एमबी चिकित्सालय का ‘दिल’ ही हुआ बीमार, यहां सेन्ट्रल ऑक्सीजन और सेन्ट्रल कूलिंग सिस्टम अर्से से बंद

madhulika singh

Publish: Jul, 13 2018 03:52:13 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2018 03:59:46 PM (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
एमबी चिकित्सालय का ‘दिल’ ही हुआ बीमार, यहां सेन्ट्रल ऑक्सीजन और सेन्ट्रल कूलिंग सिस्टम अर्से से बंद

दिल के गंभीर मरीजों के लिए न तो सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा ना ही आईसीयू में एसी की सुविधा

उदयपुर . महाराणा भूपाल हॉस्पिटल परिसर का ‘दिल’ यानी कार्डियो यूनिट ही बीमार है। दिल के गंभीर मरीजों के लिए न तो सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा मिलती है, ना ही आईसीयू में एसी की। यही नहीं प्राइवेट वार्ड में भी एसी नहीं चल रहे हैं। कई टॉयलेट्स खराब पड़े हैं। मरीजों एवं तिमारदारों को यह सब परेशानी इसलिए हो रही है कि चिकित्सालय प्रशासन इंतजार कर रहा है कि जिस वेदान्ता ग्रुप ने इसका निर्माण करवाया, वही उसे दुरुस्त करवाए। अधिकारी यह दलील दे रहे हैं कि जब तक वेदान्ता ग्रुप इसे हॉस्पिटल के माध्यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग के लिए हैण्डओवर नहीं करता ये काम अटकते रहेंगे।

सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन सिस्टम हुआ कबाड़
यूनिट के निर्माण के दौरान ही वेदान्ता ने लाखों रुपए खर्च कर सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन सिस्टम बनवाया था, जिससे मरीज के पलंग पर प्राणवायु की सप्लाई होती थी, लेकिन रखरखाव के अभाव में हॉस्पिटल की बगल में बना यह सिस्टम करीब चार वर्ष से कबाड़ बन चुका है। इसके शटर ऐसे बंद हुए कि अब खुलने का नाम ही नहीं ले रहे। इधर, महाराणा भूपाल चिकित्सालय के सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन सेन्टर से हार्ट हॉस्पिटल तक सप्लाई पहुंचाने के लिए केवल 25 हजार रुपए खर्च बताया गया, लेकिन इस पर भी चिकित्सालय प्रशासन विचार कर रहा है कि क्या किया जाए।

 

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मरीजों को काटने पड़ते हैं सेन्ट्रल लैब के फेरे
खून की जांच के लिए कई बार मरीजों को एमबी स्थित सेन्ट्रल लैब के फेरे लगाने पड़ते हैं। हालांकि गंभीर मरीज की जांच के लिए चिकित्साकर्मी सैम्पल लेकर लैब में जाते हैं। अन्य जांचें हार्ट हॉस्पिटल की कैथ लैब में हो रही हैं।


चार दिन ओपीडी
हृदय रोगियों के लिए हॉस्पिटल के ग्राउंड फ्लोर पर सोमवार, बुधवार, शुक्रवार ओर शनिवार को ओपीड़ी चलाया जाता है। प्रत्येक ओपीड़ी में करीब 300 मरीज आते हैं, जिनमें से करीब 20 मरीज भर्ती होते हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मुकेश शर्मा ने बताया कि वर्तमान में खानपान, शराब का सेवन, डायबिटिज, ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस के कारण मरीज बढ़ते जा रहे हैं।

 

यूनिट में प्रवेश करना भी मुश्किल

कार्डियक यूनिट के प्रवेश द्वार को घेरकर इतने वाहन खड़े कर दिए जाते हैं कि उसमें प्रवेश के लिए भी मशक्कत करनी होती है, इमरजेंसी के सामने के मुख्य द्वार से लेकर यूनिट के प्रवेश पर ही लोग बेतरतीब तरीके से वाहन पार्क कर देते हैं, जिन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है।

जब तक वेदान्ता इस भवन को पीडब्ल्यूडी को नहीं देता, तब तक पीडब्ल्यूडी से काम नहीं करवा पाएगा। वेदान्ता सीएसआर के प्रभारी निरीक्षण करके गए हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है। हमने वेदान्ता को चि_ी भी लिखी है, हालांकि हम इसे सार्वजनिक निर्माण विभाग से कार्य करवाने की तैयारी कर रहे हैं। करीब साढ़े चार लाख की लागत से अलग से सेन्ट्रलाइज ऑक्सीजन यूनिट लगाएंगे ताकि जरूरत पर एमबी के लिए भी बेकअप मिल सके। जहां तक एमबी के सेन्ट्रल ओटू यूनिट की सुरक्षा का सवाल है, हम जल्द ही वहां बेरिकेटिंग करवाएंगे और टॉयलेट्स बनवा रहे हैं। करीब 12 लाख रुपए में सेन्ट्रल कुलिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।
डॉ. विनय जोशी, अधीक्षक,महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर

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