प्रदेश में नकली दवा की जांच रिपोर्ट आती है मौत के बाद !

- औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएं तैयार नहीं होने से दवाइयों की जांच लम्बित
- दवा माफिया बेखौफ, हर जिले में सामने आ रही है सब स्टैडर्ड दवाइयां

भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर. राजस्थान में नकली दवाइयों की जांच रिपोर्ट आती है किसी की मौत के बाद। चौकिएं मत। ये हकीकत है, क्योंकि यहां जांच के लिए नमूने तो हैं, लेकिन इतने उपकरण नहीं कि इन दवाइयों की जांच की जा सके। प्रदेश में जरूरत के मुताबिक प्रयोगशालाएं भी नहीं है। हालांकि उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर में प्रयोगशालाओं के भवन तो खडे़ हो गए, लेकिन सरकार इन्हें शुरू नहीं कर पाई है, जिससे साढे़ चार हजार से अधिक नमूनों की जांच लम्बित है। वह भी एेसे में जब प्रदेश के विभिन्न जिलों में नकली दवाइयां मिल रही है। अब तक अकेले उदयपुर में २६ मामले नकली दवाओं के सामने आ चुके हैं।

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एकमात्र जयपुर में है प्रयोगशाला

प्रदेश में अधिकारी दवाओं के नमूने तो ले रहे हैं, लेकिन उनकी जांच के लिए माकूल व्यवस्था नहीं है। केवल जयपुर में एक मात्र औषधि परीक्षण प्रयोगशाला होने के कारण कई मामले वर्षों से लम्बित पड़े हैं।
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यह है स्थिति
राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2012-13 में नवीन औषधि परीक्षण प्रयोगशाला जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में स्थापित की जानी थी, लेकिन कई वर्षों बाद इनके भवन तो खडे़ हो गए, लेकिन प्रयोगशालाओं में उपकरण नहीं खरीदे गए हैं। साथ ही माकूल स्टाफ भी नहीं है।

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राज्य में औषधि नियंत्रण संगठन के विभिन्न जिला कार्यालयों में गत पांच वर्षों में उठाए गए औषधियों के नमूनों में से निम्नानुसार दवा नमूनों की जांच प्रकरण लम्बित है।

अवधि - लम्बित प्रकरणों की संख्या
वर्ष २०१४- ०

वर्ष २०१५- 5
वर्ष २०१६- 229

वर्ष २०१७- 1115
वर्ष २०१८- 3142

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कुल ४४९१ मामले

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अकेले उदयपुर में २६ मामले आ चुके है नकली दवाइयों के ...

दवा की जांच की जरूरत इसलिए है, क्योंकि बाजार में नकली दवाइयां आने की संभावनाएं बढ़ जाती है। कानून के डर से नकली दवाइयां बाजार में सप्लाई नहीं होती है। खास बात यह है कि उदयपुर में अब तक तय मापदण्डों के विरुद्ध बिकने वाली दवाइयों के अभी तक कुल २६ मामले सामने आ चुके हैं, यानी २६ मामले नकली या सब स्टेडर्ड दवाओं के हैं। इसमें मामला दर्ज होता है। गंभीर अवमानना पर सरकार इसके लिए स्वीकृति देती है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम १९४० के तहत मामले जांचे जाते हैं।
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मुख्यमंत्री ने पिछले कार्यकाल में की थी घोषणा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में २६ मार्च, २०१२ को बजट भाषण में इसकी घोषणा की थी, इसमें जोधपुर,उदयपुर और बीकानेर में प्रयोगशाला खोलकर आरएमएससीएल से उपकरणों व अन्य सामग्री की खरीद कर स्थापित की जानी थी। इसके लिए १०१५ लाख रुपए उपकरणों के लिए बजट रखा गया था। अकेले उदयपुर में ६७१.०५ लाख रुपए का बजट जारी किया गया था। साथ ही जोधपुर व बीकानेर के लिए ५८६.०० लाख का बजट दिया गया था। २६ मार्च १९ को चिकित्सा विभाग के तत्कालीन शासन उप सचिव संजयकुमार ने पत्र जारी कर बताया कि बजट में संशोधन किया गया है। इसमें नई प्रयोगशाला के लिए १४८५.७९ लाख रुपए जारी किए गए। उदयपुर में सामग्री व उपकरण खरीद पर ५४.३० लाख का बजट दिया गया।

इनका कहना है
केवल जयपुर में ही प्रयोगशाला होने के कारण मामले लम्बित रह जाते हैं। उदयपुर में भवन तो बन गया है, लेकिन प्रयोगशाला फिलहाल शुरू नहीं हो पाई है, पहले यहां स्टाफ तो लगाया था, लेकिन इनमें से किसी का फिर से ट्रांसफर भी हो गया है।

विशाल जैन, औषधि नियंत्रण अधिकारी, उदयपुर

bhuvanesh pandya
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