चार घोड़ा रो रथड़ो सजायो


अमरपुरा जागीर में नानी बाई रो मायरो कथा

By: surendra rao

Published: 01 Jul 2019, 06:08 PM IST

उदयपुर. लूणदा. अमरपुरा जागीर में नानी बाई रो मायरो कथा के दूसरे दिन सोमवार को हिंता के कथावाचक पंडित फतेहलाल महाराज ने कहा कि भक्त नरसी मेहता ठाकुर जी के भरोसे नगर अंजार पहुंच गए। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि सांवरिया सेठ नानी बाई का मायरा जरूर भरेंगे। साधु संतों के साथ नरसी जी को देख सगे संबन्धियों ने हंसी और बुराइयों में कमी नहीं रखी। कथा में टूटी -टूटी गाड़ी लम्बी -लम्बी दाढ़ी आ गया नरसी जी भजन सुनाया तो पांडाल गूंज उठा। कथावाचक ने प्रसंग में कहा कि नरसी जी का किसी ने आदर सत्कार नहीं किया क्योंकि नरसी जी मायरा नहीं लाए थे। भाई बंधु भी साथ में नहीं आए। ऐसा जानकर मायरे का डेरा गांव के बाहर दिलाया और यहां तक की नरसी जी को बासी भोजन परोसा गया। नरसी जी ने भगवान को याद किया तो भोजन ताजा बन गया अब मायरा भरने का समय आया तो भक्त नरसी मेहता ने भगवान का गुण -गान गाया तो ठाकुर जी ने अपना रथ सजाया और जो सगे सम्बन्धियों ने हंसी करके मायरे की पानड़ी लिखी वो ठाकुर जी ने मायरा अपने रथ में सजाया और भगवान सांवरिया सेठ, राधा -रुक्मणि एवं परिवार को साथ में लिया 'चार घोड़ा रो रथड़ो सजायो भजन गाया तो पांडाल में भक्त थिरकने लगे। कथा में महुड़ा उतरवाड़ा सहित आसपास के गांवों से भक्त कथा सुनने पहुंच रहे हंै।

surendra rao Desk
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