सांवलिया सेठ को 20 करोड़, श्रीनाथजी की दस का 'घाटा'

लॉकडाउन में सरकार ही नहीं, भगवान के खजाने को भी लग रही चपत, बड़े मंदिरों की आय प्रभावित, खर्चों में नहीं आई कोई खास कमी

By: jitendra paliwal

Published: 21 Jun 2020, 12:21 PM IST

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. कोरोना महामारी ने सरकार ही नहीं, ठाकुरजी के खजाने को भी बड़ी चपत लगाई है। मेवाड़ के कई बड़े मंदिरों की गुल्लक में करोड़ों रुपए का चढ़ावा नहीं आया। तीन माह में अकेले सांवलिया सेठ को ही 20 करोड़ रुपए का 'नुकसान' हुआ है। हालांकि 'कमाई' नहीं होने के बावजूद प्रभु अपने सेवकों का पेट भर रहे हैं।
बताया गया कि सांवलियाजी मंदिर (चित्तौडग़ढ़) में प्रतिवर्ष चढ़ावा, भेंट और भण्डारे से वर्षभर में करीब 50 करोड़ रुपए आते हैं। गर्मी की छुट्टियों में श्रद्धालुओं की रेलमपेल बढ़ जाती है, लेकिन इस बार लॉकडाउन में मंदिर में दर्शन ही बंद रहे हैं। सांवलिया सेठ मंदिर में राजस्थान का सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है। कमाई भले ही घट गई हो, लेकिन भगवान सांवलिया सेठ अपने मंदिर के 470 स्थायी और अस्थायी सेवक-चाकरों के मासिक वेतन पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। बिजली, सफाई, मरम्मत, प्रबंधन, भोग और अन्य मदों में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए मासिक खर्च होता है, वह और अलग है। हालांकि ऑनलाइन डोनेशन की व्यवस्था के तहत ठाकुरजी के बैंक खाते में श्रद्धालुओं ने मई में नौ लाख रुपए जमा करवाए, वहीं अप्रेल में 2.5 लाख, मार्च में 20 लाख और फरवरी में 8 लाख रुपए दिए थे। यहां दर्शन करने नहीं आ पा रहे राजस्थान के सभी जिलों के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पंजाब के लोग इन दिनों ऑनलाइन दर्शन कर रहे हैं और ऑनलाइन ही भेंट भेज रहे हैं।
चढ़ावा कम, आम-बादाम भेजी
श्रीनाथजी मंदिर के देशभर में करीब 22 भण्डार हैं, जहां सालाना चढ़ावे के ही करीब 13 करोड़ रुपए आते हैं, वहीं विभिन्न मनोरथ के 16 करोड़ रुपए जमा होते हैं। 10 करोड़ रुपए बड़े मनोरथ व सामग्री सेवा के आते हैं। ऑनलाइन भेंट करीब 20 लाख से कुछ ज्यादा है, जो इन दिनों बढ़ गई है। श्रद्धालु ऑनलाइन मनोरथ का पैसा भेज रहे हैं, वहीं परम्परागत सेवा के लिए आम, बादाम, शक्कर और अन्य जिंस भेज रहे हैं। पिछले वर्ष कुछ कटौतियां करने से 30 करोड़ रुपए बचा, लेकिन इस बार कमाई नहीं होने और खर्च जारी रहने से बचत पर बुरा असर पड़ा। तीन करोड़ रुपए मासिक वेतन का खर्च है।
-- सालभर का चढ़ावा एक नजर में--
सांवलिया सेठ : औसत 50 करोड़ नकद भेंट, एक किलो सोना, किलो वार्षिक, 20 किलो चांदी
श्रीनाथजी : 39 करोड़ रुपए के चढ़ावे सहित कुल आय वार्षिक करीब 70 करोड़ है, जिसमें से 65 करोड़ खर्च हो जाता है। देश में नाथद्वारा मंदिर मण्डल के अधीन कुछ भण्डारों का खर्च ही श्रीनाथजी मंदिर से चलता है।
श्री चारभुजानाथ गढ़बोर : हर माल केवल चतुर्दशी को आने वाली भेंट ठाकुरजी की रहती है, बाकी ओसरे के अनुसार पुजारी परिवार के पास भेंट जाती है। सीजन के अनुसार 15 से 30 लाख रुपए तक चढ़ावा आता है।
द्वारिकाधीश मंदिर, कांकरोली : प्रसाद बिक्री, चढ़ावा, वैष्णवों द्वारा राजभोग, खर्च भण्डार व दूध सेवा के मद में मंदिर की मासिक आय 25 लाख रुपए है, जबकि 10 लाख से ज्यादा वेतन पर खर्च।
इनका कहना है...
लॉकडाउन में चढ़ावा बिल्कुल बंद हो गया है। पिछले वर्ष बोर्ड ने 30 करोड़ रुपए की बचत भी की थी, लेकिन इस बार तीन महीने चढ़ावे का नुकसान हुआ।
जितेन्द्र ओझा, सीईओ, श्रीनाथजी मंदिर मण्डल, नाथद्वारा

तीन माह में केवल ऑनलाइन भेंट आई, वह भी कम घट गई है। ग्रीष्मावकाश के ईर्द-गिर्द इन तीन माह में करीब 20 करोड़ का चढ़ावा प्रभावित हुआ है।
मुकेश कलाल, सीईओ, सांवलियाजी मंदिर मण्डल

jitendra paliwal Desk
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