इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ा क्लेम से इनकार करना, ब्याज सहित दो माह में भुगतान के आदेश

पहिया वाहन का इंश्योरेंस होने के बावजूद दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्लेम देने से इनकार करना इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता प्रतितोष फोरम ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कंपनी को दो माह में मय ब्याज क्लेम की राशि के भुगतान के आदेश जारी किए। रि

Krishna

November, 1906:52 PM

उदयपुर.चार पहिया वाहन का इंश्योरेंस होने के बावजूद दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्लेम देने से इनकार करना इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता प्रतितोष फोरम ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कंपनी को दो माह में मय ब्याज क्लेम की राशि के भुगतान के आदेश जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार प्रतापनगर ई-क्लास निवासी विनोद सुयल ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी से कार का इंश्योरेंस करवा रखा था। मवेशी को बचाने के प्रयास में कार सडक़ किनारे खड्डे में गिरकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देने पर सर्वेयर ने इसकी रिपोर्ट बनाई। कंपनी ने प्रार्थी को कार दुरुस्त करवाकर तमाम बिल मोटर दावा फार्म के साथ प्रस्तुत करने को कहा। करीब 2 लाख 74 हजार का इसमें खर्च हुआ। बीमा कंपनी ने नो क्लेम बोनस बेनिफिट प्राप्त कर लिए जाने की बात कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया। प्रार्थी ने इस पर अधिवक्ता चेतन चौधरी के जरिए उपभोक्ता फोरम में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अध्यक्ष कमलचंद नाहर, सदस्य अंजना जोशी और डॉ. भारतभूषण ओझा ने सुनवाई करते हुए विपक्षी कंपनी को परिवादी को दो माह में बीमा क्लेम के 2 लाख 6 हजार 240 रुपए 24 अप्रेल, 2018 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। साथ ही परिवाद व्यय के 3 हजार रुपए भी विपक्षी वहन करेगा।

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