अनुबंध शर्तों की अनदेखी बिगाड़ रही पथ का ‘गौरव’, लोहे के चैनल से बनाए जा रहे हैं गौरव पथ

अनुबंध शर्तों की अनदेखी बिगाड़ रही पथ का ‘गौरव’, लोहे के चैनल से बनाए जा रहे हैं गौरव पथ

Sushil Kumar Singh Chauhan | Updated: 01 Dec 2017, 05:49:35 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

सरकार की फ्लेगशिप योजना में शामिल ‘गौरव पथ’ के निर्माण को लेकर तीसरे फेज की सडक़ों को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय से कार्यादेश जारी हो चुके

उदयपुर . प्रदेश सरकार की फ्लेगशिप योजना में शामिल ‘गौरव पथ’ के निर्माण को लेकर तीसरे फेज की 111 सीमेंटेड सडक़ों को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय से कार्यादेश जारी हो चुके हैं। अब तक प्रथम फेज के तहत 107 सडक़ें बन चुकी हैं, वहीं द्वितीय फेज की 114 सडक़ें लगभग पूरी होने वाली हैं। गौरव पथ निर्माण में ठेकेदार स्लिप फॉर्म/ फिक्स फार्म पेवर फिनिशर के उपयोग से बच रहे हैं जिससे सडक़ों की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन विभाग मौन साधे हुए हैं।


अब तक अधिकतर गौरवपथ का निर्माण आयरन चैनल के किनारों के बीच साधारण मशीनों से मिक्सर तैयार कर हो रहा है, जबकि संवेदकों के साथ अनुबंध में सीमेंटेड सडक़ वाले गौरव पथ का निर्माण स्लिप फॉर्म/ फिक्स फॉर्म पेवर फिनिशर वाली मशीनों के माध्यम से ही होने का उल्लेख है ताकि सीमेंटेड सडक़ में बरसात के दौरान पानी नहीं रुके। दूसरी ओर एए क्लास संवेदकों की ओर से साधारण हांडी मिक्सर से किए जा रहे निर्माण और आयरन चैनल को लेकर विभागीय ओहदेदार आंखें मूंदें हुए है। गौरतलब है कि स्लिप फॉर्म/ फिक्स फॉर्म पेवर फिनिशर से सडक़ निर्माण की लागत संवेदकों को महंगी पड़ती है। इसलिए ही न्यूनतम दर पर आवेदन करने वाले ठेकेदार गुणवत्ता विहीन निर्माण की आदतों को जन्म देते हैं। संबंधित उपकरणों का उपयोग नहीं होने पर विभागीय प्रति क्यूबिक फीट 5 से 10 फीसदी कटौती का प्रावधान है।

 

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गलत देखें तो हमें बताएं
आमजन से अपील है कि गौरव पथ निर्माण में स्लिप फॉर्म/ फिक्स फॉर्म पेवर फिनिशर के अलावा अन्य किसी माध्यम का उपयोग हो रहा हो तो वह इसकी सूचना हमें ईमेल [email protected] पर अवश्य दें ताकि समय रहते विभागीय स्तर पर गुणवत्ता विहिन निर्माण को समय पर रोका जा सके।

नहीं मिली शिकायत
निर्माण गुणवत्ता को लेकर अधीनस्थ अभियंताओं की जिम्मेदारी तय हैं। अनुबंध के तहत संवेदक को निर्माण कार्य में जी-शिड्यूल और तकनीकी बीड में शामिल मशीनरी क्षमता को उपयोग लेना अनिवार्य है।
चंद्रमोहन राज माथुर, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी उदयपुर

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