
उदयपुर . महाराणा प्रताप स्मारक समिति की ओर से मोती मगरी स्थित प्रताप चौक पर आयोजित कालजयी मेवाड़ कवि सम्मेलन में शुक्रवार को महाराणा प्रताप के शौर्य की गाथाएं खुले आसमां तले खूब गूंजी। मेवाड़ के ख्यात कवि पं. नरेन्द्र मिश्र ने ‘ये जौहर की भूमि प्रतापी आन-बान की है, परम्परा पद्मिनी-पन्ना के रक्तदान की है... ’ अपनी शौर्य रचना पढक़र सर्द शाम में गर्माहट पैदा कर दी। इस मौके पर देश-दुनिया में फैले पद्मावती विवाद को रेखांकित करते अगली रचना ‘पद्मिनि का कालजयी जौहर, भारत माता की पंूजी है...’ सुनाकर सबकी बाजुओं में जोश भर दिया।
राष्ट्र कवि बालकवि बैरागी ने अपनी काव्य रचनाओं में ‘देश में एकमात्र ऐसा पशु चेतक है जिसके स्मारक बने हैं... ’ और ‘वो कहती है मैं गीतों में चांद नहीं ला पाता हूं...’ जैसे भावों से माहौल में ताजगी जगाई। इस अवसर शायर अंजुम रहबर, हास्य कवि संजय झाला ने भी रचनाएं पढ़ीं।
इस मौके पर टीवी एंकर एवं ख्यात कवि शैलेष लोढ़ा ने अपनी पहली रचना ‘फूलों को अपनी सुन्दरता पर गुमान हो गया... के बाद पन्ना-गोरा-बादल की कुर्बानी है मेवाड़..., जिस दिन तू शहीद हुआ, न जानें किस तरह तेरी मां सोयी होगी... और सच है कि इरादे हमारे विध्वसंक नहीं है और अकारण युद्ध के हम भी प्रशंसक नहीं है...के वाचन से कवि सम्मेलन के आयोजन को सार्थक कर दिया। उन्होंने दर्शकों की मांग पर कुछ हास्योक्तियां भी सुनाईं। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और निवृत्ति कुमारी मेवाड़, सचिव युद्धवीरसिंह शक्तावत, ब्रिगेडियर एसएस पटिल सहित कई अतिथि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
Published on:
02 Dec 2017 02:25 am
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