मार्च निकल जाए तो बच सकते हैं स्वाइन फ्लू से- उदयपुर में अब तक इस वर्ष केवल एक मामला

- इधर, उदयपुर को डंक मार रहा 'मलेरियाÓ- मलेरिया के इंतजाम नाकाफी, बिगड़ सकते हैं हालात

By: bhuvanesh pandya

Published: 12 Feb 2020, 11:25 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. सर्दी आखिरी दौर में चल रही है, इस बार गनीमत रही कि पिछले साल की तरह स्वाइन फ्लू ने लगातार लोगों पर अटैक नहीं किया। साल की शुरुआत में केवल एक ही मामला उदयपुर जिले में सामने आया है, वहीं प्रदेश में कुल 13 केस मिले हैं। चिकित्सकों की माने तो पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि जब सर्दी में स्वाइन फ्लू गतिशील नहीं होता है तो गर्मियों में इसका असर नजर आता है, लेकिन इसके साथ ही उदयपुर जिले में आमतौर पर दिसम्बर से मार्च माह तक यानी चार माह ज्यादा गंभीर रहना होता है, क्योंकि यहां इन महीनों में ही स्वाइन फ्लू का अटैक होता है। हालांकि मलेरिया का प्रकोप उदयपुर पर सर्वाधिक है। यहां पीवी और पीएफ के प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

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इन जिलों में सामने आए स्वाइन फ्लू के रोगीराज्य में कुल 1093 नमूनों की जांच की गई, इनमें से 13 पॉजिटिव मिले, जबकि 1080 नेगेटिव पाए गए। खास बात ये कि इस बार वर्ष की शुरुआत में एक भी मरीज स्वाइन फ्लू की भेंट नहीं चढ़ा। इसी प्रकार उदयपुर जिले में 22 नमूनों की जांच की गई है तो इनमें से 21 मामले नेगेटिव मिले। (1 जनवरी से 7 फरवरी तक के अंाकड़े)जयपुर- 09टोंक- 01जोधपुर - 01कोटा- 01उदयपुर- 01

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डेंगू का घेरा खतरनाकमौसमी बीमारियों की बात की जाए तो मच्छरों का आतंक जनवरी से ही नजर आने लगा है। इसमें राज्य के सभी जिलों में 140 मामले इन 34 दिनों में मिले हैं। उदयपुर जिले में 12 मरीज डेंगू के सामने आए हैं। अन्य जिलों की बात करें तो जयपुर 38, बाड़मेर 17, बीकानेर 20, दौसा में 5 और चूरू, कोटा, करौली में 4-4 मामले मिले हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी इक्का-दुक्का केस सामने आए हैं।----फिर आया चिकनगुनियाअर्से से गायब चिकनगुनिया फिर से नजर आया है। फिलहाल प्रदेश में जनवरी में 13 मामले मिले हैं, लेकिन इसका खतरा बरकरार है। उदयपुर में इसके दो केस मिले हैं, जबकि जयपुर-नागौर में 4-4, भरतपुर, धौलपुर, गंगानगर में 1-1 मरीज पाया गया है।

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गर्मी से पहले ही असर: सर्वाधिक प्रभाव उदयपुर मेंगर्मी आने वाली है, लेकिन अब तक चिकित्सा विभाग नहीं चेता है। आधा फरवरी निकल गया है, लेकिन अब तक विभाग ने मलेरिया से बचाव को लेकर तैयारी शुरू नहीं की है, जबकि जनवरी से अब तक राज्य में 26 मामले पीवी और 20 मामले पीएफ के मिले हैं। यदि मच्छरों के अंडे बनने से पहले ही इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है। खास तौर पर पूरे प्रदेश में सर्वाधिक मरीज उदयपुर में सामने आए हैं। कुल पीएफ के 20 में से 19 मरीज उदयपुर जिले के हैं, जबकि एक मरीज कोटा में मिला है। दूसरी ओर पीवी भी अपने ही जिले में सर्वाधिक है, इसमें कुल 26 में से 20 मरीज मिले हैं, वहीं हनुमानगढ़ और जैसलमेर में 2-2, चूरू और कोटा में 1-1 मरीज सामने आए हैं

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मौसमी बीमारियों के बचाव को लेकर जिलेभर में सतर्कता के निर्देश दिए हैं। मलेरिया को लेकर जो उपाय किए जाते हैं, वे शुरू कर दिए हैं। गर्मी की दस्तक पर तेजकर दिए जाएंगे।

डॉ. दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ, उदयपुर

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आमतौर पर हमारे यहां स्वाइन फ्लू दिसम्बर से मार्च तक चार माह में ज्यादा घात करता है। यदि ये महीने बच गए तो इस बार लगता है, स्वाइन फ्लू का प्रभाव कम ही रहेगा। बस जरूरत बचे दो माह संभालने की और सतर्क रहने की।

डॉ. महेश दवे, वरिष्ठ फिजिशियन, एमबी हॉस्पिटल

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