video : उदयपुर के इस अस्‍पताल में मच रहा हर ओर शोर, बाबू हैं ‘चोर’ या कोई और..

Sushil Kumar Singh Chauhan | Updated: 16 Jan 2018, 07:49:21 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

एमबी हॉस्पिटल में अधीक्षक कार्यालय से चोरी हुए अलमारियों के कपाट - पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार से मांगा दरवाजे, खिड़कियों और चौखटों का हिसाब

उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में मंत्रालयिक कार्मिकों के बीच एक ‘चोर’ को लेकर ‘शोर’ हो रहा है। पहले इस बात को लेकर उलझ रही है कि अधीक्षक कार्यालय की दीवारों पर लगी हुई अलमारियों के लकड़ी वाले कपाट किसने चोरी किए हैं। कौन है जो स्टोर में सामान पहुंचाने के नाम पर कपाटों को गायब कर गया। ताज्जुब इस बात का है कि कपाट को लेकर पीडब्ल्यूडी, ठेकेदार, अस्पताल के स्टोर कीपर से लेकर सामान इधर-उधर करने वाले कर्मचारी बिल्कुल अनजान हैं। गुपचुप बातचीत में जुटा मंत्रालयिक अमला जिम्मेदारी व्यक्ति का मामले में हाथ होने की बात कबूल भी रहा है, लेकिन खुल के बताने को तैयार नहीं है।

इधर, गायब हुए कपाट, बिजली के स्वीच, एमसीबी एवं अन्य सामानों को लेकर पत्रिका की पड़ताल पर पीडब्ल्यूडी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और गोयल कन्सट्रक्शन ठेका एजेंसी के प्रतिनिधि को बुलाकर वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर सभी कपाट एवं अन्य आवश्यक सामग्री का हिसाब देने के लिए निर्देशित किया। अब ठेका एजेंसी प्रतिनिधि बोल रहा है कि उसने अलमारियों के कपाट को शामिल नहीं किया था। करीब 15 कपाट गायब यूं तो नई ओपीडी बिल्डिंग निर्माण को लेकर खाली किए गए अधीक्षक कार्यालय के अधीक्षक कक्ष में दो कपाट वाली आलमारी, उप अधीक्षक कार्यालय में दो, सामान्य शाखा में एक, कार्यालय अधीक्षक के पूर्व कक्ष के पीछे गलियारे वाले मार्ग के कक्ष में एक कपाट वाली अलमारियां थी। एेसा ही हाल प्रथम एवं निचले तल पर बने अन्य कक्षों में भी था।

 

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करीब 15 से ऊपर कपाट वाली अलमारियों में एक के भी दरवाजे ठेकेदार प्रतिनिधि के रिकॉर्ड में, चिकित्सालय के स्टोर में और पीडब्ल्यूडी गेंग हट के स्टॉक में नहीं है। पत्रिका की पड़ताल में आया कि राजकीय सेवारत चिकित्सालय के चौकीदार के साथ संविदा कार्मिक ने आवश्यक फर्नीचर, डस्टबिन, बाल्टी, गुलदस्ते, गमले और कपाट को विवि मार्ग स्थित निजी मकान में पहुंचाया है। कहता है नियम नियमों के तहत भवन को खाली कराते समय दीवार एवं उस पर फिक्स प्रत्येक सामान पर पीब्डल्यूडी का हक होता है। निर्माण एजेंसी के तौर पर पीडब्ल्यूडी संबंधित सामानों को एकत्र करने के बाद नीलामी निकालकर संबंधित सामान की बोली तय करती है। यह राशि राजकोष में जमा होती है। दूसरी ओर चिकित्सालय का स्टोर पुराने सामानों एवं अधीक्षक कार्यालय के भंगार के लिए खोला हुआ तो है, परंतु जमा किए जा रहे भंगार का हिसाब स्टोर कीपर के पास नहीं है। ठेकेदार से वसूली हमारे पास वीडियोग्राफी एवं फुटेज हैं। इसमें तोडऩे से पहले के कक्षों की पूरा ढांचा है। इससे दीवार में बनी अलमारियों के कपाटों की गिनती कर ठेकेदार से सामान की गिनती कराएंगे। सामान नहीं होने पर ठेकेदार से वसूली की जाएगी। पहले हमारे स्तर पर गिनती पूरी हो जाए। तभी सही जवाब देने में सही रहेगा।

आर.के मूंदड़ा, सहायक अभियंता, एमबी हॉस्पिटल गेंगहट

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