उदयपुर अशोक नगर के पॉश इलाके में छह दिन से नग्न पड़ा रहा ये आदमी, कोई नहीं आया मदद को, आखिरकार इन्होंने कराया अस्पताल में भर्ती

उदयपुर. वह कहां से आया और कौन है? जैसे सवालों पर वह मौन साधे हुए है।

By: jyoti Jain

Published: 10 Nov 2017, 11:36 AM IST

उदयपुर . निष्ठुर समाज या परिवार से जाने कौन सी मानसिक यातना मिली कि वह सुधबुध ही खो बैठा और पिछले छह दिन से वह नंग-धड़ंग काया लिए पोश इलाके अशोकनगर सुख सागर पैलेस के पीछे नाली के किनारे सो रहा था। वह कहां से आया और कौन है? जैसे सवालों पर वह मौन साधे हुए है। मोहल्लेवासी पिछले छह दिन से माजरा देख महज फौरी सूचना के नाम पर पुलिस को फोन घनघना रहे हैं लेकिन उसे संभालने व अस्पताल पहुंचाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।


आसमान तले नाली किनारे ठिठुरती काया पर गुरुवार शाम बाल कल्याण समिति सदस्य बी.के. गुप्ता की अचानक नजर पड़ी तो उन्होंने पत्रिका व भूपालपुरा थानापुलिस को सूचना दी। पत्रिका टीम के पहुंचने के कुछ देर बाद पुलिस का जाब्ता व नारायण सेवा संस्थान की एम्बुलेंस पहुंची। गुप्ता ने विजय प्रभाकर, प्रदीप कनेरिया की मदद से उसे एमबी. चिकित्सालय पहुंचाया। जहां मनोचिकित्सक डॉ.एके.शर्मा ने उसे संभाला। इस बीच मोहल्लेवासियों का कहना था उन्होंने कई बार भूपालपुरा थाना पुलिस को सूचित किया लेकिन कोई नहीं आया।

 

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पिचका गया पेट और धंस गई आंखें
बढ़ी हुई दाढ़ी, लम्बे बाल, धंसी हुई आंखें, पिचका हुआ पेट, नग्नावस्था और शून्य में ताकते इस शख्स के पास कुल जमा पूंजी के नाम पर फटे पुराने कपड़ों की एक गठरी है, जिसे वह सिहराने लगाए संभाले हुए था। भूख लगने पर वह कभी नाली में पड़ी झूठन को निवाला बना रहा था तो कभी मोहल्लेवासियों द्वारा फेंकी गई खाने पीने की चीजों को वह टुकुर-टुकुर देख खा रहा था।

 

बांसी व मैला लगा भोजन खाने से उसमें शारीरिक रुग्णता भी घर कर चुकी थी। पूरे शरीर से उठती बदबू, नग्नावस्था व मौका स्थिति देख महिलाएं मुंह फेर कर आगे बढ़ जाती थी तो बच्चे ठहाके लगाकर उसका उपहास उड़ा रहे थे, पर जो भी हो, आखिरकार है तो वह आदमी हीं?

 

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समझे मानवीय धर्म
किसी भी विक्षिप्त, लावारिस, विमंदित, घायल पीडि़त या बालक को देखे तो तुरंत ही मानवीय धर्म के नाते उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाने में आगे आए। हमारा छोटा सा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है तो किसी को अच्छा जीवन दे सकता है। छह दिन से एक विक्षिप्त के पोश इलाके में पड़े रहने से मन काफी द्रवित हो उठा।
बी.के.गुप्ता, बाल कल्याण समिति सदस्य

jyoti Jain
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