scripthuman interest story: Woman Gives Birth To Baby Girl In Train | 12 साल भटकी, ट्रेन में प्रसव भी हुआ, 5 साल राजस्थान में रहने के बाद घर वापसी | Patrika News

12 साल भटकी, ट्रेन में प्रसव भी हुआ, 5 साल राजस्थान में रहने के बाद घर वापसी

नादानी में 12 साल पहले घर छोड़ निकली वह। जिसके साथ गई वह चल बसा। आखिर किसी और का सहारा लिया, लेकिन सभी दगाबाज निकले।

उदयपुर

Updated: April 23, 2022 10:46:35 am

नादानी में 12 साल पहले घर छोड़ निकली वह। जिसके साथ गई वह चल बसा। आखिर किसी और का सहारा लिया, लेकिन सभी दगाबाज निकले। एक बच्चा गोद में था और दूसरा प्रसव उदयपुर पहुंचते-पहुंचते ट्रेन में हुआ। उसे उदयपुर में एक संस्था का सहारा मिला। जहां पांच साल गुजारे। संस्था का आखिरी प्रयास रंग लाया और लाचार महिला की पुन: घर वापसी हो पाई।

be-careful-while-booking-train-tickets-in-holi.jpg

झकझोर देने वाली यह कहानी है जलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल की महिला की। वह बीते 5 साल से उदयपुर के स्वाधार गृह सेवा मंदिर में रह रही थी। उसे जब संस्था में लाया गया था तब साथ में एक डेढ़ साल की बच्ची और पांच दिन की एक बच्ची थी। छोटी बच्ची का जन्म भी ट्रेन में ही हुआ था।

ट्रेन के उदयपुर पहुंचने पर उसे एम्बुलेंस से हॉस्पिटल भेज दिया गया, जहां से पांच दिन बाद उसे स्वाधारगृह संस्था के सुपुर्द किया गया। उसे संस्था में लाया गया तब वह अपने बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थी। वजह यह कि पश्चिम बंगाल के आदिवासी क्षेत्र की रहने वाली महिला हिंदी नहीं जानती थी। उसकी भाषा साकरी जनजाति थी, लिहाजा वह अपने बारे में कुछ भी नहीं बता पाई।

'चाय बागान' से मिली कड़ी
जिला प्रशासन और महिला अधिकारिता के निर्देश पर वन स्टॉप केन्द्र की ओर से पुन: प्रयास हुए। केन्द्र प्रबन्धक किरण पटेल ने बताया कि महिला अपना नाम और चाय बागान ही बता पा रही थी। उसने कुछ शब्द कागज पर लिखे। वह कागज मेदिनीपुर जिला पुलिस को भेजे गए। आखिर सभी के प्रयास से परिवार से संपर्क हुआ। वीडियो कॉल से महिला को परिवार से रूबरू कराया तो आंसू छलक उठे।

यादें छोड़ गई वह, छलके खुशी के आंसू
एडीएम प्रशासन, महिला अधिकारिता उपनिदेशक, वन स्टॉप केन्द्र के कार्मिकों ने कलक्ट्रेट से महिला को रवाना किया। उसे लेने के लिए परिवारजनों के साथ ही वहां के पुलिसकर्मी भी आए थे। इससे पहले स्वाधारगृह से निकलने पर यहां रह रही अन्य महिलाओं की आंखें छलक पड़ी।

महिला उदयपुर में स्वाधार गृह आश्रम लाई गई, तब उसके साथ दो बच्चे थे। केन्द्र की ओर से बंगाली भाषा जानकार से भी काउसंलिंग कराई गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। उसे पश्चिम बंगाल के आश्रय स्थल में शिफ्ट करने के प्रयास कर रहे थे, लेकिन लगातार देरी होती गई। आखिर अब सफलता मिलने पर घर भेजा।
निशा, अल्पावास प्रभारी, स्वाधार गृह

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

बुध जल्द वृषभ राशि में होंगे मार्गी, इन 4 राशियों के लिए बेहद शुभ समय, बनेगा हर कामज्योतिष: रूठे हुए भाग्य का फिर से पाना है साथ तो करें ये 3 आसन से कामजून का महीना किन 4 राशियों की चमकाएगा किस्मत और धन-धान्य के खोलेगा मार्ग, जानेंमान्यता- इस एक मंत्र के हर अक्षर में छुपा है ऐश्वर्य, समृद्धि और निरोगी काया प्राप्ति का राजराजस्थान में देर रात उत्पात मचा सकता है अंधड़, ओलावृष्टि की भी संभावनाVeer Mahan जिसनें WWE में मचा दिया है कोहराम, क्या बनेंगे भारत के तीसरे WWE चैंपियनफटाफट बनवा लीजिए घर, कम हो गए सरिया के दाम, जानिए बिल्डिंग मटेरियल के नए रेटशादी के 3 दिन बाद तक दूल्हा-दुल्हन नहीं जा सकते टॉयलेट! वजह जानकर हैरान हो जाएंगे आप

बड़ी खबरें

'तमिल को भी हिंदी की तरह मिले समान अधिकार', CM स्टालिन की अपील के बाद PM मोदी ने दिया जवाबहिन्दी VS साऊथ की डिबेट पर कमल हासन ने रखी अपनी राय, कहा - 'हम अलग भाषा बोलते हैं लेकिन एक हैं'Asia Cup में भारत ने इंडोनेशिया को 16-0 से रौंदा, पाकिस्तान का सपना चूर-चूर करते हुए दिया डबल झटकाअजमेर की ख्वाजा साहब की दरगाह में हिन्दू प्रतीक चिन्ह होने का दावा, पुलिस जाप्ता तैनातबोरवेल में गिरा 12 साल का बालक : माधाराम के देशी जुगाड़ से मिली सफलता, प्रशासन ने थपथपाई पीठममता बनर्जी का बड़ा फैसला, अब राज्यपाल की जगह सीएम होंगी विश्वविद्यालयों की चांसलरयासीन मलिक के समर्थन में खालिस्तानी आतंकी ने अमरनाथ यात्रा को रोकने की दी धमकीलगातार दूसरी बार हैदराबाद पहुंचे PM मोदी से नहीं मिले तेलंगाना CM केसीआर
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.