ऐसे तो हम लड़ लिए कोरोना से, इतनी लेटलतीफी में भयावह वायरस से कैसे करेंगे मुकाबला

कई प्रोजेक्ट अधूरे, कोरोनाकाल में भी कामों में देरी

By: bhuvanesh pandya

Published: 11 May 2021, 08:12 AM IST

भुवनेश पंड्या

र्कोरोनाकाल में भी सरकारी लवाजमा आम दिनों की तरह सरकारी ढंग से आराम से ही काम कर रहा है। किसी को ना तो मरते लोगों की पड़ी है और ना ही किसी को भर्ती होने के लिए जहां-तहां भटकते आमजन की। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो कई-कई दिनों से अधूरे हैं, जो उस गति से पूरे नहीं हो पा रहे जितना होना चाहिए। सरकार मरीजों की राहत के लिए रोजाना कुछ ना कुछ नया करना चाहती है, लेकिन आला अधिकारियों से लेकर कार्मिकों की ढिलाई और लचर कार्य शैली पूरे प्रोजेक्ट को अमल में लाने में इतनी देरी करती है कि प्रोजेक्ट ही अटक कर रह जाता है।
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अब तक शुरू नहीं हो पाई ऑक्सीजन लाइन
- महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से एसएसबी की लाइन जोडऩी थी, लेकिन एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई। इसके पीछे मूल कारण ये बताया जा रहा है कि लिक्विड ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से इसे शुरू नहीं किया जा रहा तो दूसरा कारण कुछ तकनीकी कार्य बाकी होना भी है। बताया जा रहा है कि अभी तो पाइप लाइन जोडऩे के बाद इसे 24 घंटे के लिए टेस्ट किया जाएगा, फिर इसे मरीजों की सप्लाई से जोड़ा जाएगा ताकि कहीं लीकेज की समस्या हो तो पता चल सके। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में करीब 15 केएलडी ऑक्सीजन भरी होनी चाहिए, जबकि अभी 7 से 8 केएलडी ऑक्सीजन ही उपलब्ध रहती है, यहां हर दो दिनों में 13 केएलडी वाली बड़ी गाड़ी जामनगर से आ रही है। दरीबा से 3.50 और 1 केएलडी की दो गाडिय़ां आती है। यदि ये लाइन शुरू हो जाती है, तो करीब 500 से 600 ऑक्सीजन सिलेंडर फ्री हो जाएंगे, जिनका उपयोग अन्य मरीजों के लिए किया जा सकेगा। प्रभारी डॉ. संजीव टांक ने बताया कि प्रयास कर रहे हंै कि जल्द से जल्द ट्रायल पूरी हो तो इसे शुरू करेंगे।

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अब तक पूरा नहीं हो पाया पशु चिकित्सालय का काम

अब तक पशु चिकित्सालय का अधिग्रहण होना तो दूर इसमें तेजी से काम तक शुरू नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि यहां एमबी चिकित्सालय से जोडऩे के लिए नई ओपीडी दीवार गिरा दी गई है तो रेंप बन रहा है, वहीं आगे आने वाले पेड़ को भी काटने की तैयारी की जा रही है, लेकिन अभी तो यहां बेहतर तरीके से सफाई और सेनेटाइजेशन, बिजली लाइन डालने व पलंग बिछाने से लेकर कार्मिकों की रोस्टर ड्यूटी लगाने तक का काम अधूरा है, जाने कब इसे शुरू करेंगे और कब यहां मरीज भर्ती होंगे। कमेटी प्रभारी डॉ. बीएल मेघवाल का कहना है कि पूरा हॉस्टल अस्त व्यस्त है। बिजली लाइन टूटी हैं, पंखे भी पूरे नहीं हैं, तो ऐसे में इसे तैयार करने में समय लग रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने काम शुरू किया है, करीब एक सप्ताह में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है।
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दरीबा के डीएवी स्कूल में हॉस्पिटल शुरू होने में भी लगेंगे अभी सात दिन और
दरीबा के डीएवी स्कूल में 350 पलंग का हॉस्पिटल शुरू करने के लिए सरकार ने निर्देशित किया था, यहां हिन्दुस्तान जिंक के ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन लाइन जोड़कर इसे शुरू करना है, स्कूल में ऑक्सीजन लाइन जुड़ चुकी है, तो 100 पलंग लगाए गए हैं तो अन्य दवाइयों की व्यवस्था भी हो चुकी है, लेकिन इस हॉस्पिटल को भी शुरू होने में कम से कम सात दिन और लगना बताया जा रहा है। प्रभारी डॉ पंकज गौड़ का कहना है कि 1.5 किलोमीटर की ऑक्सीजन लाइन डाली जा चुकी है, तो अन्य व्यवस्थाएं भी हो चुकी है। करीब एक सप्ताह में इसे शुरू कर दिया जाएगा।

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नहीं पहुंचे ऑक्सीजन सिलेंडस...

प्रदेश के 332 व्यावसायिक शिक्षा संचालित विद्यालयों में उपलब्ध 400 ऑक्सिजन गैस सिलेंडर प्रशासन को देने के लिए सरकार ने आदेश जारी किए है, इस पर उदयपुर में भी सभी 20 स्कूलों से ये 19 खाली गैस सिलेंडर बीसीएमओ को देने थे, लेकिन अभी तक अधिकांश ब्लॉक से ये सिलेंडर्स संबंधित बीसीएमओ तक नहीं पहुंचे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक व माध्यमिक पुष्पेन्द्र शर्मा ने बताया कि सभी ब्लॉक पर अधिकारियों को इसके आदेश दिए हैं, उन्हें जल्द ये सिलेंडर पहुंचाने हैं। बीसीएमओ बडग़ांव डॉ. गणपत चौधरी ने बताया कि फिलहाल तो उन्हें कोई सिलेंडर नहीं मिला है।

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