लाड़ो आई पिया घर, सरकार ने किया पराया

- जनजाति अंचल में बाहर से आकर विवाह करने वाली बेटियों को नहीं मिलता आरक्षण लाभ

By: Bhuvnesh

Published: 17 Jul 2019, 10:44 PM IST

भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर . ये लाड़ो जो मायका छोड़ जनजाति अंचल के ससुराल में पहुंच तो गई, लेकिन अब तक वे सरकारी नजर में यहां की निवासी नहीं है यानी टीएसपी क्षेत्र में जनजाति वर्ग के किसी युवक से विवाह के बाद भी इनको वे लाभ नहीं मिलते जो उसे विवाह के बाद मिलना चाहिएं। ये वे बेटियां गैर टीएसपी क्षेत्र से टीएसपी क्षेत्र में विवाह करती हैं, तो इनको यहां की निवासी बनने के बावजूद टीएसपी क्षेत्र के आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता। इसे लेकर कुछ महिलाओं ने न्याय के लिए न्यायालय का द्वार भी खटखटाया है।

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यह है टीएसपी क्षेत्र

हाल ही में सरकार ने टीएसपी क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है। पहले डूंगरपुर, बांसवाड़ा पूर्ण, उदयपुर, सिरोही और प्रतापगढ़ के कुछ गांवों को ही टीएसपी में शामिल थे, लेकिन दायरा बढ़ाने के साथ ही पाली, राजसमंद, चित्तौडगढ़़ के कुछ क्षेत्रों को इसमें जोड़ दिया गया है। इन जिलों के 663 गांव और जोड़ दिए गए हैं। इससे टीएसपी क्षेत्र की जनसंख्या करीब एक करोड़ तक पहुंच चुकी है। पहले टीएसपी क्षेत्र की जनसंख्या 65 लाख थी, लेकिन नए गांव और जिलों को जोडऩे के बाद 1 करोड़ हो गई है।

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ये है टीएसपी का लाभ

1. सरकारी नौकरियों के लिए अलग से आरक्षण व्यवस्था लागू है। 50 प्रतिशत सामान्य वर्ग, 45 प्रतिशत एसटी और 5 प्रतिशत एससी वर्ग को दिया गया है।

2. राज्य सरकार की हर भर्ती में टीएसपी के लिए अलग से कोटा तय किया हुआ है। व्यवस्थानुसार भर्ती प्रक्रिया होती है।

3. टीएसपी के लिए अलग से मूल निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। जिसमें 1970 से पहले यहां का निवासी होना अनिवार्य होता है।
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- मुझे फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है, पूरी जानकारी करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
रामजीवन मीणा, अतिरिक्त आयुक्त टीएडी

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