video: मरीजों को दवा नहीं ‘बीमारी’ बांट रहा है एमबी हॉस्पिटल

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जीवनरक्षक दवाइयां पड़ी है कबाड़ में

bhuvanesh pandya | Updated: 23 Jun 2019, 10:35:07 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- जीवनरक्षक दवाइयां पड़ी है कबाड़ में
- कई बोतलों में फफूंद, तो कई दवाएं गंदगी में

- बॉक्स खुले तो कई बॉक्स के नीचे नमी

 

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर . महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां ‘बीमारी’ बांटने के समान है, क्योंकि जो दवाइयां मरीजों की जीवन रक्षा के लिए उपयोग में ली जा रही हैं, वे खुले में कबाड़ के रूप में पड़ी हुई हैं। दवाइयों के चारों ओर गंदगी ही गंदगी है। हालात यह है कि ये दवाइयां तेज गर्मी, बारिश और सर्दी के थपेडे़ झेल रही हैं।

हॉस्पिटल परिसर के बीचों-बीच जहां एक ओर कबाड़ भरा है, उसी के पास धूल, फफूंद, मकडि़यों के जालों के बीच गंदगी में दवाइयां रखी हुई हैं। कई दवाओं के बॉक्स फर्श पर नमी के कारण गीले हो चुके हैं, तो ग्लूकोज सहित अन्य दवाओं की बोतलों पर फफूंद साफ नजर आ रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि नियमानुसार किसी भी प्रकार की दवाओं को कभी भी टीनशेड के नीचे नहीं रखा जा सकता है लेकिन यहां पर लाखों की दवाइयां व नि:शुल्क आवंटन की दवाओं के बॉक्स खुले में टीन शेड के नीचे रखे गए हैं।
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अन्दर कबाड़-बाहर दवा

हालात यह है कि चिकित्सालय के कुछ कक्ष कबाड़ से भरे हुए हैं, लेकिन दवाइयां बाहर पड़ी हैं। इन कक्षों का उपयोग दवाइयां रखने के लिए किया जाए तो दवाओं से जुड़ी समस्या टल सकती है।

ये है कमियां : बिन्दुवार

- दवाइयों तक बेरोक-टोक किसी की भी पहुंच।
- पूरा परिसर कबाड़ से भरा, दवाइयां उससे घिरी हुई

- दवाइयां जहां रखी हैं, वहां सफाई नहीं।
- कबाड़ के पास रखे अॅाक्सीजन सिलेंडर से आग लगने का खतरा

- टीन शेड के नीचे तपती व भीगती दवाइयां
- एक कोने में शौचालय उसके समीप दवाएं

- दवा की बोतलों पर फैली मिट्टी, जमे हुए जाले
- कई बॉक्स टूटे व गीले, दवाइयों पर जमी गर्द

- बोतलों के ऊपर फंगस
- दवाओं के ऊपर बने टीन शेड पर लगातार गिरता पानी

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ये है नियम:
- किसी भी प्रकार की दवाइयों को एेसे खुले में नहीं रखा जा सकता।

- सीलन वाली जगह पर इसे नहीं रखा जा सकता
- जहां तेज धूप आती हो, वहां दवाइयां को नहीं रखा जा सकता।

- हर दवाई को तय तापमान पर रखना होता है, अन्यथा उसके कंटेंट बदल सकते हैं।
- टीन शेड पर तो औषध विभाग भी लाइसेंस तक जारी नहीं करता है।

- गंदगी वाली या दमघोटू जगह में दवा नहीं रखी जा सकती।
- एक बॉक्स पर दूसरा बॉक्स नहीं रखा जा सकता, ताकि अन्दर नुकसान नहीं हो। बोतलों पर फंगस नहीं लगे।

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तीन केटेगरी में रखी जाती है दवा
कूल- ८ से २५ डिग्री सेल्सियस तापमान पर

कोल्ड स्टोरेज- २ से ८ डिग्री सेल्सियस तापमान पर
रूम टेम्परेचर-२५ से ३० डिग्री सेल्सियस तापमान पर

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पत्रिका से बोला मैं दवाई ले जाना आया हूं
पत्रिका टीम जब स्टोर के पिछले हिस्से में पहुंची तो वहां एक लडक़ा दवाई के बॉक्स पर ही बैठा था। पूछने पर उसने बताया कि वह वार्ड से दवाई लेने आया है। उसने पन्नाधाय एजेंसी की शर्ट पहन रखी थी।

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सब जानते, इसमें क्या करें
मुख्य स्टोर प्रभारी दीपक लक्षकार से जब पत्रिका ने पूछा कि यह हाल क्यों हैं तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह क्या कर सकते हैं। यह तो सबको पता है, लेकिन हालात नहीं बदल रहे हैं। हमारी कोई दवा बाहर नहीं है, ये दवाइयां तो सब स्टोर की हैं जिसके प्रभारी करण सिंह हैं। पत्रिका ने करणसिंह से बात करने के लिए कई बार फोन लगाया लेकिन उन्होंने कॉल नहीं लिया।

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टीन शेड के नीचे दवा रखी ही नहीं जा सकती हैं। सरकार मेडिकल स्टोर को पक्की छत की जानकारी लेने के बाद ही लाइसेंस देती है। यदि यहां रखी गई है तो यह बहुत बड़ी गलती है। दवा रखने की जगह पर सीलन नहीं लगनी चाहिए। दवाओं पर पानी नहीं गिरना चाहिए। टीन शेड में लाइसेंस नहीं देते। गर्मी में दवाइयां खराब हो जाती है।
विशाल जैन, औषधि नियंत्रण अधिकारी

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स्टोर में जो कबाड़ है, उसकी जल्द नीलामी करेंगे। यदि दवाइयां बाहर पड़ी है या कोई बॉक्स भीग रहा है तो वहां के कार्मिकों की लापरवाही है। प्रभारी को चाहिए कि वह समय पर कक्ष की सफाई करवा दवाइयां रखे।

डॉ लाखन पोसवाल, अधीक्षक महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर

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