देश की आजादी के क्रांतिवीरों का सम्मान

देश की आजादी के लिए हर हद से गुजरने वाले स्वतंत्रता सैनानियों का सम्मान बुधवार रात को किया गया

By: Manish Kumar Joshi

Published: 24 May 2018, 02:20 AM IST

- वीर रस के कवि सम्मेलन में याद किया शहीद बारहठ की वीरता को

उदयपुर . देश की आजादी के लिए हर हद से गुजरने वाले स्वतंत्रता सैनानियों का सम्मान बुधवार रात को किया गया। सम्मान समारोह में सम्मान प्राप्त करते हुए इनके परिजनों और वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। सम्मान समारोह में एेसे वीरों के परिजनों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

यह आयोजन अमर शहीद कुंवर प्रतापसिंह बारहठ रॉयल्स संस्थान एवं नगर निगम की ओर से कुंवर प्रतापसिंह बारहठ के शहादत शताब्दी समारोह के तहत बुधवार को टाउनहॉल प्रांगण में हुआ। दो चरणों में हुए समारोह के प्रथम चरण में सम्मान समारोह और दूसरे चरण में कवि सम्मेलन हुआ।
संस्थान की ओर से देश की आजादी के लिये शहीद हुए स्वतंत्रता सैनानियों क्रांतिकारी शचिन्दनाथ सान्याल, तात्यां टोपे, शिवराम हरि राजगुरु, भगतसिंह, जतिन्द्रनाथ दास, महावीरसिंह, बहादुरशाह जफर, बाबू गेनुसेर, सुखदेव,अशफाक उल्ला खां, विष्णु पिंगले, विनायक दामोदर सावरकर, जयदेव कपूर, चन्द्रशेखर आजाद, ठाकुर दुर्गासिंह गहलोत, बालगगंाधर तिलक, उधमसिंह, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशनसिंह, मंगल पाण्डे, रामकृष्ण खत्री, चापेकर बंधु, यशपाल, पं. दीनदयाल उपाध्याय, कप्तान फूलसिंह आईएनएस, रानी अंवतीबाई लोधी, सचिन्द्रनाथ बक्षी, सुखदेव, कानदास मेहडू, भोपालदान आढ़ा के परिजनों को प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया ने शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृतिचिह्न प्रदानकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पारस सिंघवी, प्रमोद सामर, रवीन्द्र श्रीमाली भी मौजूद थे।

इस अवसर पर गृहमंत्री ने कहा कि क्रांतिकारियों के परिजनों के सम्मान से मेवाड़ की यह धरा धन्य हो गई। उन्होंने कहा कि किताबों से क्रांतिकारियों की गाथा को हटा दिया गया है। यदि हमने इसे पुन: नहीं जोड़ा तो भावी पीढ़ी सिफ रोटी, कपड़ा और मकान तक ही सीमित रह जाएगी। इस अवसर पर महेन्द्र सिंह चारण द्वारा प्रतापसिंह बारहठ पर लिखित पुस्तक का अतिथियों ने विमोचन किया।
समारोह में सहयोगी के रूप में आकाश बागरेचा, तरुण मेहता, लक्ष्मीकांत वैष्णव, सत्येन्द्रसिंह आंसियंा को सम्मानित किया गया। संस्था से आयोजन मण्डल के शंकर सिंह छातोल, विष्णु प्रताप सिंह, हरेंद्र सिंह, सुनील सिंह कडिय़ा आदि भी मौजूद थे। अंत में संस्थान के संस्थापक हरेन्द्रसिंह सौदा ने आभार ज्ञापित किया। संचालन कैलाश ने किया।

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सरहद पर तो चले गए,पर वापिस लौट के न आये...
- देर रात तक चला कवि सम्मेलन

समारोह के दूसरे चरण में देर रात तक कवि सम्मेलन चला। इसमें कवियों ने वीर रस, हास्य रस, व्यंग्य आदि कविताएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों ने कुं. प्रतापसिंह बारहठ पर कई कविताएं सुनाई।
कवि सम्मेलन में कोटा के वीर रस के वरिष्ठ कवि जगदीश सोलंकी ने अपनी रचना हमने ऐसा जगाया है चेतन यहां, हमको शाही सलाखें झुका न सकी..., दूसरी रचना हमने जिन पर गीत लिखे, वो गीतों में न समा पाये, सरहद पर तो चले गए, पर वापिस लौट के न आये... रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की भरपूर दाद दी। हास्य कवि राजोत धार मप्र के कवि जानी बैरागी ने रचना मुझे इस बात का गम है, मेरा नाम बम है, मैं हर बार यूं ही छला गया हूं, बिस्मिल कर हाथ से निकला और हिजबुल के हाथ चला गया हूं...,वीर रस के कवि झालावाड़ के निशामुनि गौड़ ने अपनी रचना सूर मीरां कबीर जायसी रसखान की धरती, शहीदों की इबादत है, है हिंदुस्तान की धरती... पर ख्ूाब तालियां बटोरी, लाफ्टर फेम मावली के मनोज गुर्जर ने मान जनक का जो ना करता, सुत दागी हो जाता हैं, सच कहता हूं सुनो पाप का, वो भागी हो जाता हैं... पर श्रोता तालियंा बजाने से पीछे नहीं रहे, हास्य व्यंग के कवि अर्जुन अल्हड़ ने माना जरूरी है हंसना हंसाना, माना जरूरी है गमों में मुस्कराना, पर जिन्होंने आजादी के लिए जान दे दी, बहुत जरूरी है उनकी चिताओं पर श्रद्धा पुष्प चढ़ाना। उदयपुर के कवि सिद्धार्थ देवल ने जो मातृ भूमि हित मरता है वो मरकर मरा नही करता, सिंह केसरी का शावक भेड़ो से डरा नही करता है... ने श्रोताओं को जोश से भर दिया। सूत्रधार कवि बृजराज सिंह जगावत ने करोड़ो लोगों जहनों में कहानी क्या है, बयान जो करता है उन आंखों का पानी क्या है..., वीर रस के कवि भरोड़ी उदयपुर के कवि हिम्मत सिंह उज्ज्वल ने राजस्थानी में कुंवर प्रताप मां माणक जाया, उदियापुर में अवतरिया, महाराणा प्रताप जगत में, जाणे पाछा प्रकटिया... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

Manish Kumar Joshi Desk
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