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Hitendra death case: रशियन की मौत पर शव भेजा तो भारतीय की मौत पर क्यों नहीं भेज रहा रूस

Hitendra death case: रूसी राष्ट्रपति पुतिन के विरोध की बात पर सकते में आया रशियन दूतावास ने परिजनों से की वार्ता, हितेंद्र की बेटी बोली- 'आपका आदमी भारत में मरे और हम उसका शव नहीं भेजें तो कैसा लगेगा, भारतीय नागरिक का शव लाने के लिए नई दिल्ली में आंदोलन तीसरे दिन भी जारी

उदयपुर

Published: December 05, 2021 02:41:01 pm

Hitendra death case: उदयपुर. साढ़े चार माह से रूस में पड़े गोड़वा गांव के हितेंद्र गरासिया का शव भारत लाने को लेकर आंदोलन जारी है। हितेंद्र के परिजनों की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन करते हुए रशियन राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा का विरोध करने की घोषणा पर रशियन दूतावास के अधिकारी सकते में आ गए। परिजनों की ओर से पुतिन की यात्रा के दौरान ही आत्मदाह की चेतावनी दी गई थी।
Hitendra death case: रशियन की मौत पर शव भेजा तो भारतीय की मौत पर क्यों नहीं भेज रहा रूस
Hitendra death case: रशियन की मौत पर शव भेजा तो भारतीय की मौत पर क्यों नहीं भेज रहा रूस
हितेंद्र का शव लाने को लेकर आंदोलन के चलते रशियन अधिकारियों ने शनिवार को हितेंद्र के परिजनों से वार्ता की और शव भारत लाने को लेकर रूस में स्थित भारतीय दूतावास और रशियन सरकार से संपर्क किया। पीडि़त परिवार ने रशियन अधिकारियों के समक्ष आक्रोश जताया कि साढ़े चार माह बाद भी भारतीय नागरिक का शव अंतिम संस्कार के लिए भारत क्यों नहीं भेजा जा रहा। बातचीत के दौरान हितेंद्र की पत्नी आशा गरासिया, बेटी उर्वशी, पुत्र पीयूष, कांग्रेस प्रवासी सहायता प्रभारी चर्मेश शर्मा, नटवर गरासिया, मोहनलाल गरासिया, बूंदी के हारून खान मौजूद थे।
विरोध नहीं करने की अपील
रशियन दूतावास के अधिकारियों ने हितेंद्र के परिवार व सामाजिक कार्यकर्ताओं से नई दिल्ली में 6 दिसम्बर को प्रस्तावित रशियन राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा का विरोध नहीं करने की अपील की है। दूतावास के अधिकारियों ने परिजनों से हितेंद्र के केस की पूरी जानकारी ली। परिवार ने घटनाक्रम की जानकारी के साथ केस के दस्तावेज सौंपे।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन क्यों?

कांग्रेस प्रवासी सहायता प्रभारी चर्मेश शर्मा ने रशियन अधिकारियों को बताया कि इसी साल आगरा में रशियन नागरिक की मौत हुई थी, कुछ सालों पहले गोवा में भी रशियन महिलाओं की मौत हुई थी। उनके शव ससम्मान रूस भेजे गए थे। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए भारतीय नागरिक का शव क्यों नहीं भेजा गया।
रो पड़ी हितेंद्र की पत्नी, गुस्सा गई बेटी
रशियन अधिकारियों ने हितेंद्र की पत्नी आशा से बात की तो वह भावुक हो गई। बेटी उर्वशी ने अधिकारियों से कहा कि पिता का शव अंत्येष्टि के लिए भारत नहीं आया तो ठीक नहीं होंगे। उसने कह दिया कि किसी रशियन की भारत में मौत हो जाए, शव रूस नहीं भेजकर ईसाई मान्यता के विपरीत भारत में दाह संस्कार कर दें तो कैसा लगेगा।

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