प्राचीन हौम्योपैथी में हुए नवाचार बचा सकते हैं लोगों की जिंदगी

हौम्योपैथ पर एक दिवसीय कार्यशाला

By: Sushil Kumar Singh

Published: 30 Jan 2019, 02:28 AM IST

उदयपुर. राजस्थान विद्यापीठ के संघटक हौम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से मंगलवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में आयोजित ५वीं नेशनल हौम्योपैथी वर्कशॉप का एक दिवसीय आयोजन हुआ। बतौर मुख्य अतिथि केंद्र सरकार के सीसीएच आयुष के पूर्व वाइस प्रेसीडेंट प्रो. अरुण भस्में ने केन्द्र सरकार से मांग की कि सरकार हौम्योपेथी को बढ़ावा दे। इसमें लाइलाज बीमारियों का कम खर्च में उपचार संभव है। हौम्यापेथी में विश्व की सबसे प्राचीनतम इस पद्धति में कई नवाचार हुए हैं। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत ने कहा कि हौम्योपैथी में स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारियों का बेहतर इलाज है। इन दवाइयों का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। पेट, किडनी व पित्ताशय में पथरी का इलाज भी इन दवाओं से होता है। ऐसे में रोगी को ऑपरेशन कराने की जरूरत नहीं होती। उडीसा के प्रो. एलके नंदा ने कहा कि हौम्योपैथी को नवाचारंो को अपनाते हुए असाध्य रोगो के कारगर इलाज पर फोकस करना होगा। उन्होंने विषय के पांच आधारभूत सिद्धांतो की भी जानकारी दी। बतौर विशिष्ठ अतिथि सीसीएच आयुष के सदस्य डॉ. पिंकीन एन त्रिवेदी,प्रो. एमके साहनी, प्राचार्य डॉ. अमिया गोस्वामी, डॉ. बबीता रसीद ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पहले डॉ. गोस्वामी ने सेमीनार की जानकारी देते हुए स्वागत भाषण दिया। संचालन डॉ. बबीता ने किया। सेमीनार में राज्य के विभिन्न हौम्योपैथी चिकित्सालयों के शोधार्थियों एवं डीन निदेशकों ने हिस्सेदारी निभाई।

Show More
Sushil Kumar Singh
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned