महाराणा की विरासत जर्जर, रूठी रानी महल का छज्जा गिरा

असामाजिक तत्व छलकाते हैं जाम

By: jagdish paraliya

Published: 15 Sep 2021, 05:27 PM IST

जयसमंद (उदयपुर). उदयपुर जिले के विश्व विख्यात जयसमंद झील की पहाडिय़ों पर राजा जयसिंह द्वारा बनाए गए दोनों महलों का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। यह पुरातात्विक महल खंडहर में तब्दील होने के कगार पर है। हाल ही रूठी रानी महला का छज्जा भी गिर गया। सारसंभाल एवं देखरेख के अभाव में महल में चमगादड़ों सहित पक्षियों का बसेरा बना हुआ है। कई असामाजिक तत्व महल में आए दिन जाम छलकाते रहते हैं।
कभी झील की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले दोनो महल बदहाल नजर आते हैं। टूटे दरवाजे एवं पनपती विलायती बबूल की झाडियां महलों में लगाए गए लोहे के दरवाजों को भी असामाजिक तत्वों द्वारा नुकसान पहुंचा दिया है। परिसर में प्रवेश द्वार विलायती बबूल की झाडिय़ों से अटा हुआ है। कई जगह दीवारें क्षतिग्रस्त है। गांवों के बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1973 जयसमंद झील के ऑवरफलो होने पर दोनों महलों में वीरपुरा व गातोड़ के सैकड़ों ग्रामीणों ने शरण ली थी। जयसमंद झील का पानी मुख्य पाल पर बहने लगा था। तब प्रशासन ने झील की मुख्य पाल पर रेत के कट्टे डालते हुए झील को टूटने से बचाया। हजारों ग्रामीणों ने इन महलों में शरण लेकर अपनी जान बचाई थी। प्रशासन ने ग्रामीणों को हैलीकॉप्टर से भोजन उपलब्ध करवाया था।
पर्यटक हुए कम
दोनों महलों के बदहाल होने के कारण अब यहां आने वाले सैलानियों में कमी आई है। रूठी रानी महल से जयसमंद झील का चारों आेर पानी का नजारा दिखता है। यहां से देखने पर झील का पानी सागर की तरह दिखता है।

जिम्मेदार विभाग की लापरवाही के कारण जयसमंद के दोनों महल बदहाल व जर्जर होने के कगार पर है। विभाग को इसकी मरम्मत कराने के साथ ही इसका संरक्षण करना चाहिए।
कमल मेहता व जयंतीलाल, तेली नवयवुक मंडल अध्यक्ष जयसमंद

jagdish paraliya
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