तरुण सागरजी का उदयपुर से था विशेष लगाव ...155 दिन गुजारे , 2011 में किया था चातुर्मास

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धीरेंद्र जोशी/उदयपुर. क्रांतिकारी राष्ट्रसंत तरुण सागरजी जितने बड़े संत थे, उनमें उतना ही वात्सल्य और सरलता व्याप्त थी। उनके सान्निध्य में एक बार कोई व्यक्ति आ जाता तो उनका मुरीद हो जाता था। संत के जितने जैन अनुयायी थे, उतने ही अजैन भी थे। एेसे महान संत का सान्निध्य 2011 में उदयपुरवासियों को मिला। यह सौभाग्य की बात है। तरुण सागरजी के देवलोकगमन की सूचना मिलने पर शहर के अनुयायियों पर भारी वज्रपात गिरा। कई अनुयायी अपने गुरु के दर्शन करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। उदयपुर के अधिकांश लोगों ने मुनि द्वारा उदयपुर में वर्ष 2011 में किए गए संस्मरण याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने कहा कि मुनि के कड़वे प्रवचन जीवन की कड़वाहट को दूर कर देते थे। उनकी कही एक-एक पंक्ति जीवन की गहराइयों और सच्चाइयों को लिए हुए थी। हकीकत से रूबरू करवाते थे प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि तरुण सागरजी एेसे संत थे, जो अपने कड़वे वचनों से हकीकत को जनता के सामने रखते थे। उनके व्याख्यान को सुनने के लिए हजारों लोग आते थे। पिछले कुछ समय से उनकी आवाज देश की जनता को सुनना संभव नहीं हो पाया है। आज उनका देवलोकगमन हो गया है। मैं सोचता हूं कि हम लोग वास्तव में उनके प्रति सम्मान रखते हैं तो उनकी कही हुई बातों को हृदय में उतारे और बुराइयों को दूर करने का प्रयास करें। 155 दिन की सेवा का सौभाग्य तरुण क्रांति मंच के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र चित्तौड़ा ने बताया कि मुनि तरुण सागरजी ने वर्ष-2011 में उदयपुर में चातुर्मास किया था। उस समय में मंच का अध्यक्ष मैं ही था। एेसे महान संत की 155 दिन की सेवा करने का सौभाग्य उदयपुर के श्रावक-श्राविकाओं को मिला यह सौभाग्य की बात है। इसके साथ ही हमारे लिए एक ओर सौभाग्य की बात है कि वर्ष-2011 में फरिदाबाद में चातुर्मास के दौरान मुनि ने उदयपुर के तरुण क्रांति मंचको सर्वश्रेष्ठ ईकाई का पुरस्कार भी दिया। मृत्यु महोत्सव कर दिखाया चातुर्मास व्यवस्था समिति के प्रचार-प्रसार मंत्री पारस चित्तौड़ा ने बताया कि संत किसी एक संप्रदाय और समाज के नहीं थे, बल्कि सभी के लिए थे। उन्होंने लालकिले से कड़वे प्रवचन दिए और देश के साथ ही विदेशों में भी भगवान महावीर की वाणी को पहुंचाया। मुनि को जैन समाज से अधिक श्रावक-श्राविकाएं मानते थे। वे हमेशा मृत्यु महोत्सव कहते थे। जो उन्होंने कर दिखाया। उनके 2011 के चातुर्मास के बाद ही मुझमें मुनि सेवा करने की भावना जाग्रत हुई। हस्तियां भी मुनि की कायल महामंत्री सुरेश राजकुमार पद्मावत ने कहा कि मुनि का चातुर्मास के लिए 7 जुलाई, 2011 को उदयपुर में मंगल प्रवेश हुआ था। बी.एन. कॉलेज के ग्राउण्ड में बनाए गए विशाल डोम पाण्डाल में लगातार 30 दिनों तक मुनि ने कड़वे प्रवचन दिए। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग प्रवचन सुनने आते थे। इनमें प्रसिद्ध व्यक्ति भी शामिल थे। इनमें मुख्य रूप से आरएसएस के मोहन भागवत, भाजपा की वरिष्ठ नेता मेनका गांधी, विरेन्द्र हेगड़े, राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल सहित कई राजनेता, उद्योगपतियों ने उपस्थित होकर मुनि से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने कहा कि आज हम नम आंखों से गुरुदेव के मृत्यु महोत्सव के लिए एकत्रित हुए हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि गुरुदेव के मृत्यु महोत्सव की प्रसन्नता करें या एक राष्ट्रसन्त को खोने का गम करें। आज होगी विनयांजलि सभा प्रचार प्रसार मंत्री पारस चित्तौड़ा ने बताया कि क्रांतिकारी राष्ट्रसन्त मुनि तरुण सागर की सल्लेखना पूर्वक समाधि को लेकर रविवार को श्रद्धांजलि व गुणानुवाद सभा होगी। यह सभा सकल दिगम्बर जैन समाज उदयपुर, श्री पाश्र्वनाथ क्रांति युवा संस्थान एवं श्री तरुण क्रंति मंच गुरु परविार की ओर से रविवार को सुबह 8.30 बजे तेलीवाड़ा स्थित हुमड़ भवन में मुनि संघ के सानिध्य में होगी। इस सभा में जैन-अजैन सभी उपस्थित होंगे। पत्रिका कार्यालय भी आए मुनि वर्ष-2011 में चातुर्मास पर उदयपुर आए मुनि तरुण सागर ने राजस्थान पत्रिका के सुंदरवास स्थित कार्यालय का अवलोकन भी किया। उनका कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पाद प्रक्षालन किया। इस दौरान मुनि ने अखबार की पुरी प्रक्रिया समझने के साथ ही पत्रिका की निर्भिक लेखनी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की थी।

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जहां गए उमड़े लोग

3 जुलाई 2011 को आये थे लूणदा लूणदा. राष्ट्र संत क्रांतिकारी मुनि तरुण सागर ३ जुलाई, 2011 को उदयपुर जिले में प्रवेश कर लूणदा में रात्रि विश्राम किया था। इस दौरान उदयपुर सहित आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने अमरपुरा जागीर चौराहे पर मुनि की अगवानी की। वहीं लूणदा में धर्मसभा को संबोधित किया था। उन्होंने संबोधन में कि 'मजहब नहीं मान्यता बदलने आया हूं।कटारीया व भीण्डर ने भी लिया था आशीर्वाद २०११ को जब राष्ट्रसंत मुनि तरुण सागर लूणदा पहुंचे तत्कालीन विधायक गुलाब चन्द कटारिया, रणधीर सिंह भीण्डर व गौतम लाल मीणा ने अगवानी करते हुए आशीर्वाद लिया था।

Krishna Reporting
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