सुविवि ने संविदाकर्मियों को नियम विरुद्ध बांटा अतिरिक्त पैसा, अब लगाई रोक

संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों ने कहा- यह हमारे साथ भेदभाव, स्थायी कर्मचारियों को मिलता रहेगा ज्यादा काम का अतिरिक्त पैसा

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से 'एÓ ग्रेड प्राप्त मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में तय समय से ज्यादा काम का अतिरिक्त पैसा देने को लेकर खलबली मच गई है। विवि प्रशासन ने स्थापना के समय से ही चली आ रही इस व्यवस्था को धन का दुरुपयोग और नियम विरुद्ध बताते हुए बंद कर दिया है। इसे लेकर संविदाकर्मियों में असंतोष पैदा हो गया है।
विवि के रजिस्ट्रार ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों में सेवानिवृत्त एवं सेल्फ फाइनेंस एडवाइजरी बोर्ड (एसएफएबी) के जरिये काम कर रहे कार्मिकों व सर्विस कंसल्टेंट्स को स्थित वेतन के अलावा अब तक दिए जा रहे अतिरिक्त पारिश्रमिक या मानदेय भुगतान को नियम विरुद्ध बताया। साथ ही कहा कि यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। आदेश में लिखा कि विवि द्वारा जारी प्रशासनिक स्वीकृतियों और समझौतों में स्पष्ट रूप से कार्मिकों को स्थिर वेतन के अलावा कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करने को लेकर साफ निर्देश दे रखे हैं। कुल सचिव ने आदेश में लिखा कि अगर किसी कार्मिक को इस तरह का अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है, तो तुरंत बंद कर दें। केवल निर्धारित तनख्वाह का भुगतान बैंक या चेक के माध्यम से करें। पांच साल पहले संविदाकर्मियों की नियुक्ति विवि प्रशासन ने एसएफएबी के माध्यम से शुरू कर दी थी, जिन्हें हर साल प्रक्रिया के तहत चयनित किया जाता है।
- आदेश से फैला असंतोष- कहा यह अनुचित आदेश
इस आदेश से विवि में एसएफएबी के माध्यम से लगे तकरीबन 200 संविदा कार्मिकों में असंतोष फैल गया है। संघठक कॉलेजों, विभिन्न विभागों, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक, अध्यक्ष, विवि क्रीड़ा मण्डल, मुख्य अधीक्षक छात्रावास, विवि अभियंता, उप पुस्तकालयाध्यक्ष, केन्द्रीय पुस्तकालय तथा सभी पाठ्यक्रम निदेशकों के नाम से आदेश जारी हुआ है। इन सभी इकाइयों में दर्जनों संविदाकर्मी काम कर रहे हैं।
- सीट एक, काम एक, फिर भी समानता नहीं
संविदाकर्मियों ने बताया कि उनसे परीक्षा ड्यूटी, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा फॉर्म जांच, रजिस्ट्रेशन और सालभर में कई मौकों पर सुबह 10 से शाम पांच बजे तक की ड्यूटी के अलावा भी अतिरिक्त काम लिया जाता है। इन कामों में स्थायी कर्मचारी भी काम करते हैं। जब एकसाथ बैठकर समान काम का स्थायी कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन दिया जा रहा है, तो उनका पैसा क्यों रोका जा रहा है? वे यह अतिरिक्त पैसा भी अपनी ड्यूटी के अलावा काम का ले रहे हैं। यह भी काम की तुलना में बेहद कम है। जो मिल रहा है, उसे भी बंद किया जा रहा है। संविदाकर्मियों ने बताया कि छह हजार रुपए चतुर्थश्रेणी कार्मिक तथा 12 हजार रुपए वेतन बाबू को मिलता है, जबकि स्थायी कर्मचारी 80 हजार रुपए तक वेतन लेते हैं और सालभर का एक लाख रुपए उन्हें अतिरिक्त पारिश्रमिक मिल जाता है। ऐसे में उनका हक क्यों मारा जा रहा है।
- क्या होगी रिकवरी?
रजिस्ट्रार ने इस तरह के भुगतान को नियम विरुद्ध बताया है, तो सवाल यह कि वर्षों से किए जा रहे अतिरिक्त पारिश्रमिक भुगतान की क्या अब वसूली की जाएगी? आदेश में सिर्फ यह लिखा हुआ है कि भुगतान तुरंत बंद किया जाए। अब तक हो चुके भुगतान को भी विवि प्रशासन ने नियम विरुद्ध माना है। गौरतलब है कि वर्ष 1962 में सुविवि की स्थापना हुई थी, जिसके बाद से जरूरत के मुताबिक संविदा पर कार्मिक रखे जा रहे हैं। इधर, इस सम्बंध में सम्पर्क करने पर रजिस्ट्रार हिम्मत सिंह बारहठ ने फोन रिसीव नहीं किया।

jitendra paliwal Desk
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