ये अांकड़े चौंका देंगे, राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा हिस्‍ट्रीशीटर्स हैं कोटा में और दूसरे स्‍थान पर उदयपुर

ये अांकड़े चौंका देंगे, राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा हिस्‍ट्रीशीटर्स हैं कोटा में और दूसरे स्‍थान पर उदयपुर

bhuvanesh pandya | Publish: Dec, 21 2017 03:26:32 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

राज्य में साढे़ नौ हजार से अधिक हिस्ट्रीशीटर,

उदयपुर . प्रदेश में हिस्ट्रीशीटर्स के आंकड़ों पर नजर डाले तो कोटा संभाग अव्वल है, जबकि अपना उदयपुर संभाग कोटा से 100 कम हिस्ट्रीशीटर की संख्या के साथ दूसरे स्थान पर है। उदयपुर संभाग गृहमंत्री का गृह संभाग होने के बावजूद यहां बड़ी संख्या में हिस्ट्रीशटर हैं। जिलों में अजमेर जिला पहले और चित्तौडग़ढ़ दूसरे स्थान पर है। राज्य का सीमावर्ती जिला जैसलमेर 59 हिस्ट्रीशीटर्स की संख्या के साथ आखिरी पायदान पर है। राज्य में 9635 हिस्ट्रीशीटर्स के नाम पुलिस डायरी में दर्ज हैं।

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संभागों में हिस्ट्रीशीटर की स्थिति
- कोटा संभाग में कुल 1543 हिस्ट्रीशीटर हैं। इसमें आने वाले कोटा शहर में 417, झालावाड़ में 336, बूंदी 295, बारां 290, कोटा ग्रामीण 205 हैं।

- उदयपुर संभाग में कुल 1442 हिस्ट्रीशीटर हैं। इसमें चित्तौडग़ढ़ 448, उदयपुर में 365, प्रतापगढ़ 176, राजसमन्द 170 बांसवाड़ा 161, डूंगरपुर 122 हैं।

- जोधपुर संभाग में कुल 1219 हिस्ट्रीशीटर हैं। इसमें बाड़मेर में 39, पाली 338, सिरोही 164, जालौर 160और जोधपुर ग्रामीण 129 और सबसे कम 59 जैसलमेर में हैं।

- जोधपुर कमिश्नरेट को अलग से गिना जाता है, जिसमें जोधपुर (पूर्व) में 165 और जोधपुर (पश्चिम) में 161 है।
- जयपुर संभाग में कुल 1067 हिस्ट्रीशीटर हैं। इसमें सीकर 331 अलवर में 325, दौसा 118, जयपुर ग्रामीण और 122, झुंझुनूं में 173 हिस्ट्रीशीटर हैं।

- जयपुर कमिश्नरेट में कुल 811 का आंकड़ा है, इसमें जयपुर (पूर्व) में 118, जयपुर (पश्चिम) में 232 जयपुर उत्तर में 305 और दक्षिण में 156 हैं।
- बीकानेर संभाग में कुल 992 हिस्ट्रीशीटर है। बीकानेर में 374, चूरू में 153, हनुमानगढ़ 129, श्री गंगानगर में 336 है।

- भरतपुर संभाग में कुल 854 हैं। इसमें भरतपुर में 309, धौलपुर में 145, करौली में 233 और सवाई माधोपुर 167 हैं।
- अजमेर संभाग में सर्वाधिक अजमेर 507 भीलवाड़ा 289 नागौर 391 व टोंक 192 हिस्ट्रीशीटर हैं।

 

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तो बंद हो जाती है हिस्ट्रीशीट
यदि किसी हिस्ट्रीशीटर का लम्बे समय तक चाल चलन अच्छा होता है, अर्से से किसी भी अपराध में उसका कोई नाम नहीं आता। साथ ही वर्तमान में उसका व्यवहार समाज के अनुरूप है, तो संबंधित थाना पुलिस उसकी पूरी जानकारी जुटाते हुए हिस्ट्रीशीट बंद कर सकती है।

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जैसे ही कोई अपराध होता है और उसमें कोई आदतन अपराधी सामने आता है, तो उसका नाम दर्ज हो जाता है। उससे जुडे़ अपराध उसमें जोड़े जाते हैं। पुलिस एेसे अपराधियों पर नजर रखने के लिए किसी की हिस्ट्रीशीट खोलती है। अपराधों के लिहाज से नजर रखना भी जरूरी है।

- आनन्द श्रीवास्तव, महानिरीक्षक पुलिस उदयपुर रेंज

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