अब बिना फ्रिज के भी 21 दिन तक फल-सब्जियांं रह पाएंगी तरोताजा, कृषि वैज्ञानिकों ने इजाद की तकनीक

अब बिना फ्रिज के भी 21 दिन तक फल-सब्जियांं रह पाएंगी तरोताजा,  कृषि वैज्ञानिकों ने इजाद की तकनीक
अब बिना फ्रिज के भी 21 दिन तक फल-सब्जियांं रह पाएंगी तरोताजा, कृषि वैज्ञानिकों ने इजाद की तकनीक

Madhulika Singh | Updated: 11 Oct 2019, 12:07:29 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

एमपीयूएटी के कृषि वैज्ञानिकों ने इजाद की बेहतरीन और सस्ती तकनीक, खेत-बागानों से तोडऩे के बाद किसान बिना खराबे का नुकसान उठाए पहुंचा सकेंगे बाजार

चंदन स‍िंह देवड़ा/ उदयपुर. देश में किसान जितनी पैदावार फलों और सब्जियों की करते हैं उसका करीब 30 प्रतिशत हिस्सा तुड़ाई से लेकर बाजार में पहुंचने तक खराब हो जाता है। ऐसे किसानों के लिए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय(एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक इजाद की है कि उसके सस्ते और सुलभ उपयोग से किसान पैदावार को 21 दिन तक तरोताजा रखते हुए बेच सकेगा। यह नेनो फार्मूलेशन पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है, जिससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। इस तकनीक को भारतीय पेटेंट जर्नल के सितम्बर अंक में प्रकाशित किया गया है।

एमपीयूएटी के अनुसंधान निदेशक डॉ. अभय दशोरा ने बताया कि मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग एवं हॉर्टिकल्चर विभाग के वैज्ञानिकों डॉ. विनोद सहारण और डॉ शालिनी पिलानिया के निर्देशन में फल-सब्जियो को सुरक्षित रखने की लिए सूक्ष्म जैव घटकों की यह नैनो टेक्नॉलाजी विकसित की गई। बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर एवं कैल्सियम-कॉपर का बारीक पाउडर पानी में घोल कर फलों और सब्जियों को उससे धोया जाता है, जिससे यह फंगस-बैक्टीरिया से सुरक्षित हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि फलों एवं सब्जियों की वास्तविक गुणवत्ता को लंबे समय तक बिना कोल्ड स्टोरेज या फ्रिज में रखने के बावजूद कायम रखा जा सकेगा। किसान तुड़ाई के बाद इन्हें धोकर मंडी में पहुंचाएगा तब तक यह खराब नहीं होगी और इसकी चमक बरकरार रहने से पूरा दाम भी मिलेगा।

बाल का 40 हजार गुना पतला नेनो कवच

कृषि वैज्ञानिक डा. सहारण ने बताया कि इस तकनीक में जो सूक्ष्म कण (नेनो-फोर्मूलेशन) बनाए गए है वह बहुत ही कम मात्रा में असर कारक है। पानी में इसे मिलाकर सब्जियों और फलों को धोने पर एक बहुत ही सूक्ष्म कवच (नेनो कवच) फल-सब्जियों पर बनते हैं, जो मनुष्य के बाल के चालीस हजार गुना पतला होता है। इसमें बायो-पॉलीमर का उपयोग किया गया है, जो कि एक प्रकार की बहुलक शर्करा है, जो पूरी तरह सुरक्षित है एवं इसकी लागत बहुत कम है। एक लीटर पानी में एक ग्राम से भी कम मात्रा में उपयोग करना पड़ता है। लेब में एक किलो नेनो फॉर्मूलेशन तैयार करने में महज 1600 रुपए खर्च आया, जबकि यह अधिक मात्रा में बनेगा तो इससे भी सस्ता पड़ेगा।


ईरान ने भी दिखाई तकनीक में रुचि

इस तकनीक को विकसित करने के बाद विश्वविद्यालय को डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, गवर्मेंट ऑफ इंडिया और ईरान की डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने संयुक्त रूप से आगे के अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता के लिए चुना है। ऐसे में दोनों देशों के वैज्ञानिक फल-साब्जियों की कटाई उपरांत तकनीकों का विकास करेंगे।

घातक रसायनों से यह बेहतर ...

देश में फल एवं सब्जी का उत्पादन क्रमश: 97 और 184 मिलियन टन है, जो पूरे विश्व में दूसरे स्थान पर है। वैज्ञानिकों की मानें तो प्रतिवर्ष कुल फल-सब्जी उत्पादन का लगभग 30-40 प्रतिशत हिस्सा विभिन्न कारणों से खराब हो जाता है और उपभोक्ता तक नहीं पंहुच पता। सस्ती भंडारण तेज परिवहन की समस्या भी मुख्य कारक है। अब तक किसान फल-सब्ज्यिों को ताजा रखने की लिया कई रसायनों का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें मैलिक हाइड्रेजाईड, एन-6 बेंजाईन ऐडेमीन, टोपसिन-एम बासिस्टिन, बेनलेट शामिल है। फलों पर मोम की एक पतली (वैक्स कोटिंग) परत भी बनाई है, जो फलों को लम्बे समय तक खराब होनी से बचाती है लेकिन इनके अधिक उपयोग कैन्सर जैसी घातक बीमारियों का कारण बनता है। सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट एवं विटामिन भी नष्ट हो जाते हैं।

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