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उदयपुर

सज्जनगढ़ में घडि़याल परिवार से आई खुशखबरी

बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के बाद यह पहला मौका है जब घडि़याल परिवार से खुश खबरी आई है।

उदयपुरJun 21, 2024 / 11:13 pm

Rudresh Sharma

घडियाल प्रजनन

उदयपुर का सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क घडि़याल की नई पीढ़ी से आबाद हुआ है। यहां पहली बार दो मादा घडि़याल ने अंडे दिए और अब उनसे बच्चे निकलना शुरू हो गए हैं। बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के बाद यह पहला मौका है जब घडि़याल परिवार से खुश खबरी आई है। यहां दस वर्ष से घडि़याल की आबादी नहीं बढ़ रही थी। ऐसे में वन विभाग की ओर से ब्रीडि़ंग के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया, जिसके बाद इनका प्रजनन शुरू हो पाया है। प्रदेश में पहली बार 2015 में उदयपुर में बायोलॉजिकल पार्क की शुरुआत हुई थी। उस समय जयपुर चिडि़याघर से यहां घडियाल लाए गए। इनमें से दो मादा और एक नर घडि़याल लम्बे समय से बायोलॉजिकल पार्क के पोण्ड में मौजूद हैं। लेकिन इतने लम्बे समय के बावजूद इनकी आबादी नहीं बढ़ रही थी। बायोलॉजिकल पार्क के डॉ. हिमांशु व्यास बताते हैं कि घडि़याल का प्राकृतिक रहवास नदियों में होता है। नदी किनारे रेती होती है और घडि़याल रेती में ही अंडे देते हैं। उसी अनुकूल वातावरण बायोलॉजिकल पार्क में तैयार किया गया। वन विभाग की ओर से पाेण्ड के किनारे रेती लाकर डलवाई गई। जिसके बाद पहली बार यहां घडि़याल का प्रजनन शुरू हो पाया। अंडे देने के बाद 60 से 90 दिन की अवधि में इनसे बच्चे निकलते हैं। जिसकी शुरुआत हो चुकी है। जिस जगह रेत डलवाई, वहां ऊपर घासपूस की झोपड़ी बनाई गई है। ताकि चिडि़या आदि की नजर अंडों पर नहीं पड़े और पक्षी उनका शिकार नहीं कर पाए।

नर्सरी में होगी खास देखभाल

घडि़याल के अंडों से करीब सप्ताहभर पहले बच्चे निकलना शुरू हुए हैं। अभी उन्हें माओं के साथ पोण्ड में ही रखा गया है। जब ये बच्चे तीन सप्ताह के हो जाएंगे तो इन्हें पूरी तरह चिकित्सकीय निगरानी के लिए नर्सरी में छोड़ा जाएगा। इनके लिए बायोलॉजिकल पार्क के पशु चिकित्सालय के पास ही नर्सरी बनवाई जा रही है।

लम्बे समय तक रखी निगरानी, तब किए इंतजाम

दस साल की लम्बी अवधि के दौरान प्रजनन नहीं होने पर घडि़यालय की गतिविधियों का विशेष रूप से अध्ययन किया गया। इस दौरान एक बार पाया गया कि एक बार पहले भी घडि़याल ने अंडे दिए थे, लेकिन किनारे की सतह अनुकूल नहीं होने से अंडे पानी में गिरकर नष्ट हो गए। फिर घडि़याल के प्राकृतिक रहवास की परििस्थति यों के समझते हुए, उसके अनुकूल वातावरण तैयार किया गया।

इनका कहना

सज्जनगढ़ जैविक उद्यान में प्रथम बार घड़ियाल का सफल प्रजनन हुआ है। सभी के बच्चे स्वस्थ हैं। तीन सप्ताह बाद उनको गहन चिकित्सकीय देखभाल के लिए नर्सरी में शिफ़्ट किया जाएगा। यहां अब तक शेर, भेड़िया, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, काला हिरण, चिंकारा, साम्भर, चीतल, एमु का सफल प्रजनन हो रहा है। यहां जन्मे बच्चों को बड़ा कर एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत देश के दूसरे चिड़ियाघर को देकर नए प्राणी लाए जा सकेंगे।

– देवेंद्र कुमार तिवारी, उपवन संरक्षक (वन्यजीव)

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