बेवजह सिटी स्केन करवा लोग हो रहे भर्ती, जरुरतमंद मरीजों को नहीं मिल रहे पलंग

- कोरोना के डर से नई मुसीबत
- डर और चिंता दूर करने के लिए सिटी स्केन करवा रहे
- बगैर चिकित्सकीय सलाह के पूरे परिवार के परिवार ही करवा रहे सिटी स्केन

By: bhuvanesh pandya

Updated: 16 Apr 2021, 12:48 PM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना का डर लोगों में इस कदर घर कर गया है कि अब इससे नई मुसीबतें उपज रही हैं। लोग केवल अपने अन्दर छिपे डर को दूर करने या मन की शंका के समाधान के लिए बेवजह सिटी स्केन करवा रहे हैं। सिटी स्केन में सिटी स्कोर ज्यादा आने पर बिना किसी परेशानी के वे भर्ती भी हो रहे हैं। ऐसे में एमबी, इएसआईसी हॉस्पिटल में जिन्हें वाकई पलंग की जरूरत है, उन्हें पलंग नहीं मिल रहे हैं।

रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कुशल गहलोत ने बताया कि सिटी स्कोर को देखने के लिए सिटी स्केन करवाया जाता है, लेकिन इसमें भी प्रतिशत बंटे हुए हैं। फेफड़े में पांच भाग होते हैं, इसमें दाएं हिस्से में तीन व बाएं हिस्से में दो लोब यानी भाग होते हैं। एक लोब का अधिकतम स्कोर पांच होता है। कुल स्कोर 25 होता है। इस आधार पर देते हैं, लोब के 5 प्रतिशत से कम ग्रस्त होने पर एक स्कोर, 5 से 25 प्रतिशत पर 2, 26 से 50 तक 3 और, 51 से 75 तक 4 और 76 से 100 तक होने पर 5 स्कोर दिया जाता है। प्रतिशत देखकर स्कोर दिया जाता है। 1 से 9 प्रतिशत प्रभावित होने तक माइल्ड स्कोर माना जाता है। 10 से ऊपर 17 स्कोर तक मोडरेट माना जाता है, जबकि 18 से 25 स्कोर सीवियर यानी गंभीर माना जाता है।

ये बन रहे हालात

- बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिकांश लोग सिटी स्केन करवाने लगे हैं।
- कई बार चिकित्सक भी मरीज की मानसिकता को देखते हुए सिटी स्केन लिख रहे हैं।

- एक छाती के सिटी स्केन से 250 एक्स-रे के बराबर नुकसानदायक किरणें निकलती हैं।
- ऐसा नहीं है कि सिटी स्कोर ज्यादा हो तो रोगी की गंभीरता भी ज्यादा हो या सिटी स्कोर कम हो तो मरीज गंभीर नहीं हो, बहुत सी बार सिटी स्कोर ज्यादा होने पर मरीज घबराकर भर्ती हो जाता है, जबकि उसे ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है, या किसी भी प्रकार की अन्य कोई परेशानी नहीं होती।

- ऐसे रोगी आईसीयू के पलंगों पर भर्ती हो जाते हैं, ऐसे में उन रोगियों को जिन्हें वाकई आईसीयू पलंगों की जरूरत होती है उन्हें पलंग नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि उन्हें सांस में तकलीफ या उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है।
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महाराष्ट्र में लिखा पत्र
महाराष्ट्र में हालात खराब होने पर लंग सेंटर मुलूंड व ठाणे के डीआरएस के विशेषज्ञ सुब्रह्मण्यन नटराजन व पूनम सुब्रह्मण्यन ने सभी रेडियोलॉजिस्ट से पत्र लिखकर आह्वान किया कि वे तत्काल प्रभाव से कोविड के लिए सीटी स्कोर देना बंद कर दें। ये इसलिए लिखा गया क्योंकि ऐसे लोग मरीजों को संख्या देखकर और डॉक्टरों पर दबाव डालने या अस्पतालों में भर्ती होने के लिए संपर्कों का उपयोग कर परेशान कर रहे हैं। पहले से ही अधिकांश अस्पताल क्षमता से भरे हुए हैं।

अब पलंग की व्यवस्था बेहद मुश्किल हो गई है। कई रोगियों, जिन्हें हॉस्पिटल की आवश्यकता नहीं होती है, वे अधिकारियों को उनके लिए एक पंलग दिलवाने की बात कहकर मजबूर कर रहे हैं। इससे परेशानी बढ़ रही है। यदि मरीज को वाकई परेशानी है या हाइपोक्सिया है तो बात अलग है, लेकिन केवल सिटी स्कोर के आधार पर भर्ती करने में कई मुश्किलें है। लोग सिटी स्कोर लेकर आते हैं और बिना किसी कारण रेमडेसिविर इंजेक्शन भी लगवा रहे हैं।

केवल स्कोर के लिए सीटी स्केन नहीं करवाएं
यहां ऐसे कई मरीज आ रहे हैं, जो सीटी स्केन का स्कोर लाकर खुद भर्ती होना चाह रहे हैं, सभी से आग्रह है कि ऐसा नहीं करे। साथ ही रेडियोलॉजिस्ट भी इस तरह से केवल स्कोर के लिए सीटी स्केन नहीं करवाएं। जब तक मरीजों को परेशानी नहीं है तो वे हॉस्पिटल में भर्ती होने नहीं आए, क्योंकि जिन्हें वाकई पलंग की जरूरत है, उन्हें समय पर उपचार नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।

डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

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