हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कितनी असरकारक, फिर होगा परीक्षण

- चिकित्साकर्मियों से लेकर संक्रमित मरीजों को दी जा रही है दवा

By: bhuvanesh pandya

Updated: 05 Jun 2020, 01:20 PM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. जो दवा जिले से लेकर पूरे प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों और चिकित्साकर्मियों को दी जा रही है, वो कोरोना संक्रमण के दौरान असरकारक है भी या नहीं, इसे लेकर आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) फिर से परीक्षण करेगा।

वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से कोविड-19 को लेकर एंटी मलेरिया ड्रग, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का परीक्षण फिर से शुरू करने के लिए कहा है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 के प्रायोगिक उपचार में मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के वैश्विक परीक्षण पर अस्थाई रूप से रोक लगाई थी। इसके बाद कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि डब्ल्यूएचओ के फैसले के बाद देश के अस्पतालों को कोविड-19 मरीजों के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, एचसीक्यू और क्लोरोक्वीन का उपयोग बंद करना होगा, जबकि वैश्विक स्वास्थ्य संस्था के फैसले का की पालना भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। आईसीएमआर के अनुसार कोविड-19 एक ऐसा वायरस है, जिसके बारे में जानकारी धीरे-धीरे सामने आ रही है। एेसे में ये पता नहीं चल रहा कि कौन-सी दवा काम कर रही है और कौन-सी नहीं। कई दवाएं कोविड-19 के इस्तेमाल के लिए निर्धारित की जा रही हैं, चाहे वह इससे बचाव के लिए हों या इलाज के लिए हों।
गत 25 मई को डब्ल्यूएचओ महानिदेशक टेड्रोस एडनोम गेब्रेयेसस ने कहा था कि लांसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ले रहे लोगों को मृत्यु और हृदय संबंधी समस्याओं का अधिक खतरा है। इसे देखते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के वैश्विक चिकित्सकीय परीक्षण, क्लीनिकल ट्रायल पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी। डब्ल्यूएचओ ने विशेषज्ञों को अब तक उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने की जरूरत बताई दुनियाभर में देशों ने कोविड-१9 रोगियों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल की संभावना तलाशी है। ऐसे में मई के शुरुआती हफ्तों में कई विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यह कोई चमत्कार वाली दवा नहीं बल्कि कई मामलों में यह घातक भी हो सकती है। कोविड-१९ की समस्या बढऩे पर अमरीका सहित कई देशों ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर निर्भर होना शुरू कर दिया, वहीं भारत इस दवा का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और उसने अमरीका, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे देशों को इसकी बड़ी मात्रा में आपूर्ति की है। इस मलेरिया रोधी दवा को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचूक दवा होने का दावा करने के बीच ट्रंप प्रशासन ने काफ ी मात्रा में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की गोलियां जुटा ली हैं, जबकि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन, एफ डीए ने इस दवा के दुष्प्रभावों के बारे में एडवाइजरी भी जारी की।

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कोई प्रमुख दुष्प्रभाव नहीं: आईसीएमआर

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, आईसीएमआर ने गत 26 मई को कहा था कि भारत में हुए अध्ययनों में मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एचसीक्यू का कोई प्रमुख दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। इसका प्रयोग कोविड-19 के एहतियाती इलाज में सख्त चिकित्सा पर्यवेक्षण में जारी रखा जा सकता है। आईसीएमआर का यह बयान ऐसे समय आया था, जब डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कोविड-19 के संभावित इलाज के लिए चल रहे एक वैश्विक औषधि परीक्षण से सुरक्षा संबंधी चिंता के मद्देनजर वह अस्थाई रूप से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को हटाया जाएगा।
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इनका कहना
केन्द्र सरकार ने रिवाइज एडवाइजरी जारी की है। इसमें कन्फर्म पॉजिटिव केस है, उन्हें और सम्पर्क में रहे लोगों को यह दवा दी जाएगी। लेकिन २३ मई को जारी गाइडलाइन के अनुसार जो हाईपर सेंसेटिव है, जिन्हें एलर्जी है, जिन्हें पहले से ही हृदय से जुड़ी बीमारी है तो वह भी ये दवा नहीं ले सकंेगे। आंखों की रिटाइनोपैथी वालों को और १५ वर्ष से नीचे के बच्चों को, जी ६ पीडी एंजाइम कम होने पर ये दवा नहीं दी जाएगी। एडवाइजरी जारी करने के बाद इससे जुड़ी सभी एडवाइजरी वापस ले ली है।

डॉ. रमेश जोशी, उपाधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल

bhuvanesh pandya Reporting
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