हर साल दस बार गांवों में ‘जीवन-पाठ’ पढ़ाने जाएंगे भावी चिकित्सक, स्वास्थ्य विद्या वाहिनी कार्यक्रम की शुरुआत

हर साल दस बार गांवों में ‘जीवन-पाठ’ पढ़ाने जाएंगे भावी चिकित्सक, स्वास्थ्य विद्या वाहिनी कार्यक्रम की शुरुआत

madhulika singh | Publish: Sep, 03 2018 01:16:05 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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भुवनेश पंड्या/उदयपुर. अब राजस्थान भी आन्ध्रप्रदेश की राह चल पड़ा है। राजस्थान में इस वर्ष से प्रति वर्ष दस बार गांवों में जाकर लोगों को मेडिकल विद्यार्थी जीवन का पाठ पढ़ाएंगे। ख्‍ाास बात ये रहेगी कि जब भीी वे गांव जाएंगे तो हर बार थीम नई होगी। सरकार ने आन्ध्रप्रदेश में चल रहे मॉडल के आधार पर यह शुरुआत की है, ताकि मेडिकल के विद्यार्थी गांवों की मूल समस्या को समझकर बीमारियों की रोकथाम पर रिपोर्ट तैयार कर सकेंगे। यह कार्यक्रम राज्य के सातों जिलों के मेडिकल कॉलेजों में इसी वर्ष से शुरू होगा।


ये जिले हैंं शामिल
उदयपुर, जयपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, झालावाड़, जोधपुर को शामिल किया गया है। जयपुर और उदयपुर के निजी मेडिकल कॉलेजों में भी इसे लागू किया जाएगा।


- स्वास्थ्य विद्या वाहिनी कार्यक्रम राजस्थान में शुरू करने से पहले इन्दौर समिट में विस्तार से समझाया गया था, वर्ष 2018-19 की पीआईपी में भारत सरकारको भि‍जवाया गया था, जिस पर स्वीकृति दी गई है।

- गांवों में आमजन को स्वच्छता संदेश, जीवन जीने की कला सि ााने।

- लोगों की परेशानियों को सुनने व समझने के बाद इसका निराकरण समझाने का मु य कार्य रहेगा।


ये रहेगी दस थीम
- पर्यावरण शिष्ठाचार और स्वास्थ्य

- व्यक्तिगत स्वच्छता व स्वास्थ्य
- बीमारियों की रोकथान और नियंत्रण

- बाल पोषण व विकास (विटामिन ए, आईएफए, ओआरएस, जिंक और कैल्शियम)
- किशोर पोषण व शारीरिक गतिविधि
- एएनसी और महत्व के घटक

- जन्म देने से पहले होने वाली देरी से बचने की तैयारियां
- सामुदायिक स्तर पर जिरियाट्रिक देखभाल, इसमें मधुमेह, कैंसर, अंधपन व मानसिक बीमारियों पर फोकस

- स्वास्थ्य की तलाश-स्वास्थ्य के प्रचार

 

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योंं होगी प्रक्रिया...
- मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों का राज्य स्तर पर थीमवार आमुखीकरण किया जाएगा।

- आमुखीकरण के बाद वे अपने कॉलेज के विद्यार्थियों को तैयार करेंगे।
- दो विद्यार्थियों की संयुक्त टीम, कुल चार टीम व मेडिकल कॉलेज से एक सुपरवाइजर एक वाहन से अपने तय गांवों में जाएंगे वहां जागरुकता अयान आयोजित करेंगे।

- एक टीम एक माह में एक-एक थीम पर गांव जाकर जानकारी देगी। ऐसे में कुल दस माह में दस थीम पर काम होगा। वाहन किराये की राशि जिला स्वास्थ्य समिति देगी। वहां ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय चिकित्सा दल को भी साथ लेगी।
- जिला मुख्‍यालय से 50 किलोमीटर की दूरी वाले गांवों में जाना होगा।

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सरकारी कॉलेजों के अलावा उदयपुर के पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज व इंस्टीट्यूट, गीताजंलि मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, राजसमन्द का अनन्ता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस व रिसर्च सेंटर सहित जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को शामिल किया गया है।

इसमें दो सेमेस्टर पूर्ण कर चुके डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी गांवों में जाएंगे। ाावी चिकित्सकों को लोगों से रूबरू करवा जीवन जीने के तरीकों को समझाने से कई परेशानियां हाल होंगी, रोग ाी दूर होंगे।

डॉ अशोक आदित्य, आरसीएचओ व कार्यक्रम नोडल ऑफिसर

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