कैंसर से आजाद हुई ‘जयश्री’, खुद के दम पर 9 साल लड़ाई लडकऱ जीती बीमारी से ‘जंग’

कैंसर वॉरियर जयश्री पालीवाल की कहानी आपको भी करेगी प्रेरित

By: madhulika singh

Published: 16 Aug 2019, 02:57 PM IST

मधुलिका सिंह /उदयपुर. कैंसर का पता चलने पर कोई यदि खुश हो जाए तो उसे आप क्या मानेंगे। हम बात कर रहे हैं एक ऐसी महिला की जिसे कैंसर जैसी बीमारी का पता चलने पर मानो खुशी का अहसास हुआ। ऐसा सुनकर एक बार तो आप भी चौंक जाएंगे। लेकिन ये सच है कि उदयपुर की जयश्री पालीवाल कैंसर से ऐसी लड़ी कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी उसके सामने हार गई। जयश्री ने उन क्षणों में हिम्मत नहीं हारी बल्कि लड़ाई करने का फैसला किया और इस वजह से खुश हुई कि कैंसर के फस्र्ट स्टेज में ही उसे इसका पता चल गया। कीमोथैरेपी के कई दर्दनाक अनुभव आज भी उसकी टीस बढ़ा देते हैं, लेकिन जीवन के प्रति पॉजीटिव सोच ने उसे इस दर्द से उबरने की जबर्दस्त ताकत दी। अमूमन कैंसर को लेकर ख्याल रहते हैं कि इसके बाद जिंदगी नहीं होती और होती भी है तो नर्क से भी बदतर। लोग इस बीमारी को जीवन भर की बेडिय़ां बना लेते हैं और उससे निकलने के बजाय उसी में फंस कर रह जाते हैं, सारी उम्मीदें छोड़ देते हैं। लेकिन, जयश्री ने उन ख्यालों से ना खुद को आजाद किया बल्कि इस बीमारी की बेडिय़ां भी तोड़ीं और आज अपनी अलग पहचान बनाकर नारी शक्ति की एक मिसाल कायम की है। 

 

jaishree paliwal

क़ीमोथैरेपी ने शरीर तोड़ा लेकिन फिर भी नहीं हारी हिम्मत -

जयश्री पालीवाल उदयपुर के मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर कार्यरत हैं। यूं तो वे मूलत: मुंबई से हैं लेकिन उदयपुर में शादी हुई और उनका ननिहाल नाथद्वारा में है तो यहीं की होकर रह गईं। जयश्री ने बताया कि वर्ष 2009 में जब उनकी बेटी भूमि तीन साल की थी तब उन्हें पता चला कि बे्रस्ट कैंसर है लेकिन फस्र्ट स्टेज में। ये बात सुनकर वे खुश हो गईं। परिवार को बताने पर पिताजी दिनेश और मां मधु बागोरा ने तुरंत मुंबई में इलाज कराया। जब कीमो थैरेपी हुई तो इसने शरीर को तोड़ कर रख दिया लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कीमोथैरेपी का अनुभव बहुत बुरा रहा। इसके बाद पढ़ाई पर ध्यान दिया और गेस्ट फैकल्टी बन शिक्षा क्षेत्र में सेवा देती रहीं। 9 साल बाद वापस यूटरस में लम्प आया जिससे हिस्टरेक्टमी (एक सर्जरी है जिसमें गर्भाशय को शरीर से निकाल दिया जाता है) कराना पड़ा। ऑपरेशन के दो महीने के बाद वापस कॉलेज जॉइन कर लिया।

बीमारी से डरें नहीं, खुलकर बात करें-

जयश्री ने बताया कि अक्सर महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के बारे में हिचकिचाहट से खुलकर बात भी नहीं करतीं। ना ही शर्म के मारे मेमोग्राफी कराती हैं। जिसके कारण बाद में दुखद परिणाम सहने पड़ते हैं। ऐसे में हर महिला को अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात करनी आनी चाहिए और सही समय पर अगर बीमारी का पता चल जाए तो उसे दूर करने में आसानी होती है। जयश्री ने बताया कि वे भी हारी नहीं और ना ही बीमारी के आगे घुटने टेके। हर समय और हर पल खुश रहीं। वहीं, माता-पिता, दोनों भाई मयंक व भरत, भाभी खुशबू, बहन मीनाक्षी का पूरा सहयेाग रहा। बेटी ने भी हमेशा हौसला बंधाया। इसके अलावा कॉलेज की प्रो. सीमा मलिक,प्रदीप त्रिखा और दरियाव सिंह चूंडावत ने भी खूब प्रेरित किया। फिर योग और मेडिटेशन वे इस बीमारी से बचने में सफल हो पाईं।

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