कोरोनाकाल में पसंद आया आंवला

दस साल से लगा रखा था बगीचा, अब बढ़ गई मांग

By: surendra rao

Published: 28 Feb 2021, 03:06 AM IST

मेनार. (उदयपुर).मार्च 2020 के बाद दुनिया भर में कहर बरपाने वाले कोरोना काल में दवा कारोबार भले ही ठंडा पड़ा हो, मगर आयुर्वेदिक औषधियों के कारोबार को जैसे पंख लग गए हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली आयुर्वेद औषधियों के रूप में आंवला ज्यूस , गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, दालचीनी आदि की खूब मांग बड़ी है। जिले के ग्रामीण इलाकों में भी ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आर्युवेदिक काढ़ा एवं अन्य औषधियों की बिक्री 60 से 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
10 बाद कोरोना काल ने बढ़ाया हौंसला : करीब 12 वर्ष पूर्व उदयपुर जिले के हिंता गांव निवासी किसान हेमराज भट्ट ने अपने खेतों पर आंवला का एक बगीचा तैयार किया था इस उम्मीद पर की इनके आंवला लगने के बाद इन्हें बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी होगी लेकिन हुआ उसके विपरीत आंवला के पौधे फल से लद गए लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नही था। ऐसे में आंवला पककर खेतो में गिरने लगे और सडऩे लगे। हजारों रुपये खर्च कर तैयार किये बगीचे से मन उठने लगा तो किसान हेमराज ने स्वयं ही आंवला से तैयार होने उत्पाद जैसे मुरब्बा , ज्यूस , केंडी आदि को तैयार कर बाजार में बेचना शुरू किया। शुरुआत में आवंला से ज्यूस , अचार, मुरब्बा , केंडी आदि चीजों का उत्पादन शुरू किया।
अब बढ़ी बिक्री : 10 साल बीत जाने के बावजूद भी उत्पाद की बिक्री उम्मीदों के अनुरूप नही हुई आमदनी से मजदूरों का खर्च जैसे तैसे निकल रहा था लेकिन 2020 मार्च के बाद कोरोना काल मे अचानक इन उत्पादों की मांग एक दम से बढ़ गई। ऐसे में व्यापार भी बढ़ गया है।

surendra rao Desk
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