PATRIKA STING: यहां सर्द अंधेरी रात में हो रहा खून का गाेेेरखधंधा, खून के सौदागरों का ये गंदा सच देख‍िए video में

Sushil Kumar Singh

Publish: Jan, 12 2018 02:49:41 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India

संभाग के सबसे बड़े चिकित्सालयों में खून का गोरखधंधा, महिला संविदा कर्मचारी से लेकर गिरोह विशेष में सक्रिय युवा,एम्बुलेंस से आते हैं खून के सौदागर

सुशीलकुमार स‍िंह/ मो. इल‍ियास उदयपुर . सर्द रात का सन्नाटा। अलाव तापते हुए बाहर बैठे कुछ लोग। वार्ड से गूंजती नवजातों की किलकारियां और गलियारों में अपनों की सलामती के लिए सुबह का इंतजार करते परिजन। इसी सूनी रात में जनाना अस्पताल में मौत से जूझती चिखती हुई प्रसूता। उसकी जिंदगी को बचाने के लिए एक यूनिट रक्त की जरूरत जैसे ही खून के सौदागरों के कानों में पड़ी तो वे पीडि़ता के पति को उठाकर एक कोने में ले गए। बस! फिर क्या था, मानवता को ताक में रख सौदागरों ने दु:खी पति से 5 हजार में आसानी से एक यूनिट रक्त देने का वायदा किया। सौदा पटा, लेकिन रुपयों की व्यवस्था नहीं होने पर जुगाड़खोरों ने उसके एक रिश्तेदार को बंधक बना डाला। तभी पत्रिका टीम की मौजूदगी देख सौदागरों ने पाला बदला और पति के पास मौजूद एक हजार रुपए लेकर भाग निकले।

यह दर्द है लसाडि़या विधानसभा क्षेत्र के माना गुड़ा निवासी गरीब आदिवासी परिवार के हरीश मीणा पुत्र सांवरलाल की, जो गर्भवती पत्नी लीला की जिंदगी को बचाने के लिए बुधवार शाम संभाग के सबसे बड़े पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय (जनाना) पहुंचा। रात करीब 10 बजे गर्भवती ने एक बच्ची को जन्म दिया। अधिक ब्लीडिंग के बीच चिकित्सकों ने प्रसूता को अनिवार्य ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता बताई। यह बात वार्ड में मौजूद संविदा महिला कर्मचारी ने बाहर बैठे खून के सौदागरों को इशारे में बताई। ब्लड बैंक जाने से पहले ही युवा सौदागरों ने झांसे हरीश को घेरे में लिया और केवल 5 हजार रुपए में ब्लड की व्यवस्था कराने को कहा। सौदेबाजी में ईमानदारी दिखाने के लिए सौदागरों ने रक्त यूनिट उपलब्ध करा दी, लेकिन रुपए लेकर आने तक हरीश के काका को बंधक बनाकर निजी वाहन में बिठा लिया। काका के बंधक होने और युवक के अंधेरे में छिपे होने की सूचना पर पत्रिका टीम भी मौके पर पहुंची और सबूत के लिए पीडि़त हरीश के साथ जाकर सौदागरों को एक हजार रुपए दिलाए। बाकी रुपए बाद में देने को कहा, लेकिन पत्रिका टीम की उपस्थिति भांपते हुए सौदागरों में शामिल संविदा महिला सफाई कर्मचारी सहित पूरी टोली एक एम्बूलेंस में बैठकर भाग निकली। लंबे समय से सक्रिय महाराणा भूपाल और जनाना चिकित्सालय में खून का यह गोरखधंधा सालों से चल रहा है।

 

 

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पीडि़त हरीश ने पत्रिका टीम को बताया कि वह रात के समय पत्नी की जरूरत के लिए रक्त की तलाश में गया था। तभी बाहर बैठे कुछ लोगों ने उसे 29 नंबर वार्ड में भेजा। वहां लंबा और दाढ़ी वाला युवक आया। उसने पीडि़त हरीश को जनाना के सामने फोटोकॉपी की दुकान के बाहर बैठने को कहा। तभी कुछ देर बाद पीडि़त हरीश के पास एक एम्बुलेंस पहुंची। तभी दाढ़ी वाले युवा के फोन पर मोटा सा युवक भी फोटोकॉपी की दुकान तक पहुंचा। युवक ने आते ही पूछा कि रुपए की बातचीत हो गई क्या, जवाब में हरीश ने मना किया। युवक ने बिना देर लगाए 5 हजार रुपए मांगें। हरीश का कहना है कि खून की जरूरत के लिए उसने बिना देर लगाए हां कर दी। सौदागरों ने उसे एक बोतल खून दिया है और उसके रुपए देने बाकी हैं। देर रात पत्रिका टीम आरोपितों एवं खून के गोरखधंधे में लिप्त लोगों का खुलासा करने के लिए पत्रिका टीम भी रात करीब 11.15 बजे चिकित्सालय पहुंची और रात करीब 12.45 बजे तक खून के सौदागरों के साथ बोगस ग्राहक बनकर घूमती रही। यूनिट उपलब्ध कराने के बाद रक्त की कीमत वसूलने के लिए सौदागर पीडि़त हरीश को तलाशते रहे। बाद में पत्रिका टीम के ढंाढस बंधाने पर अंधेरे में छिपा हरीश बाहर आया और सौदागर टोली में शामिल दाढ़ी वाले युवक तक पहुंचा।

 

युवक ने एक हजार रुपए दे रहे हरीश की कॉलर पकड़ ली। तभी पत्रिका टीम के साथी ने गरीबी की दुहाई देते हुए एक हजार रुपए उसकी ओर से देने का आश्वासन दिया। जैसे-तैसे हरीश को सुरक्षित करने के बाद बाहर आए सौदागरों ने पत्रिका टीम को पहचान लिया और यह देख महिला संविदा कर्मचारी सहित करीब ४ युवाओं की टोली एक रोगी वाहन में भाग ली। इससे पहले दाढ़ीवाला युवक दुहाई देने से नहीं चूका...बोला अकेला यह काम नहीं करता उसके साथ और लोग भी हैं। खेल डोनर कार्ड का पड़ताल में सामने आया कि खेल के सौदागर च्वोलेन्टर ब्लड डॉनर कार्डज् का इस्तेमाल कर झांसे का यह खेल करते हैं। शिविर या अन्य माध्यमों पर रक्तदान के बदले इस कार्ड का उपयोग रक्त को बेचने में होता है। इससे ब्लड बैंक के कर्मचारी भी अवगत हैं, लेकिन उनकी ओर से हर बार की तरह इस बार में अनभिज्ञता जताई गई। धमकी का खेल सौदागरों में शामिल महिला कर्मचारी गोरखधंधे में बाधा पैदा करने वाले लोगों की पुलिस अधिकारियों से झूठी शिकायतें करने से बाज नहीं आती। टीम के कुछ युवा च्जातिगत प्रताडऩाज् जैसी झूठी शिकायतें करने की धमकी देते हैं। पुलिस की मुसीबत बढ़ती देख आम आदमी चुप हो जाता है। सच यह भी है कि एमबी हॉस्पिटल चौकी के जवानों से यह सौदागर छिपे हुए भी नहीं हैं, लेकिन शिकायत के अभाव में यह भी अनदेखी करते हैं।

गंभीर है मामला

यह चिंताजनक विषय है। इस बारे में हाथीपोल थाने के अलावा जिला पुलिस अधीक्षक से विशेष पुलिस के जवान मांगकर उचित कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। गरीब और जरूरतमंद से ठगी किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।

डॉ. विनय जोशी,एमबी हॉस्पिटल, उदयपुर

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