छह घंटे में मास्क बेकार, इधर-उधर नहीं फेंके

- पहनकर उतारने के बाद नहीं आते हैं काम

By: bhuvanesh pandya

Published: 16 Mar 2020, 11:07 PM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना के डर के कारण लोग इन दिनों मास्क पहने नजर आ रहे हैं, जबकि अधिकांश लोगों को मास्क की सही जानकारी तक नहीं है, वे ये नहीं जानते है कि मास्क केवल छह घंटे तक कारगर रहता है, चाहे व थ्री लेयर हो या एन-95। यानी एक बार यदि किसी ने मास्क उतार दिया तो वह दुबारा पहनने के काम में नहीं लिया जा सकता। इतना ही नहीं लोगों को ये भी मालूम नहीं है कि मास्क को उतारने के बाद आम कचरे के साथ नहीं फेंका जाता, ये बकायदा मेडिकल वेस्ट की तर्ज पर फेंकना होता है।

आइए जानते हैं ऐसे है मास्क

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डिस्पोज़ेबल मास्कडिस्पोज़ेबल मास्क, जो सर्जिकल मास्क जैसे होते हैं, इन्हें मुंह या सांस के ज़रिए निकले बड़े ड्रॉपलेट्स को आसपास मौजूद लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। हालांकि ये हवा में मौजूद छोटे-छोटे कणों को रोकने में सक्षम होता है। इस तरह के मास्क को 3 से 8 घंटों से ज़्यादा नहीं पहनना चाहिए।

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एन- 95 मास्कएन-95 कोरोना वायरस जैसे इंफेक्शन के लिए सबसे अच्छे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये मुंह और नाक पर अच्छी तरह फि ट हो जाते हैं और साथ ही छोटे-छोटे कणों को रोकता है। क्योंकि यह मास्क हवा में मौजूद 95 प्रतिशत कणों को रोकने में सक्षम है, इसलिए इसका नाम एन-95 पड़ा है। हालांकि कोरोना वायरस के कर्ण डायमीटर में 0.12 माइक्रॉन जितने होते हैं, जिसकी वजह से ये मास्क भी कुछ हद तक ही मदद कर सकता है। मुंह और नाक के आसपास अच्छी तरह से फि ट होने पर ये ज्यादा कारगर होता है। हवा के जाने के लिए जगह नहीं है। मास्क को सारा दिन पहने रखें और बार-बार न छुएं। इन मेडिकल मास्क पर एन-95, एफएफपीटू जैसी रेटिंग होनी चाहिए। यदि मास्क में बाहर से हवा अन्दर जा रही है तो ये किसी काम का नहीं है।

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सिंगल लेयर मास्क : यह कॉटन से बना साधारण मास्क है। डॉक्टरों के मुताबिक यह मास्क प्रदूषण से लडऩे में बहुत प्रभावी नहीं है, हालांकि सबसे अधिक लोग इसी का इस्तेमाल करते हैं। यह पीएम 10 और पीएम 2.5 से नहीं बचाता। सिर्फ धूल के बड़े कणों को कुछ हद तक रोक पाता है। यह सिर्फ कॉस्मेटिक इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

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ट्रिपल लेयर मास्क : हल्के प्रदूषण से बचने में यह मास्क कुछ कारगर है। इससे भी 20 से 30 प्रतिशत तक ही बचाव हो पाता है। तीन लेयर होने की वजह से यह पीएम 10 को कुछ हद तक रोकने में कामयाब रहता है।

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सिक्स लेयर मास्क: यह प्रदूषण से काफ ी हद तक बचाव करता है। इससे भी 80 फ ीसदी बचाव हो सकता है। अधिक प्रदूषित क्षेत्र में यह भी कारगर नहीं है। यह काफ ी हद तक पीएम 10 के अलावा पीएम 2.5 से बचाता है। इसे कई बार धो कर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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बाजार में कई प्रकार के मास्क उपलब्ध हैं, मास्क अधिकतम छह घंटे तक चलता है, एक बार पहनकर निकालने के बाद इसे फिर से उपयोग में नहीं लिया जा सकता है। इसे इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए

डॉ लाखन पोसवाल, प्राचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर

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