Watch : 14 वर्षो से जंजीरों में जकड़ा है शख्स, दो साल पहले माता-पिता भी चल बसे

Bhagwati Teli

Publish: Jun, 24 2019 08:42:54 PM (IST)

Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

शुभम् कड़ेला/मावली. यूं तो सरकार के द्वारा कई विकास कार्यो एवं जनकल्याणकारी योजनाओं govt schemes की आमतौर पर बात की जाती है। मगर जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं एवं सुविधाओं की पहुंच कहां तक है, यह ग्रामीण क्षेत्रों में ही जाने पर पता चलती है। मावली उपखण्ड मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित साकरोदा गांव में लगभग 14 वर्षो Life से एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक Mental Illness जंजीरों में जकड़ा हुआ है। विगत 14 वर्षों में कई जन प्रतिनिधि यहां आए और गए। लेकिन, इस गांव के युवक की आज तक किसी ने सूध तक नहीं ली। यहां तक की स्थानीय स्तर पर प्रशासन को इस संबंध human value में कोई जानकारी नहीं है। इसके चलते मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं से महरूम है।

जानकारी के अनुसार साकरोदा गांव के हवाला बस्ती जिसे स्थानीय रूप से मेघवाल बस्ती कहा जाता है, का रहने वाला पन्नालाल पिता नानालाल मेघवाल उम्र 28 वर्ष की दिमागी हालत सहीं नहीं होने के कारण मजबूरन परिजनों को उसे जंजीरों में बांधना पड़ रहा है और लगभग 14 वर्षो से उसका जीवन जंजीरों में ही जकड़ा है। पन्नालाल परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब होने के कारण उसका पूर्ण उपचार नहीं हो पाया है। साथ ही वर्तमान में सरकार द्वारा पन्नालाल को कोई सुविधा एवं राशन नहीं मिलने से परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड रहा है।

2 वर्षो में माता-पिता ने भी छोडा साथ

मेघवाल बस्ती का पन्नालाल सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं से तो वर्षो से वंचित था ही, मगर विगत 2 वर्षो में उसका पालन-पोषण करते माता-पिता ने उसका साथ छोड़ दिया तथा अन्तिम सांसे ले ली। पन्नालाल की देखभाल एवं पालन-पोषण उसकी माता एवं पिता द्वारा ही किया जाता था। मगर, वर्ष 2017 में माता नोजी बाई की आकस्मिक मृत्यु हो गई। बेटे की मानसिक विक्षिप्तावस्था एवं पत्नी की मृत्यु के बाद पिता नानालाल भी पूरी तरह टूट गया। पिता नानालाल ने भी वर्ष 2018 में पन्नालाल की सेवा करते करते दम तोड़ दिया।

अन्तिम बार देखने गया गवरी

परिवार के लक्ष्मण मेघवाल ने बताया कि उसका काका पन्नालाल का जन्म वर्ष 1991 में हुआ था। धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य चल रहा था। पन्नालाल पढाई में भी काफी होशियार था। उसने आठवीं कक्षा भी उत्तीर्ण की। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते उसे मजबूरन पढाई छोडनी पड़ी। वर्ष 2005 में एक दिन पन्नालाल मावली क्षेत्र के गांव फलीचड़ा में गवरी मंचन देखने गया। मगर देर शाम होने के बावजूद वह घर नहीं आया। परिजनों को काफी चिंता हो गई तथा उन्होनें काफी ढुंढने का प्रयास भी किया। मगर कुछ पता नहीं चला। इसके बाद देर रात्रि करीब 1 बजे पन्नालाल घर पहुंचा। घर पर पन्नालाल का व्यवहार कुछ बदला बदला सा नजर आया, परन्तु सभी ने नजरान्दाज कर दिया। तत्पश्चात् एक दिन बाद ही पन्नालाल घर से वापस निकल गया। जिसका कई दिनों तक कुछ पता नहीं चला। परिजन भी काफी चिन्तित हो गयें और तीन दिन बाद स्वयं पन्नालाल घर पहुंच गया। पन्नालाल की दिमागी हालत सहीं नहीं होने एवं बार-बार घर से चले जाने पर मजबूरन परिवारजनों ने उसे जंजीरों में जकड दिया। जो अब 14 वर्षो से जंजीरों में जकड़ा हुआ है।

 

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भाईयों के द्वारा किया जा रहीं पन्नालाल की देखरेख

पन्नालाल के पिता एवं माता की मृत्यु के पश्चात् पन्नालाल की सारी जिम्मेदारियां उसके बड़े भाईयों पर आ गई। वर्तमान में मानसिक रूप से विक्षिप्त पन्नालाल की देखरेख उसके बड़े भाई गोपीलाल एवं दूदाराम के परिवार द्वारा की जा रहीं है। दोनों भाईयों द्वारा प्रातरूकाल में पन्नालाल को बाहर दैनिक निवृति हेतु ले जाया जाता है तथा पुनरू बांध दिया जाता है। इसके साथ देखरेख हेतु सभी स्थानीय प्रबंध परिवार द्वारा किये गयें है। एक या 2 सप्ताह में उसे नहलाया भी जाता है। साथ ही बाल कटिंग इत्यादि देखरेख सम्बंधी कार्य भाईयों द्वारा किये जा रहे है।

परिवार की आर्थिक स्थिति है काफी खराब

जानकारी के अनुसार पन्नालाल के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। पन्नालाल के बडे भाई गोपीलाल के परिवार में कुल 6 सदस्य है। जिसमें गोपीलाल, उसकी पत्नी, 3 पुत्र, एक पुत्री एवं एक पुत्रवधु भी है। पन्नालाल का दूसरे भाई दूदाराम के परिवार में 6 सदस्य है। जिसमें दूदाराम, उसकी पत्नी, 2 पुत्र एवं 2 पुत्रियां है। दोनों भाईयों द्वारा अपने परिवार के पालन पोषण के साथ साथ अपने भाई पन्नालाल की भी देखरेख एवं पालन पोषण करना पड रहा है। पन्नालाल का एक भाई मोटर वाईन्डिंग का कार्य तो दूसरा भाई मकान निर्माण कार्य में कारीगरी कर अपने परिवार का गुजर-बसर करते है। इस बीच दोनों भाई को अपने परिवार के साथ पन्नालाल की भी अतिरिक्त देखरेख करनी पड रहीं है। जिससे ेआर्थिक स्थिति खराब होने के चलते परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है।

जंजीरों में बांधना हैै मजबूरी

पन्नालाल के परिवार जनों का कहना हैै कि वह पन्नालाल को जंजीरों से नहीं बांधना चाहते है, परन्तु परिस्थिति अनुसार उसे जंजीरों में बंाधना मजबूरी बना हुआ है। पूर्व में उसे घर में खुला ही रखा जाता था तथा जंजीरों से नहीं बंाधा जाता था। परन्तु इस दौरान वह घर से बाहर निकल जाता तथा गांव की दुकानों पर जाकर सामान लेकर आ जाता था। साथ ही कई बार वह घण्टों घर नहीं पहुंचता था। जिस पर परिवारजनों ने उसकी सुरक्षा के चलते उसे जंजीरों में बांधना ही उचित समझा।


बीपीएल कार्ड में होने के बावजूद नहीं मिल रहा राशन

मानसिक रूप से विक्षिप्त पन्नालाल का बीपीएल योजना के तहत राशन कार्ड भी बना हुआ है। जिसमें उसके पिता नानालाल एवं माता नोजी बाई का नाम अंकित है। वर्तमान में पन्नालाल को सरकार की इस महत्वांकाक्षी योजना का भी लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में पोश मशीन पर अंगुठा लगाने पर ही राशन के गेहूं एवं अन्य खाद्यान्न मिलता है। मगर, मानसिक रूप से विक्षिप्त पन्नालाल जंजीरों में जकड़ा हुआ है। जिस कारण वह अंगुठा लगाकर राशन नहीं ले सकता है। इस कारण उसका राशन कार्ड में नाम होने के बावजूद उसे इस सुविधा से लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही पन्नालाल का आधार कार्ड एवं मतदाता पहचान पत्र भी बना हुआ है। मगर, इससे भी उसे कुछ लाभ प्राप्त नहीं हुआ।

परिवारजनों ने खूब किये जतन, अब मजबूर

परिवार के गोपीलाल ने बताया कि पन्नालाल के उपचार में परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। परन्तु आर्थिक स्थिति के कमजोर होने के चलने सभी उम्मीदें एवं आकांक्षाऐं धरी की धरी रह गई। पन्नालाल की मानसिक स्थिति खराब होने पर परिवार ने उदयपुर स्थित महाराणा भोपाल चिकित्सालय में भी दिखाया। साथ ही कई सप्ताह उसका उपचार भी किया गया। मगर, काफी रूपये लगाने के बावजूद पन्नालाल की स्थिति में कुछ सुधार नहीं होने पर परिवार की उम्मीदे टूट गई। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उसका उपचार वहीं रूक गया। इधर, सरकार एवं प्रशासन द्वारा भी कोई मदद नहीं मिलने के कारण मजबूर होकर परिवारजनों ने उसे जंजीरों में जकड़ दिया।

सरकार से कोई नहीं मिली मदद, न्याय एवं मदद की गुहार

पन्नालाल की जिंदगी के 14 वर्ष जंजीरों में ही कट चुके है। लेकिन आज भी सरकार एवं प्रशासन ने इसकी सूध नहीं ली है। सरकार की किसी भी योजना से पन्नालाल को लाभ नहीं मिल रहा है। जिसके चलते परिवार को आर्थिक समस्या के चलते काफी परेशानी हो रहीं है। पन्नालाल के परिवार ने सरकार एवं प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है तथा आज भी परिवार को सरकार एवं प्रशासन से मदद की अपेक्षा की है।

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