कर हो गया है। सूरजपोल पर संचालित विवि के क्षेत्रीय केन्द्र परिसर में ओपन कोर्स के लिए ऑनलाइन फीस और फार्म भरने वाले ई-मित्र संचालक को बिठाया गया, जो करीब चार सौ छात्र-छात्राओं की करीब 7 से 8 लाख रुपए की फीस हजम कर गया।


जमीन गिरवी रख भरी थी फीस

खेरवाड़ा की एक छात्रा के परिजनों ने जमीन गिरवी रखकर 14 हजार रुपए का जुगाड़ किया और कोटा ओपन से फार्म भरने के लिए फीस दी लेकिन उसका फार्म ही नहीं भरा गया। ऐसे में अब वह परीक्षा नहीं दे पाएगी। संचालक ने उसे फीस भी नहीं लौटाई। यह छात्रा रोते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के पास भी पहुंची। ऐसा ही सेक्टर 14 निवासी सुरेश सुखवाल और आशा सुखवाल के साथ हुआ। संचालक ने उनसे एमए समाजशास्त्र की फीस लेकर बाद में फार्म भरने की बात कही लेकिन फार्म नहीं भरा। पता चलने पर धमकाया तो संचालक राजवीर ने पैसे लौटा दिए लेकिन इन दोनों की एमए करने का सपना अधूरा रह गया। इसी तरह देबारी निवासी यशोदा कुंवर से संचालक ने एमलिब की साढ़े आठ हजार रुपए फीस ली थी। परीक्षा का समय करीब आने पर जब किताबें नही पहुंची तो पता चला कि उसका फार्म ही नहीं भरा गया।

नहीं दर्ज करवाई एफआईआर

ई-मित्र संचालक राजवीरसिंह और उसके साथियों ने खुला विवि परिसर में बैठकर अभ्यर्थियों से फीस लेकर फार्म भरने का काम किया। सर्वर डाउन होने पर रसीद बाद में देने की बात कहकर अभ्यर्थियों को विश्वास में लिया और कुछ समय के बाद यह काउंटर हट गया। विद्यार्थियों ने विवि के जिम्मेदारों से सम्पर्क किया तो उन्होंने ई मित्र संचालक से बात करने का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में कइयों की फीस अटक गई। इतना सब कुछ होने के बावजूद विवि और ना ही किसी अभ्यर्थी ने ईमित्र संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।

 

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भविष्य से खिलवाड़
ई-मित्र संचालक ने सैकड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खेल गया। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उच्च शिक्षा पाने के इच्छुक गरीब परिवारों के बेरोजगारों के सपने चकनाचूर हो गए। उसने कई गरीब छात्रों से आखिरी सेमेस्टर की फीस ले ली लेकिन फार्म नहीं भरा जिससे वे परीक्षा नहीं दे पाए। ऐसे में वे कई भर्तियों से वंचित रह जाएंगे।इस संबंध में पूरी रिपोर्ट हमारे उच्चाधिकारियों को प्रेषित की है। संबंधित छात्र-छात्राओं से आग्रह है कि वे इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाएं। विवि प्रशासन उनकी पूरी मदद करेगा।
रश्मि बोहरा, निदेशक, वर्धमान खुला विवि, उदयपुर

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