साथी ने बाइक पर तोड़ा दम, रगड़ से घिसी अंगुलियां

शव को चार घंटे तक बाइक पर लेकर घूमते रहे बाइक पर

By: surendra rao

Published: 18 Apr 2021, 06:53 PM IST

कानोड़. (उदयपुर). उदयपुर में एक होटल पर कार्य करने वाले कानोड़ निवासी युवक के बीमार होने के बाद उसके साथी उसे बाइक पर बैठाकर करीब चार घंटे तक भटकते रहे। इस दौरान उसकी मौत भी हो गई। वे बाइक पर उसे ले जा रहे थे। युवक के पैरों में न तो जूते थे और न ही चप्पल, जिससे उसके पैरों की अंगुलियां भी घिसटते जख्मी होकर टूट गईं। भींडर-कानोड़ मार्ग पर बाइक का पेट्रोल खत्म होने पर उन्होंने वहां के लोगों से मदद मांगी। इस पर कानोड़ अस्पताल से १०८ पहुंची। घटनाक्रम के अनुसार कानोड़ के समीप पतलावतों का साथ निवासी रमेश (२०) उदयपुर के पेसिफिक अस्पताल उमरड़ा के निकट स्थित बाइसा राज रेस्टोरेंट पर काम करता था। रमेश पिछले तीन दिन से बीमार था। इस पर होटल संचालक ने वहां कार्य करने वाले उंदरी थाना नाई, निवासी उसके मित्र कैलाश मीणा व रोशन मीणा से रमेश को बाइक से उसके गांव छोड़ आने को कहा। दोनों युवक रमेश को बाइक पर पर बिठाकर सुबह ११ बजे उदयपुर से रवाना हुए। बीच राह में रमेश की तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत हो गया। इसके बाद उसकी मौत हो गई।
पेट्रोल खत्म हुआ तब चला पता : साथियों ने उसके परिजनों तक पहुंचाने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन पता नहीं चला। दोनों युवक घंटों तक लाश को लेकर घूमते रहे। यहां तक कि मृतक के पैरों की अंगुलियां तक घिस गई थी। रमेश के मोबाइल का पैटर्न लॉक होने से साथी युवक परिजनों को सूचना तक नहीं दे पाए। इस बीच कानोड़ से भीण्डर सड़क मार्ग पर बड़वाई बस स्टैण्ड के पास बाइक में पेट्रोल खत्म हो गया तो युवकों ने वहां मौजूद लोगों से सहायता मांगी तो लोग बाइक के पास पहुंचे। ग्रामीणों व राहगीरों ने १०८ एम्बुलेंस को फोन कर युवक को कानोड़ चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया।
होटल संचालक की लापरवाही
सूचना पर थानाधिकारी कमलेन्द्र सिंह सोलंकी भी जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे व लाश को मोर्चरी में रखवाते हुए परिजनों को इसकी सूचना देकर साथी युवकों से पूछताछ की। युवक के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका भी जताई जा रही है। उसे श्वास लेने में तकलीफ हो रही थी। घटना को लेकर होटल संचालक की लापरवाही भी सामने आई कि युवक तीन दिन से बीमार था तो उसे चिकित्सालय में भर्ती क्यों नहीं कराया गया और बीमार युवक को घर तक पहुंचाने के लिए कार्यरत युवकों के साथ बाइक पर क्यों भेजा।

surendra rao Desk
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