सात बच्चों को पालती मां, सरकारी मदद को तरसी

पति की अकाल मौत पर न मुआवजा मिला ना विधवा पेंशन, दर-दर भटकने को मजबूर

By: Pankaj

Updated: 06 Jan 2020, 02:06 AM IST

नारायणलाल वडेरा/कोटड़ा . सात बच्चों के सिर पर पिता का साया उठ गया। उनके पालन पोषण का जिम्मा मां पर आन पड़ा। एक साल होने को आया, मां को विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिला। गुजारा चलाना मुश्किल हो गया। जख्मों पर पेंशन का मरहम पाने के लिए मां 7 बच्चों के साथ दफ्तरों के चक्कर काट रही है। और तो और पति की अकाल मौत पर नियमानुसार मिलने वाली मुआवजा राशि भी नहीं मिल पाई।

मामला लाम्बाहल्दू ग्राम पंचायत के निचला थला खादरा फला का है, जहां पति की मौत के बाद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर विधवा को न पेंशन मिली और ना ही मुआवजा राशि स्वीकृत हुई। व्यथा है 7 बच्चों की मां पूनी की। जिसके पति की मौत 10 माह पहले हुई थी।

नही मिला कृषक बीमा
विधवा पूनी का पति मोड़ा गमार, जो कि पिछले साल गेंहू के खेत में सिंचाई कर रहा था। जहरीले जीव के काटने से मोड़ा की मौत हो गई थी। पति की अकाल मौत के बाद विधवा पूनी 7 बच्चों को लेकर मुआवजा राशि के लिए भटकने लगी। जितने दस्तावेजों की जरूरत थी, तैयार करवाकर आवेदन किया, लेकिन 10 माह बीतने के बाद भी मुआवजा राशि नहीं मिली है।
न पेंशन मिली, ना ही पालनहार का लाभ

विधवा पूनी के सात बच्चे हैं। सबसे बड़ा रातू 12 साल का, नीलेश 10, कोकिला 8, काली 6, चिंता 4, विजय 2 साल और अस्मिता 6 माह की है। पालन पोषण के लिए पेंशन और पालनहार योजना के लिए कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा चुकी है। जब कहीं से भी सहयोग की उम्मीद नहीं मिली तो हताश होकर दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करने लगी। परिवार की जिम्मेदारी ऐसी की बड़े बेटे रातू को पढ़ाई छोडऩी पड़ी।

राशन के गेहूं से चलता गुजारा
विधवा पूनी ने बताया कि मजदूरी के अलावा परिवार में आय का कोई स्त्रोत नहीं है। राशन डीलर से हर माह मिलने वाले 35 किलो गेंहू से घर चलता है। इससे पूरा महीना भी निकालना मुश्किल हो रहा है। पूनी खुद काम करना चाहती है, लेकिन छोटे बच्चों को छोड़कर दूर मजदूरी पर जाना संभव नहीं हो पा रहा है।
टूटे केलूपोश मकान में आसरा

पूनी बाई ने बताया कि परिवार सालों से टूटे, पुराने केलूपोश मकान में ही रहता है। बारिश में पानी गिरता है, वहीं ठण्ड में शीतलहर आहत कर देती है। अभी तक सरकारी आवास का लाभ भी नहीं मिला है।

फिलहाल मैं जयपुर हूं। इस मामले को लेकर मैंने कृषि मंडी के अधिकारियों से भी बात की है कि जल्द ही आश्रितों को मुआवजा दिया जाए। वहीं पेंशन, पालनहार योजना के लाभ के लिए लौटते ही जानकारी लेता हूं।
बाबूलाल खराड़ी, विधायक, झाड़ोल
मैंने लाम्बाहल्दू ग्राम पंचायत अभी जॉइन की है। अगर ऐसा मामला है तो तुरंत ही पेंशन, पालनहार का लाभ शुरू करवा दिया जाएगा।

भूपेंद्र सिंह झाला, ग्राम विकास अधिकारी, लाम्बाहल्दू

Pankaj Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned